14/07/2020
मैं लिखना चाहता था कोई साफ सुंदर कोमल कविता जिसका मूल रूप प्रेम हो.किसी से प्रेम होना और किसी से प्रेम करना ये दो विभिन्न है उसी तरह जैसे स्त्री और पुरुष की विशेषताएं.किसी वस्तु या इंसान से प्रेम करना मुश्किल होता है पर असंभव नहीं, हाँ जब हम किसी भी चीज को समय देते है तो ये आसान हो जाता है, दूसरी तरफ किसी से प्रेम होने में सदियाँ बीत जाती है,हमे नहीं पता चलता कि कब और किस वक़्त हमें प्रेम हो जाए.प्रेम एक समुन्दर है जिसकी लम्बाई तो हम नाप सकते है लेकिन गहराई नहीं.
प्रेम होने का एहसास हमें तब होने लगता है जब वह हमारे दैनिक जीवन में आहात करने लगती है.मुझे याद है जब तुमने पहली बार मेरी आँखों में देखकर दूर से ही बातें कर ली थी मुझे उसी छड़ तुमसे प्रेम हो गया था.
मैं नहीं लिखता प्रेम लेकिन मेरी कलम को प्रेम पत्र लिखना पसंद है,शायद यही वजह है कि दशकों से कवि प्रेम पर लिखते चले आ रहे है.
प्रेम पत्र लिखें जाएगे सदियों तक जब तक लोगो में कवि ज़िंदा है.
प्रेम पत्र के सहारे मैं वो सारे पल दोबारा याद कर लेता हूँ फिर मिलुंगा तुमसे किसी नये प्रेम पत्र में किसी दूसरे किस्से के साथ.