23/01/2026
सर छोटू राम (1881-1945) अविभाजित पंजाब के एक महान राजनेता और किसान नेता थे, जिन्हें 'किसानों का मसीहा' कहा जाता है, जिन्होंने किसानों और मजदूरों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया और 'कर्ज मुक्ति अधिनियम' जैसे कई कानून बनवाए, साहूकारों के चंगुल से किसानों को छुड़ाया, और भाखड़ा बांध परियोजना की नींव रखी, जिससे वे पंजाब के गरीबों के मसीहा बन गए।
मुख्य बातें:
वास्तविक नाम: राय रिछपाल, जो घर में सबसे छोटे होने के कारण 'छोटू' कहलाते थे।
जन्म: 24 नवंबर 1881, गढ़ी सांपला, रोहतक, पंजाब (अब हरियाणा)।
कार्यक्षेत्र: स्वतंत्रता-पूर्व भारत में एक प्रमुख कृषि सुधारक और राजनेता।
मुख्य योगदान (किसानों के लिए):
कानून: 'पंजाब ऋण राहत अधिनियम (1934)', 'पंजाब देनदार संरक्षण अधिनियम (1936)' जैसे कानून लाए, जिनसे किसानों को कर्ज से राहत मिली।
न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP): किसानों को फसल की लागत का मुआवजा देने की अवधारणा पेश की, जो MSP प्रणाली का आधार बनी।
भाखड़ा बांध: किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए भाखड़ा बांध परियोजना की कल्पना की।
मजदूरों के लिए: 'व्यवसाय श्रमिक अधिनियम (1940)' जैसे कानून लाए, जिससे मजदूरों को 8 घंटे काम, छुट्टी और उचित मजदूरी मिली।
राजनीतिक दल: नेशनल यूनियनिस्ट पार्टी के सह-संस्थापक थे, जिसने पंजाब में शासन किया।
अन्य कार्य: 'जाट गजट' अखबार निकाला, 'ठग बाज़ार की सैर' और 'बेचारा किसान' जैसे लेख लिखे।
उपाधियाँ: 1937 में 'नाइट' की उपाधि मिली और उन्हें 'दीनबंधु' भी कहा जाता है।
सर छोटू राम ने किसानों की आवाज बुलंद की और उन्हें साहूकारों व शोषण से बचाने के लिए अथक प्रयास किए, जिसके कारण उन्हें आज भी 'किसानों का मसीहा' और 'दीनबंधु' के रूप में याद किया जाता है।