हरयाणवी रागनी फैन क्लब।

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हरयाणवी रागनी फैन क्लब। जय हरयाणवी संस्कृति
जै रागणी सुणन का शोंक है तो पेज न फोलो कर ल्यो
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जय श्री कृष्णा! 🙏✨​हरियाणा के 'सूर्य कवि' दादा लखमीचंद जी की कलम से निकली एक बेहद ही भावपूर्ण और रूह को छू लेने वाली रचन...
16/08/2026

जय श्री कृष्णा! 🙏✨
​हरियाणा के 'सूर्य कवि' दादा लखमीचंद जी की कलम से निकली एक बेहद ही भावपूर्ण और रूह को छू लेने वाली रचना! 📖🌾
​"जमना जी के कण्ठारे पै, तुम गऊ चराओ आ कै जी..."
​इस अद्भुत हरियाणवी रागनी में भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं— सुदामा की सच्ची मित्रता, द्रोपदी की लाज बचाना, नरसी भगत का भात भरना और दुष्टों के संहार— का बहुत ही मार्मिक वर्णन किया गया है। रागनी के अंत में दादा लखमीचंद जी ने कलियुग की कड़वी सच्चाई को बयान करते हुए प्रभु से इस जीवन रूपी नैया को पार लगाने की प्रार्थना की है।
​अपनी हरियाणवी संस्कृति, बोली और इस अनमोल लोक-साहित्य पर हम सभी को गर्व होना चाहिए। ❤️
​👇 आपको दादा लखमीचंद जी की इस रागनी की कौन सी पंक्ति सबसे ज्यादा पसंद आई? कमेंट में 'जय श्री कृष्णा' जरूर लिखें!
​🔄 शेयर करें ताकि हमारी ये सांस्कृतिक धरोहर ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुँचे।

🔥 "भगतसिंह आजादी की हाँ, भरै तै इस तरियां भरिये..." 🔥क्या आपने कभी सोचा है कि एक माँ अपने बेटे को मौत के मुँह में जाने औ...
15/08/2026

🔥 "भगतसिंह आजादी की हाँ, भरै तै इस तरियां भरिये..." 🔥
क्या आपने कभी सोचा है कि एक माँ अपने बेटे को मौत के मुँह में जाने और देश पर कुर्बान होने के लिए कैसे प्रेरित कर सकती है? हरियाणवी लोक साहित्य के सूर्य, पंडित मांगेराम जी द्वारा रचित यह ऐतिहासिक और वीर रस से भरी रागनी इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। 🇮🇳
इस ओजस्वी रचना में अमर शहीद भगत सिंह जी की माता विद्यावती कौर उन्हें केवल क्रांति की अनुमति ही नहीं देतीं, बल्कि भगवान परशुराम के शौर्य, महाभारत के धर्मयुद्ध और राजा हरिश्चंद्र के सत्य जैसे महान उदाहरण देकर अपना सर्वस्व न्योछावर करने की प्रेरणा देती हैं। एक माँ का ऐसा जज़्बा ही असली वीरों को जन्म देता है! 🙏
📜 तस्वीर में दी गई इस पूरी रागनी को जरूर पढ़ें और अपने अंदर की देशभक्ति को महसूस करें।
अगर आपको भी इस रागनी की पंक्तियों ने छुआ है, तो इसे अपने दोस्तों और परिवार के साथ शेयर (Share) जरूर करें।
👇 कमेंट में लिखें- 'जय हिन्द' 🇮🇳

भावभीनी श्रद्धांजलि 🙏💐​हरियाणा की माटी की महक और लोक संस्कृति को अपनी बुलंद आवाज से जन-जन तक पहुँचाने वाले, मशहूर हरियाण...
15/08/2026

