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लोकतंत्र की सफलता जागरूक और जिम्मेदार नागरिकों पर निर्भर : प्रो. राका शर्माफायर न्यूज, थुरल, 22 अगस्त। महाराजा संसार चंद...
22/08/2026

लोकतंत्र की सफलता जागरूक और जिम्मेदार नागरिकों पर निर्भर : प्रो. राका शर्मा
फायर न्यूज, थुरल, 22 अगस्त। महाराजा संसार चंद स्मारक राजकीय महाविद्यालय थुरल में मतदाता जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को लोकतंत्र, निर्वाचन प्रक्रिया तथा मतदान के महत्व के प्रति जागरूक करना रहा। इस अवसर पर विद्यार्थियों के लिए प्रश्नोत्तरी एवं भाषण प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं, जिनमें करीब 70 विद्यार्थियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. राका शर्मा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि लोकतंत्र की सफलता जागरूक, जिम्मेदार और सक्रिय नागरिकों पर निर्भर करती है। मतदान केवल नागरिक का अधिकार ही नहीं, बल्कि महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक जिम्मेदारी भी है। युवा वर्ग देश का भविष्य है, इसलिए विद्यार्थियों में निर्वाचन प्रक्रिया और मतदाता अधिकारों की समझ विकसित करना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग देश में स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। विद्यार्थियों को मतदाता पंजीकरण, मतदान प्रक्रिया, निर्वाचन आयोग की भूमिका तथा मताधिकार के विवेकपूर्ण प्रयोग की जानकारी होनी चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से स्वयं जागरूक मतदाता बनने तथा अपने परिवार और समाज के अन्य लोगों को भी मतदान के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।
प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में रिया और अमिता ने संयुक्त रूप से प्रथम, मुस्कान और तमन्ना ने द्वितीय तथा नितिन और संदीप ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। प्रतियोगिता में भारतीय लोकतंत्र, संविधान, निर्वाचन आयोग, मतदाता अधिकार, चुनाव प्रक्रिया और नागरिक कर्तव्यों से संबंधित प्रश्न पूछे गए।
भाषण प्रतियोगिता में तनु ने प्रथम, रिया ने द्वितीय तथा मुस्कान और दीक्षा ने संयुक्त रूप से तृतीय स्थान प्राप्त किया। विद्यार्थियों ने लोकतंत्र में मतदान की भूमिका, युवा मतदाताओं की जिम्मेदारी, निष्पक्ष चुनाव और एक वोट की शक्ति जैसे विषयों पर अपने विचार रखे।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय सेवा योजना कार्यक्रम अधिकारी प्रो. पवन राणा, प्रो. कमल कुमार, प्रो. लेख राम नेगी, डॉ. अमित शर्मा, डॉ. विशाल, डॉ. संजीव शर्मा, डॉ. शिशुपाल, प्रो. अजय तथा प्रो. कुशल सहित महाविद्यालय के अन्य शिक्षक उपस्थित रहे।

धर्मशाला में हाईकोर्ट की बेंच स्थापित करने की मांग, शांता कुमार ने केंद्र से किया आग्रहफायर न्यूज, पालमपुर, 21 अगस्त। पू...
21/08/2026

