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आज 27/04/026 को लम्बी बीमारी के बाद  हमारा बाला हमे छोड़कर उस रब से जा मिला वह हमारे साथ 5 साल एक फैमिली मेम्बर  की तरह ...
27/04/2026

आज 27/04/026 को लम्बी बीमारी के बाद हमारा बाला हमे छोड़कर उस रब से जा मिला वह हमारे साथ 5 साल एक फैमिली मेम्बर की तरह रहा 5 साल पहले हमने उसे सड़क से उठाया था तब से वह हमारे बच्चो की तरह ही रहता था कीसी भी तरह की गन्दगी नही कर्ता था पोटी वाशरूम ही कर्ता और जो हम खाते वही खाता था बाला तुम बहुत याद आओगे

22/04/2026

Some are happy with lentils,
Some are happy with wealth,
The best of all is the one who is happy in every situation.

22/04/2026

कोई दाल मै खुश है
कोई माल मै खुश है
सबसे बेहतर वह है जो हर हाल मै खुश है

Big thanks to Гульжамал Казыбаеваfor all your support! Congrats for being top fans on a streak 🔥!
22/04/2026

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17/04/2026

अलम बेग का सही नाम अलीम बेग था. वो उत्तर भारत के एक सुन्नी मुसलमान थे. बंगाल रेजीमेंट के लिए यूपी के शहर कानपुर में भर्तियां की गई थीं. सो, शायद अलीम बेग भी इसी इलाक़े से ताल्लुक़ रखते थे.

यूं तो बंगाल रेजीमेंट में हिंदुओं की तादाद ज़्यादा थी, मगर इसमें बीस फ़ीसद मुसलमान सैनिक भी थे.

बेग के हवाले सैनिकों की एक पूरी टुकड़ी थी. उनके ज़िम्मे कैम्प की निगरानी का सख़्त काम था. इसके अलावा वो चिट्ठियां ले जाने का काम भी करते थे और बंगाल रेजीमेंट के अफ़सरों के चपरासी का रोल भी निभाते थे.

1857 के ग़दर के बाद वो अंग्रेज़ों की पकड़ से भाग निकले. क़रीब एक साल बाद अलीम बेग को पकड़ा गया था. फिर उन्हें तोप से उड़ा दिया गया.

जिस कैप्टन कोस्टेलो के बारे में ये माना जा रहा था कि वो अलीम बेग को तोप से उड़ाए जाने के दौरान मौजूद था, उसका पूरा नाम था रॉबर्ट जॉर्ज कोस्टेलो.

कोस्टेलो ही अलीम बेग़ की खोपड़ी को ब्रिटेन लेकर आया. कोस्टेलो, आयरलैंड में पैदा हुआ था. उसे 1857 में भारत भेजा गया था.

दस महीने बाद वो रिटायर होकर भारत से पानी के एक जहाज़ पर सवार होकर अक्टूबर, 1858 में ब्रिटेन के लिए रवाना हुआ था. क़रीब एक महीने बाद वो ब्रिटेन के साउथैम्पटन बंदरगाह पहुंचा था.

गॉर्डन 1857 के ग़दर के दौरान और उसके बाद स्यालकोट में रहते थे. वो डॉक्टर ग्राहम और हंटर दंपति, दोनों को निजी तौर पर जानते थे.

दोनों ही अलम बेग के हाथों मारे गए थे. जब अलम बेग को तोप से उड़ाया गया, तो उस वक़्त एंड्रूय गॉर्डन भी मौजूद थे.

इस खोपड़ी की आँख के सॉकेट में हाथ से लिखा एक नोट लगा था. इस नोट में उस खोपड़ी के बारे में लिखा था कि:

बंगाल नेटिव की 46वीं रेजिमेंट के हवलदार अलम बेग की खोपड़ी, जिसे तोप के मुंह से बांध कर उड़ा दिया गया था. जैसा अलम बेग की रेजीमेंट के बाक़ी साथियों के साथ किया गया था. वो 1857 की गुंडागर्दी वाली बग़ावत का प्रमुख नेता था. अलम बेग ने उस किले की तरफ़ जाने वाली सड़क पर क़ब्ज़ा कर लिया था, जिसमें बग़ावत के दौरान ख़ुद को महफ़ूज़ रखने के लिए सारे यूरोपीय जा रहे थे. अलम बेग और उसके साथियों ने अचानक हमला करके डॉक्टर ग्राहम को उनकी बग्घी में उनकी बेटी के सामने ही गोली मार दी थी. उसका अगला शिकार एक मिशनरी रेवरेंड मिस्टर हंटर बने थे. रेवरेंड हंटर भी अपनी पत्नी के साथ उसी तरफ़ जा रहे थे. अलम बेग ने मिस्टर हंटर और उनकी पत्नी को मार डाला था. इसके बाद उसने उनकी बेटियों पर पहले बेइंतिहा ज़ुल्म ढाए और फिर उन्हें भी सड़क के किनारे क़त्ल कर डाला था.

इसके अलावा ब्रिटेन से छपने वाले एक अख़बार 'द स्फ़ेयर' के 1911 के एडिशन मे भी लंदन के व्हाइटहॉल में लगी एक नुमाइश के हवाले से इस खोपड़ी का ज़िक्र मिला. इसमें लिखा था:

हमें बताया गया है कि रॉयल यूनाइटेड सर्विस इंस्टीट्यूशन के व्हाइटहाल स्थित म्यूज़ियम में हिंदुस्तान के हिंसक ग़दर की याद दिलाने वाला एक स्मृति चिह्न रखा गया है. ये एक सिपाही की खोपड़ी है, जो 49वीं बंगाल रेजीमेंट से ताल्लुक़ रखता था. जिसे 1858 में 18 दूसरे लोगों के साथ तोप से उड़ा दिया गया था. जैसा कि हम देख रहे हैं कि अब इस खोपड़ी को सिगार बॉक्स बना दिया गया है.

https://bbc.in/2EqeCkk

16/04/2026

ostrich at the zoo

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