भावभीनी श्रद्धांजलि 🙏💐
​हरियाणा की माटी की महक और लोक संस्कृति को अपनी बुलंद आवाज से जन-जन तक पहुँचाने वाले, मशहूर हरियाणवी रागनी कलाकार स्वर्गीय श्री सुनील दुजानिया जी की आज पुण्यतिथि है।
​आज ही के दिन वर्ष 2006 में एक दुखद कार दुर्घटना में हमने इस महान कलाकार को खो दिया था। उनका जाना हरियाणवी संगीत और कला जगत के लिए एक ऐसी अपूरणीय क्षति थी, जिसे शायद ही कभी भरा जा सके।
​भले ही वे आज शारीरिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन अपनी बेहतरीन रागनियों और ठेठ हरियाणवी अंदाज के जरिए वे हमेशा हमारे दिलों में अमर रहेंगे। उनकी दमदार आवाज आज भी हरियाणा के हर गांव-चौपाल में गूंजती है और संगीत प्रेमियों के दिलों पर राज करती है। 🎵✨
​सुनील दुजानिया जी को उनकी पुण्यतिथि पर कोटि-कोटि नमन और विनम्र श्रद्धांजलि। 🌺🙏
प्रभु उनकी पुण्य आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान दें। ॐ शांति!

🔥 ऐतिहासिक हरियाणवी रागिनी: जब भगत सिंह ने असेंबली में बम फेंका! 🇮🇳राम-राम जी सारे भाइयां ने! 🙏आज आपके लिए लेकर आए हैं ह...
14/08/2026

🔥 ऐतिहासिक हरियाणवी रागिनी: जब भगत सिंह ने असेंबली में बम फेंका! 🇮🇳
राम-राम जी सारे भाइयां ने! 🙏
आज आपके लिए लेकर आए हैं हरियाणवी लोक साहित्य के शिरोमणि, दादा पंडित मांगेराम जी द्वारा रचित एक बेहद ओजस्वी और रोंगटे खड़े कर देने वाली ऐतिहासिक रागिनी - "रै! ना मान्या धड़का, राजभवन म्ह बड़गे"।
इस रचना में 8 अप्रैल 1929 की उस महान घटना का सजीव और रोमांचक चित्रण है, जब अमर शहीद भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने अंग्रेजी हुकूमत की जड़ें हिलाने के लिए दिल्ली की सेंट्रल असेंबली में बम फेंका था। 💣💥
वीर रस से भरी इन पंक्तियों को पढ़ें और हमारे महान क्रांतिकारियों के अदम्य साहस को महसूस करें। दादा मांगेराम जी की कलम ने इस ऐतिहासिक दृश्य को जैसे हमारी आँखों के सामने ला खड़ा किया है।
👇 रागिनी की शुरुआत:
रै! ना मान्या धड़का, राजभवन म्ह बड़गे ।।
पहरकै पतलून कोट, बढिया सी टाई लटकाई...
✅ कमेंट करके जरूर बताएं कि आपको दादा मांगेराम जी की यह ऐतिहासिक रचना कैसी लगी।
✅ अपनी हरियाणवी संस्कृति, लोक साहित्य और वीर शहीदों के इतिहास को आगे बढ़ाने के लिए इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें! जय हिंद! 🇮🇳

😢 सेठ ताराचंद की बेबसी और दुख की इंतहा... 😢​सूर्य कवि दादा लख्मीचंद जी की कलम से निकली यह रागनी सीधे दिल पर चोट करती है।...
13/08/2026

