Unsealed box

Unsealed box Love Poetry and storytelling

मैं लिखना चाहता था कोई साफ सुंदर कोमल कविता जिसका मूल रूप प्रेम हो.किसी से प्रेम होना और किसी से प्रेम करना ये दो विभिन्...
14/07/2020

मैं लिखना चाहता था कोई साफ सुंदर कोमल कविता जिसका मूल रूप प्रेम हो.किसी से प्रेम होना और किसी से प्रेम करना ये दो विभिन्न है उसी तरह जैसे स्त्री और पुरुष की विशेषताएं.किसी वस्तु या इंसान से प्रेम करना मुश्किल होता है पर असंभव नहीं, हाँ जब हम किसी भी चीज को समय देते है तो ये आसान हो जाता है, दूसरी तरफ किसी से प्रेम होने में सदियाँ बीत जाती है,हमे नहीं पता चलता कि कब और किस वक़्त हमें प्रेम हो जाए.प्रेम एक समुन्दर है जिसकी लम्बाई तो हम नाप सकते है लेकिन गहराई नहीं.
प्रेम होने का एहसास हमें तब होने लगता है जब वह हमारे दैनिक जीवन में आहात करने लगती है.मुझे याद है जब तुमने पहली बार मेरी आँखों में देखकर दूर से ही बातें कर ली थी मुझे उसी छड़ तुमसे प्रेम हो गया था.
मैं नहीं लिखता प्रेम लेकिन मेरी कलम को प्रेम पत्र लिखना पसंद है,शायद यही वजह है कि दशकों से कवि प्रेम पर लिखते चले आ रहे है.
प्रेम पत्र लिखें जाएगे सदियों तक जब तक लोगो में कवि ज़िंदा है.
प्रेम पत्र के सहारे मैं वो सारे पल दोबारा याद कर लेता हूँ फिर मिलुंगा तुमसे किसी नये प्रेम पत्र में किसी दूसरे किस्से के साथ.

20/06/2020

aankho me chadi thi yaadein uski sapna toot gaya
kya gulab ka fool tha sundar jisne chua toot gaya
tum kehte ho tumhe usse mohabbat hai
suno,jisne bhi use lag kar chaha toot gaya.
ham har bar uski sadaqat me doobte chale gaye
kya ped tha baras se andhi aane pe toot gaya
shauk e nawab ham bhi rahe ek zamane me kabhi
lekin jisne bhi der tak dekha use vo toot gaya
paani ka bahao kaun palat saka hai aaj tak
jis kisi ne himakat karna chaha toota gaya.
Apne aksar jeb me chura rakh muskura diya karte hai
jisne bhi dil se rishta nibhaya toot gaya.
Zakham bahut the mere dil pe lagaye usne
zeher khane aage badha hausla toot gaya.
ham bataye tumhe jeene ka sabab yaha
hamse milna agar toh dil se warna rishta toot gaya

13/06/2020

Need Home bakers and Wholesale bakery to deliver cakes and other bakery items which will be listed on our website and application.
Benefits: Increase your sales+ More profit

13/06/2020

Delivery person needed for the delivery of bakery items near north campus.
Wages will be given on per order + a minimum amount will be given.
Must have two wheeler(Petrol will be provided)
As covid-19 situation will improve the salary will be increased

13/06/2020

Delivery of bakery items on daily basis.
Wages will be given on per order.
Must have two wheeler(Petrol will be provided on daily basis)

09/04/2020

Awari


*मेरे गांव की चिड़िआ*मेरे गांव की चिड़िआ अपने पर फैला कर लोगो से मिलती है.एक चिडियो का झुण्ड लाखो मील सफर करके जब थक जाता ...
01/04/2020