धर्मशाला में हाईकोर्ट की बेंच स्थापित करने की मांग, शांता कुमार ने केंद्र से किया आग्रह
फायर न्यूज, पालमपुर, 21 अगस्त। पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री शांता कुमार ने जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट की एक बेंच लद्दाख में स्थापित करने की अनुमति देने के लिए भारत सरकार को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि समय पर न्याय न मिलना भी एक प्रकार का अन्याय है। लद्दाख जैसे दुर्गम क्षेत्र के लोगों के लिए हाईकोर्ट की बेंच स्थापित होने से न्याय प्राप्त करना आसान होगा।
शांता कुमार ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लद्दाख जैसे दूरदराज क्षेत्रों के लोगों को बेंच की स्थापना का लाभ मिलेगा। इसी संदर्भ में उन्होंने केंद्र सरकार का ध्यान हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों की ओर भी आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि हिमाचल भी एक पहाड़ी प्रदेश है और यहां के लोगों को भी कठिन भौगोलिक परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। इस वर्ष भारी बरसात के कारण प्रदेश में बड़ी संख्या में सड़कें, मार्ग और पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं।
उन्होंने कहा कि कांगड़ा और चंबा जैसे दूरदराज क्षेत्रों के लोगों के लिए शिमला स्थित हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट तक पहुंचना कठिन है। शिमला से कांगड़ा-चंबा का क्षेत्र लगभग 400 किलोमीटर दूर है और खराब सड़क परिस्थितियों में न्यायालय तक आना-जाना आम लोगों के लिए काफी कठिन हो जाता है।
शांता कुमार ने भारत सरकार से विशेष आग्रह किया कि जम्मू-कश्मीर की तर्ज पर हिमाचल प्रदेश में भी शिमला हाईकोर्ट की एक बेंच धर्मशाला में स्थापित की जाए। उन्होंने कहा कि इस संबंध में पहले भी कई बार मांग उठ चुकी है और उन्हें स्मरण है कि केंद्र सरकार ने इस प्रस्ताव पर विचार भी किया था।
उन्होंने कहा कि कांगड़ा-चंबा सहित प्रदेश के दूरदराज क्षेत्रों के लोगों के लिए शिमला हाईकोर्ट तक पहुंचकर न्याय प्राप्त करना कठिन है। उन्हें विश्वास है कि भारत सरकार इस मांग पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी।
शांता कुमार ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से भी आग्रह किया कि वे हिमाचल प्रदेश में हाईकोर्ट की धर्मशाला बेंच स्थापित करने की मांग को केंद्र सरकार के समक्ष प्रभावी ढंग से रखें, ताकि प्रदेश के दूरदराज क्षेत्रों के लोगों को उनके घर के निकट न्याय की सुविधा मिल सके।
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डॉ. दीपक पुरी 'मोस्ट  इनोवेटिव कार्डियोवैस्कुलर और थोरेसिक सर्जन ऑफ द डेकैड’ अवार्ड्स से सम्मानितफायर न्यूज नूरपुर : डॉ....
21/08/2026

डॉ. दीपक पुरी 'मोस्ट इनोवेटिव कार्डियोवैस्कुलर और थोरेसिक सर्जन ऑफ द डेकैड’ अवार्ड्स से सम्मानित

फायर न्यूज नूरपुर : डॉ. दीपक पुरी को बुधवार को नई दिल्ली में 'नेशनल लीडर्स समिट एंड अवार्ड्स 2026' के दौरान 'मोस्ट इनोवेटिव कार्डियोवैस्कुलर और थोरेसिक सर्जन ऑफ द डेकैड’ अवार्ड्स से सम्मानित किया गया है।

मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद माया नरोलिया और बॉलीवुड अभिनेत्री रकुल प्रीत सिंह ने डॉ. पुरी को यह पुरस्कार सौंपा। इस पुरस्कार समारोह में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण केंद्रीय राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल, गायक, अभिनेता व राजनीतिक नेता मनोज तिवारी और दिल्ली सरकार के कैबिनेट मंत्री आशीष सूद सहित कई प्रतिष्ठित मुख्य अतिथि मौजूद थे।

यह मान्यता कार्डियोवैस्कुलर और थोरेसिक सर्जरी में डॉ. पुरी के तीन दशकों के योगदान और विशेष रूप से जटिल कार्डियोवैस्कुलर और थोरेसिक बीमारियों के प्रबंधन के लिए एक एकीकृत, व्यापक और किफायती दृष्टिकोण को बढ़ावा देने हेतु 2011 में 'कार्डियोमर्शन' की शुरुआत के बाद से किए गए इनोवेटिव कार्यों के लिये दी गई है।

डॉ. पुरी वर्तमान में पारस हेल्थ पंचकूला में कार्डियोवैस्कुलर थोरेसिक सर्जरी के चेयरमैन के रूप में कार्यरत हैं और वह कार्डियोमर्शन के संस्थापक और ग्लोबल चेयरमैन भी हैं।

उनके लिए यह पुरस्कार केवल नई सर्जिकल तकनीकों की मान्यता का नहीं है, बल्कि एक व्यापक स्वास्थ्य दर्शन का प्रतिनिधित्व करता है—जिसमें रोकथाम, प्रारंभिक निदान, साक्ष्य-आधारित चिकित्सा उपचार, इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी, उन्नत कार्डिएक और थोरेसिक सर्जरी, रिहैबिलिटेशन), पोषण, जीवनशैली में बदलाव और दीर्घकालिक देखभाल को एक समन्वित श्रृंखला के तहत एक साथ लाना शामिल है।