😢 सेठ ताराचंद की बेबसी और दुख की इंतहा... 😢
​सूर्य कवि दादा लख्मीचंद जी की कलम से निकली यह रागनी सीधे दिल पर चोट करती है। जरा सोचिए! जब एक मजबूर पिता अपने जिगर के टुकड़े (बेटे) को बेचकर 200 रुपये की कमाई करता है, और हरनंदी नदी के किनारे नहाते वक्त वो पैसे और सामान भी चोरी हो जाएं, तो उस पिता के दिल पर क्या बीतेगी?
​यह मार्मिक रागनी उसी अकल्पनीय पीड़ा और बेबसी को दर्शाती है:
​🎵 रागनी के बोल: 🎵
​टेक: दो सौ रूपए खाण का भोजन, धरया घाट पै आकै,
हरनन्दी तनै लूट लिया मैं, के सुख पाया न्हाकै ।।
​1. लड़का बेच्या करी थी कमाई, देखण लाग्या रकम ना पाई,
साच बता हरनन्दी माई, लेग्या कोण उठाकै ।।
​2. लड़का गया उमर थी याणी, न्यूं आंख्या में आग्या पाणी,
जब मांगैगीं दाम सेठाणी, मै कित तै दूंगा ल्याकै ।।
​3. कोन्या जाता दिल समझाया, हे! ईश्वर तेरी अद्भूत माया,
जिसनै पेट पाड़कै जाया, वा मरज्यागी डकराकै ।।
​4. श्री लख्मीचन्द का गाम सै जांटी, दूख में जा सै छाती पाटी,
ताराचन्द नै आत्मा डाटी, बैठ गया गम खाकै।।
​✨ भाव: इस रागनी में करुण रस की प्रधानता है। ताराचंद जब यह सोचता है कि जिस माँ ने पेट चीरकर उस बच्चे को जन्म दिया, वह यह दुख सुनकर रो-रोकर अपनी जान दे देगी, तो यह विचार किसी की भी आँखें नम करने के लिए काफी है।
​हरियाणवी लोक संस्कृति और दादा लख्मीचंद जी की इस अनमोल रचना को सहेजने के लिए इसे अपने दोस्तों और परिवार के साथ जरूर शेयर करें। 🙏

जय श्री कृष्णा! 🙏✨​कृष्ण-सुदामा की मित्रता और सुदामा जी की निश्छल भक्ति को दर्शाती यह दिल छू लेने वाली रागनी!​जब सुदामा ...
12/08/2026

जय श्री कृष्णा! 🙏✨
​कृष्ण-सुदामा की मित्रता और सुदामा जी की निश्छल भक्ति को दर्शाती यह दिल छू लेने वाली रागनी!
​जब सुदामा जी की पत्नी सुशीला उन्हें बताती हैं कि उनका यह भव्य महल स्वयं श्रीकृष्ण और भगवान विश्वकर्मा जी ने बनाया है, तो सुदामा जी का हृदय धन-दौलत देखकर खुश होने के बजाय वैराग्य और प्रेम से भर जाता है। वे कहते हैं— "मुझे इस धन-माया का क्या करना, जब स्वयं भगवान मेरे द्वार पर आ गए!" 🥺
​महान लोककवि दादा मांगेराम जी की कलम से निकली यह अद्भुत रचना हमें सिखाती है कि सच्ची भक्ति में कोई लालच नहीं होता।
​"धनमाया नै के फूकूंगा जब खुद आगे भगवान मेरै" ❤️
​अगर आपको भी दादा मांगेराम जी की यह रागनी और सुदामा जी का भाव पसंद आया हो, तो पोस्ट को लाइक और शेयर जरूर करें।
​कमेंट्स में 'जय श्री कृष्णा' लिखना न भूलें! 👇

🔱 हर हर महादेव! 🔱 राम-राम जी सारे भाइयां ने! 🙏​आज आपके लिए लेकर आए हैं हरियाणवी लोक साहित्य की एक बेहद खूबसूरत और भक्तिम...
11/08/2026