*मेरे गांव की चिड़िआ*

मेरे गांव की चिड़िआ अपने पर फैला कर लोगो से मिलती है.
एक चिडियो का झुण्ड लाखो मील सफर करके जब थक जाता था तो वो मेरे गांव में अपना आशियाना ढूंढ़ता था .वैसे तो गांव में सबसे दोस्ती थी उनकी पर मुझसे कुछ ज्यादा.हमारे गांव में लोग उसके लिए कटोरी भर पानी रख देते थे ताकि वो किसी बम्बा या टूबवेल को ढूंढने में अपना वक़्त जाया ना करे और थोड़ा वक़्त हमारे साथ गुज़ार सके.यहाँ लोग पिंजरा की जगह अपने हाथ फैलाते है,और अपने हाथो से उन्हें दाना खिलाते है.
छोटे से मैंने वो झुण्ड अपने गांव में आता देखा है और कई साल तो इंतज़ार भी किया है.वर्षा ऋतू की उपरांत एक शीत लहर आती है बाबा कहते थे वो लहर यही चिड़िया लाती है ,और किसान खिल-खिला उठता था इन्हे देखकर क्यूकी तब तक फसल की जड़ो तक पानी पहुंच चुका होता था और शीत ऋतू आने वाली होती थी.
आज कई सालो के बाद मुझे कुछ चिडियो का झुण्ड दिखा जब मैंने उनसे पूछा तो उन्होंने दूर से ही जवाब दिया की वो यहा नहीं रुकेगी.उन्हें सफर करना है अपना आशिया ढूंढना है,जहाँ उन्हें कोई ढूंढ़ ना सके.
चिड़िया बताती है शहर में लोग ऐसे नहीं है वहा के लोग पिंजरा रखते है,दाना में उनके जाल होता है चिड़ीमार उन्हें कैद कर लेता है और फिर सालो साल उन्हें रिहा नहीं करता.वो कैद करना चाहते है उन्हें जैसे वो खुद है अपने शहर में.
मेरे गाँव की चिड़िया अब वापस नहीं आती,लगता है वो गांव और शहर में फर्क भूल गई है,और अब तो गांव के बच्चे भी बड़े होकर शहर में रहने लग गए है.

@ Kanpur, Uttar Pradesh

कंधे पे पिट्ठू बैग हाथ में ट्राली जिसमे कुछ मिठाईया जो माँ ने बहुत प्यार से तैयार की थी,एक आँख में नमी दूसरे में चमक थी....
27/03/2020

कंधे पे पिट्ठू बैग हाथ में ट्राली जिसमे कुछ मिठाईया जो माँ ने बहुत प्यार से तैयार की थी,एक आँख में नमी दूसरे में चमक थी. आज फिर घर से निकलते वक़्त माँ पापा के पैर छुए और शहर के उस लंबे अनसुलझे रास्ते निकल पड़ा.पापा ने स्टेशन तक साथ चलने की ज़िद की और ट्राली बैग को अपने कंधे पर रखकर सीढिया उतरने लगे इधर माँ की तबियत थोड़ी ढीली थी पर चेहरे पर उन्होंने जाहिर ना होने दिया,माँ बाप भी कलाकार जैसे होते है जो परदे पर तो खुश रहता है और पर्दा गिरते ही किसी को उनकी दुनिया का पता नहीं होता.उनसे गले मिलते वक़्त गे कभी ख्याल ना आया की छोड़ना है ,शहर में बहुत लोग है मगर जब इनसे गले मिलता हूँ तो अपना पूरा बचपना आँखों के सामने आ जाता है,बस ना छूट जाये पीछे से पापा ने आवाज लगाई और माँ ने माथे पर चूम कर ऊपर वाली जेब में कुछ रुपए रख दिए और जाने को इशारा किया.
पापा के साथ बाइक पर बैठ कर कभी भी गिरने का डर नहीं लगा हाँ जब छोटा था तो वो खुद अपने हाथो से उठाकर आगे बिठालते थे तब हॉर्न बजाने में बड़ा मज़ा आता था पर अब पीछे बैठकर वो हर बार याद आता है.बस का इंतज़ार करते करते उनसे कुछ भी बातें ना हो पायी.पापा से कभी इतनी बात नहीं हो पाती हाँ मै माँ के ज्यादा करीब हूँ वो शहर में कहते है ना मम्मा बॉय.बस रूकती हुई दिखी और पापा ने सामान रखते वक़्त पढ़ाई करते रहना सिर्फ यही बोलकर बिठाल दिया.
शहर आया था कुछ साल पहले ताकि बड़े शहर के बड़े कॉलेज से डिग्री पा सकूँ और कहीं अच्छी जॉब मिल पाए .दिल्ली की ओर तेजी से जाती बस की रफ़्तार मेरी धड़कनो की रफ़्तार से कम थी.ये रफ़्तार ही है जो आपके जीवन में कई चीज़ें छुड़वाती है.दिल्ली ने शायद मुझे अपना लिया है पर मै दिल्ली को नहीं अपना पा रहा हूँ.

