16/08/2026
जय श्री कृष्णा! 🙏✨
हरियाणा के 'सूर्य कवि' दादा लखमीचंद जी की कलम से निकली एक बेहद ही भावपूर्ण और रूह को छू लेने वाली रचना! 📖🌾
"जमना जी के कण्ठारे पै, तुम गऊ चराओ आ कै जी..."
इस अद्भुत हरियाणवी रागनी में भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं— सुदामा की सच्ची मित्रता, द्रोपदी की लाज बचाना, नरसी भगत का भात भरना और दुष्टों के संहार— का बहुत ही मार्मिक वर्णन किया गया है। रागनी के अंत में दादा लखमीचंद जी ने कलियुग की कड़वी सच्चाई को बयान करते हुए प्रभु से इस जीवन रूपी नैया को पार लगाने की प्रार्थना की है।
अपनी हरियाणवी संस्कृति, बोली और इस अनमोल लोक-साहित्य पर हम सभी को गर्व होना चाहिए। ❤️
👇 आपको दादा लखमीचंद जी की इस रागनी की कौन सी पंक्ति सबसे ज्यादा पसंद आई? कमेंट में 'जय श्री कृष्णा' जरूर लिखें!
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