17/04/2018
जस्टिस फ़ॉर आसिफा की मांग कर रहे हैं जरूर कीजिये पर एक बार पढिये जरूर
बलात्कार के 4 मामले सामने आए हैं कठुआ जम्मू (8 वर्षीय बालिका, बलात्कारी हिंदू), नगरोटा जम्मू (7 वर्षीय बालिका के साथ मौलवी द्वारा मदरसे में बलात्कार, *बलात्कारी मुसलमान), नगांव असम (5 वर्षीय बालिका बलात्कारी मुसलमान), सासाराम बिहार (6 वर्षीय बालिका बलात्कारी मुसलमान)* किंतु दिल्ली में कांग्रेसी और मीडिया के साथ सोशल मीडिया पर आप सब केवल कठुआ के आसिफा वाले रेप के केस के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं।
*चारों बच्चियों का बलात्कार* कर हत्या कर दी गई है। मेरे विचार से चारों घटनाओं के अपराधियों को मृत्युदण्ड मिलना चाहिए,
किन्तु देश का बुद्धिजीवी वर्ग, मानवाधिकार संगठन, तथाकथित सिविल सोसायटी और मीडिया सोशल मीडिया आप सभी फेसबुकी क्रांतिकारी केवल पहली घटना पर केंद्रित होकर आक्रोशित हैं। जानना चाहता हूँ ऐसा क्यों ? चारों ही पीड़िताओं संग एक ही प्रकार का अपराध हुआ किन्तु फिर सभी पीड़िताओं के प्रति एक जैसी संवेदनशीलता, दुःख व् आक्रोश क्यों नहीं दिखा , क्यों बाकी तीनों घटनाओं को दबा दिया गया बुद्धिजीवी वर्ग द्वारा और मीडिया द्वारा ?
क्या इसलिए की पहली वाली पीड़िता बच्ची मुस्लिम थी, और बाकी तीनों ही पीड़ित बालिकाएं हिन्दू और उनके बलात्कारी व् हत्यारे मुस्लिम ? ये डबल स्टैण्डर्ड क्यूँ है
आखिर इसके पीछे कौनसी मानसिकता है। अपराधी और पीड़ित में धर्म के आधार पर इतना भेदभाव कौन फैला रहा है और आप बिना सोचे समझे उसका हिस्सा तो नहीं बन रहे हैं
इस प्रश्न का जवाब ढूंढिए और सबके लिए न्याय मांगिये सबकी आवाज़ उठाइये
बाकि मीडिया और सोशल मीडिया की चलायी भेड़चाल में justice for asifa का नारा और हैशटेग लगाने मात्र से आपको तसल्ली मिलती है तो आप स्वतंत्र हैं पर निष्पक्ष नहीं
न्याय हर पीडित के लिए चाहिए और दंड हर अपराधी के लिए
यही धर्म है यही न्याय है