@ Kanpur, Uttar Pradesh

एक कहानी शुरू होती है,देश बढ़ रहा था,बड़ी-बड़ी इमारते और बड़ी हो रही थी,गाँव शहर में बदल रहे थे,कुआँ टंकी में बदल रहे थे,स्क...
16/03/2020

एक कहानी शुरू होती है,देश बढ़ रहा था,बड़ी-बड़ी इमारते और बड़ी हो रही थी,गाँव शहर में बदल रहे थे,कुआँ टंकी में बदल रहे थे,स्कूटर मोटरसाइकिल में और दूसरी तरफ मेरा दिल वो और भी कमज़ोर हो रहा था.
दसवीं में था जब कुछ दोस्त जो दोस्त थे भी या नहीं पता नहीं,अध्यापक वो अध्यापक थे भी या नहीं पता नहीं,दिल में उमंग, साँसों में दम दिमाग़ चित और लड़ के कॉमर्स वाले गोले में यूँ पेन से वो अपनी आजादी का कलाम लिख रहा था.
सब पूछने लगे बड़े होके क्या बनोगे,कितना पैकेज चाहिए,अच्छे बच्चे ऐसा नहीं करते,समझदार बनो,कब तक बच्चे बने रहोगे और ये वहा से पकड़ लिया गला बचपन का और दिल के किसी छोटे से कोने में जहाँ रौशनी भी कदम ना रख पाए बंद कर दिया.ये लीजिये हो गया अब मै बड़ा.
डॉक्टर,इंजीनियर,साइंटिस्ट,सूट पहन के सरकारी जॉब करके अपने सपने पूरे करो और फिर आज़ादी.
अच्छा तो इसे सक्सेस कहते है लोग और मै यही सोचता था कि सक्सेस का मतलब घर आकर दिवाली में वो मिठाई की खुशबू,होली का वो पिचकारी चलाना होता है.
ख़ामोशी के पीछे का खौफ इतना बढ़ गया था कि खुद से भी सवाल नहीं पूछता था क्या पता दिल ने सच बोल दिया तोः ये दिमाग़ कि नशे ना फट जाए.दिल कोशिश तो बहुत करता है उस कमरे तक पहुंचने कि लेकिन फिर आप समझदार कैसे कहलाओगे.चलो बच्चे कि साइकिल से उतरो,पार्क में खेलने कि उम्र नहीं है,बर्फ मत खाओ ,लंगड़ी मत खेलो क्या पता रौशनी अंदर पहुंच जाए .
लेकिन जब आज दिल कि धड़कन ने दिमाग़ कि नशो से बगावत की और ना धड़कने की धमकी दी तब ये साला दिमाग़ ने सोचा की अब उस कमरे तक खून नहीं पंहुचा तो ये तो मर जाएगा.फिर आया वो पल जब दिमाग़ ने दिल को अपना दोस्त बनाया और हाथ मिलाने ही जा रहा था की पीछे से अपनों ने ही पूछ लिया कि क्या करना है लाइफ में?
क्या हुआ? वो दो पल का इंतजार कर रहे थे क्या कि कब वो कमरा खुले और बचपन को आज़ाद करा पाओ, तो सुनो अपने कान बंद करो दिमाग़ से दोस्ती करो और बस अब अपने बचपन को आज़ाद कराना है और उसे चाट-पापड़ी ,कम्पट,बर्फ के गोले,बुढ़िया के बाल सब खिलाना है और वो बचपन बहुत दिन से बंद था ना तो उसे घुमाने ले जाना है ऊँगली पकड़ कर जैसे वो तुम्हे ले जाता था जब वो रिहा था .
तो उठो और जाओ अपने बचपन के साथ एक सैर कर के आओ ..
-तरुण कुशवाहा
kapoor._

tum aaye ho yaha kiske liyedil toota hai tumhra kiske lieRaaton me jagte ho arse se tmsukhanwar banna hai kiske lie.    ...
04/03/2020

tum aaye ho yaha kiske liye
dil toota hai tumhra kiske lie
Raaton me jagte ho arse se tm
sukhanwar banna hai kiske lie.

muntashir se mulkat ni hoti rat to hoti h magar bat ni hotiVo bina kuch kahe chal diye k***h kounhe batao, koi b jung bi...
02/03/2020

muntashir se mulkat ni hoti
rat to hoti h magar bat ni hoti
Vo bina kuch kahe chal diye k***h ko
unhe batao, koi b jung bina hathiyar ni hoti.
-Tarun

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