22/10/2024
अचानक से किसी इंकार का इकरार हो जाना
इसी को कहते दीवाने यही है प्यार हो जाना।
रही ना नींद आँखों में रहे दिल मुंतज़िर सा क्यों
यही होता है क्या इश्क़ -ए बुताँ का यार हो जाना।
नहीं दीदार होता वस्ल -ए- शब में सनम का तो
रहा वाज़िब हमारा अश्क सा लाचार हो जाना।
मुहब्बत दो दिलों को जोड़ने का ही ज़रिया है
ज़रूरी क्यूंँ किसी भी एक का गद्दार हो जाना।
हमेशा प्रीत ने सीखा है रिश्तों को निभाते चल
मिलें कोई यहाँ जो प्यार से दिलदार हो जाना।