🔱 हर हर महादेव! 🔱 राम-राम जी सारे भाइयां ने! 🙏
​आज आपके लिए लेकर आए हैं हरियाणवी लोक साहित्य की एक बेहद खूबसूरत और भक्तिमय रागनी।
​📖 रागनी का प्रसंग:
यह उस समय का मनमोहक वर्णन है जब नाई और ब्राह्मण तीनों लोकों में माता पार्वती (गिरजा) के लिए वर ढूंढ कर हार जाते हैं और उन्हें कोई योग्य वर नहीं मिलता। तब माता पार्वती स्वयं गुरु (ब्राह्मण) के पैर पकड़कर उन्हें अपने होने वाले स्वामी, तीनों लोकों के नाथ 'भगवान शिव' का पूरा पता और उनकी महिमा बताती हैं।
​दादा लखमीचंद और पंडित मांगेराम जी की कलम से निकली यह रचना शिव-पार्वती के प्रेम, माता पार्वती के दृढ़ निश्चय और कैलाश पर्वत के अलौकिक नजारे को बड़ी ही सुंदरता से दर्शाती है।
​✨ "पैर पकड़ कै बैठ गई गुरु ख्याल करो मुझ दासी का,
भय भंजन श्री अलख निरंजन खटका सै अविनाशी का ॥" ✨
​रागनी के बोल इमेज में पढ़कर आनंद लें! अगर आपको भी हमारी हरियाणवी संस्कृति और लोकगीतों पर गर्व है, तो पोस्ट को अपने दोस्तों और परिवार के साथ शेयर (Share) जरूर करें।
​👇 कमेंट में 'ॐ नमः शिवाय' लिखना ना भूलें! 🙏

✨ समझ ना सकते जगत के मन पै, अज्ञान रूपी मल होग्या... ✨​सूर्य कवि दादा लखमीचंद जी की कलम से निकली यह रागनी केवल एक गीत नह...
11/08/2026

✨ समझ ना सकते जगत के मन पै, अज्ञान रूपी मल होग्या... ✨
​सूर्य कवि दादा लखमीचंद जी की कलम से निकली यह रागनी केवल एक गीत नहीं, बल्कि आज के समाज की सबसे कड़वी और सच्ची हकीकत है! 🙏
​'किस्सा नल-दमयंती' की शुरुआत में महर्षि बृहदश्व युधिष्ठिर को यह कथा सुनाते हैं। इन पंक्तियों में दादा लखमीचंद जी ने बहुत ही गहराई से बताया है कि महाभारत के बाद समाज में कैसे नैतिक पतन हुआ:
🔹 सगे भाई एक-दूसरे से दूर हो गए हैं।
🔹 माता-पिता और गुरुओं का सम्मान कम हो गया है।
🔹 वेदों, पुराणों और धर्म के सच्चे ज्ञान की जगह अज्ञानता ने ले ली है।
🔹 इंसान के पोर-पोर में छल-कपट भर गया है।
​हरियाणवी लोक साहित्य और रागनी में इतना गहरा दार्शनिक और आध्यात्मिक ज्ञान शायद ही कहीं और मिले। जो बात दशकों पहले दादा लखमीचंद जी ने लिख दी थी, वो आज के समय में बिल्कुल 100% सच साबित हो रही है।
​📜 पूरी रागनी और उसका अर्थ इमेज में पढ़ें।
​अगर आप भी दादा लखमीचंद जी की इन बातों से सहमत हैं, तो इस पोस्ट को अपने दोस्तों और परिवार के साथ शेयर (Share) जरूर करें। कमेंट में बताएं कि आपको इस रागनी की कौन सी लाइन सबसे ज्यादा सच्ची लगी! 👇

🙏 राम-राम जी सारे भाइयां ने! 🙏​हरियाणा के सूर्य कवि, दादा लखमीचंद जी की यह अद्भुत और रूह को छू लेने वाली रागनी। 🌺यह रचना...
10/08/2026

🙏 राम-राम जी सारे भाइयां ने! 🙏
​हरियाणा के सूर्य कवि, दादा लखमीचंद जी की यह अद्भुत और रूह को छू लेने वाली रागनी। 🌺
यह रचना हमें याद दिलाती है कि जो भी सच्चे मन से भगवान की शरण में जाता है, प्रभु उसका उद्धार जरूर करते हैं। चाहे चीर हरण के समय द्रौपदी की पुकार हो, अंत समय में गणिका का ध्यान हो, राजा मोरध्वज की कठिन परीक्षा हो, या बालक ध्रुव की तपस्या—ईश्वर ने हमेशा अपने भक्तों का साथ दिया है। ✨
​पढ़िए दादा लखमी की ये अमर वाणी: 👇
​हे त्रिलाकी भगवान, पार तनैं तारे नर नारी
जो तेरा बणकै दास रहा ।।टेक।
​कैरो छिक लिये चीर तार कै, बैठगे आखिर कार हार कै,
मारकै दुर्योधन का मान, सभा मैं जब द्रोपद ललकारी,
चीर मैं तूं छुपकै खास रहा ।।1।
​जन्म सब दुख मैं काट लिया, भेद तेरा सारा पाट लिया,
डाट लिया सूए कै मैं ध्यान, पार तनैं गनका भी तारी,
सोच मैं तराए बास रहा ।।2।
​तेरा किस-किस नै दर्शन पा लिया, बण सन्यासी शेर सजा लिया,
बचाली या मोरध्वज की ज्यान, भगत नै ना हिम्मत हारी,
इतनै तेरा विश्वास रहा ।।3।
​लखमीचन्द कर ज्ञान शुरू, ज्ञान तै होगे पार ध्रुव,
गुरू नारद तै पा लिया ज्ञान, लात जिसकै मौसी नै मारी,
भगत के तू हरदम वास रहा ।।4।
​कमेंट में 'जय श्री कृष्णा' या 'जय दादा लखमी' जरूर लिखें! 🙏
अगर आपको भी हमारी संस्कृति और दादा लखमीचंद जी की रागनियों से प्यार है, तो इस पोस्ट को अपने दोस्तों और परिवार के साथ शेयर (Share) जरूर करें। 🚩

🎭 हरियाणवी संस्कृति की अनमोल धरोहर: सांग 'लीलो-चमन' की एक बेहद मार्मिक रागनी! 🌾​राम-राम जी सारयां नै! 🙏​आज आपके लिए लेकर...
09/08/2026

🎭 हरियाणवी संस्कृति की अनमोल धरोहर: सांग 'लीलो-चमन' की एक बेहद मार्मिक रागनी! 🌾
​राम-राम जी सारयां नै! 🙏
​आज आपके लिए लेकर आए हैं हरियाणा के महान सांगी दादा धनपत सिंह (निंदाना) जी की कलम से निकली एक बेहद भावुक कर देने वाली रागनी।
​यह प्रसंग उस समय का है जब चमन पर चोरी का झूठा इल्जाम लग जाता है और उसे हवालात जाना पड़ता है। जब वह छूटकर कॉलेज आता है और लीलो को अपने पास बुलाता है, तो समाज की बदनामी के डर और अपने सच्चे प्रेम के बीच फंसी लीलो अपने दिल का दर्द कुछ इस तरह बयां करती है:
​"आज तैं पाचछै चमन मनैं मत काल करिये,
बोलण और बतलावण की कती टाल करिये।।"
​ऊपर से कठोर दिखने वाली लीलो अंदर से चमन के लिए तड़प रही है। वह कहती है कि बदनामी के डर से मैं आना तो नहीं चाहती थी, लेकिन मेरा प्यार मुझे खींच लाया। यह रागनी प्रेम और सामाजिक मर्यादा के बीच के उस दर्द को दिखाती है, जिसे सिर्फ दादा धनपत सिंह जी ही इतने बेहतरीन और ठेठ हरियाणवी शब्दों में पिरो सकते थे। 💯
​👇 आपको इस रागनी की कौन सी लाइन सबसे ज्यादा दिल को छू लेने वाली लगी? कमेंट्स में जरूर बताएं!
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