पुरस्कार प्राप्त करने के बाद डॉ. पुरी ने कहा कि गंभीर कार्डियोवैस्कुलर और थोरेसिक बीमारी से पीड़ित कई मरीज न केवल अपनी बीमारी की गंभीरता के कारण कष्ट सहते हैं, बल्कि इसलिए भी सहते हैं क्योंकि उपचार अक्सर एक-दूसरे के समन्वय के बिना कई विभागों और संस्थानों के बीच बंटा होता है।

उन्होंने कहा कि जांच दोहराई जा सकती है, निर्णय मरीज-केंद्रित होने के बजाय प्रक्रिया-संचालित हो सकते हैं, और कभी-कभी महंगी तकनीकों का उपयोग किया जा सकता है जहां सरल और समान रूप से प्रभावी या बेहतर विकल्प उपलब्ध होते हैं।

डॉ. पुरी ने बताया कि वैश्विक स्वास्थ्य सेवा का भविष्य व्यापक, एकीकृत और लागत-प्रभावी प्रबंधन में निहित है। इनोवेशन को केवल उपचार को तकनीकी रूप से अधिक जटिल नहीं बनाना चाहिए; बल्कि इसे उपचार को अधिक सुरक्षित, अधिक सुलभ, अधिक किफायती और बेहतर दीर्घकालिक परिणाम देने में सक्षम बनाना चाहिए।

कर्मभूमि बनी पांगी, यहीं मिला जीवनसाथी: एसडीएम और बीडीओ ने रचाया विवाहदुर्गम घाटी में तैनात दो युवा अधिकारियों की शादी ब...
20/08/2026

कर्मभूमि बनी पांगी, यहीं मिला जीवनसाथी: एसडीएम और बीडीओ ने रचाया विवाह
दुर्गम घाटी में तैनात दो युवा अधिकारियों की शादी बनी चर्चा का विषय, 18 अगस्त को लिए सात फेरे
फायर न्यूज, पांगी, 20 अगस्त। हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले की दुर्गम पांगी घाटी अपनी कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और चुनौतियों के लिए जानी जाती है। लेकिन इस बार पांगी एक अलग वजह से चर्चा में है। यहां प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभाल रहे दो युवा अधिकारियों ने न केवल इस घाटी को अपनी कर्मभूमि बनाया, बल्कि यहीं अपने जीवन के नए अध्याय की शुरुआत भी की है।
पांगी के आवासीय आयुक्त एवं एसडीएम अमनदीप सिंह और पांगी विकास खंड की बीडीओ आस्था पवार 18 अगस्त 2026 को विवाह बंधन में बंध गए। दोनों ने एक-दूसरे को वरमाला पहनाकर जीवनभर साथ निभाने का संकल्प लिया। विवाह की खबर क्षेत्र में पहुंचते ही यह स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई।
बताया जा रहा है कि दोनों युवा अधिकारी एक-दूसरे को पसंद करते थे और इसके बाद उन्होंने जीवनसाथी बनने का निर्णय लिया। खास बात यह रही कि जिस पांगी घाटी में दोनों प्रशासनिक दायित्व निभा रहे हैं, उसी क्षेत्र में उन्होंने अपने वैवाहिक जीवन की शुरुआत की।
स्थानीय लोगों के लिए यह विवाह इसलिए भी खास है क्योंकि पांगी जैसे दुर्गम क्षेत्र में लंबे समय तक प्रशासनिक सेवाएं देना अपने आप में चुनौतीपूर्ण माना जाता है। कठिन सड़कें, प्रतिकूल मौसम और भौगोलिक परिस्थितियों के बीच अधिकारियों को प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं।
ऐसे में दोनों अधिकारियों का पांगी को अपनी कर्मभूमि के रूप में स्वीकार करना और इसी दौरान अपने जीवन का नया सफर शुरू करना क्षेत्रवासियों को विशेष रूप से प्रभावित कर रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि दोनों अधिकारियों ने पांगी की कठिनाइयों से पीछे हटने के बजाय अपने दायित्वों को प्राथमिकता दी और क्षेत्र के विकास कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई।
अमनदीप सिंह शिमला जिले के ठियोग क्षेत्र से संबंध रखते हैं और वर्तमान में पांगी में आवासीय आयुक्त एवं एसडीएम के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। वहीं आस्था पवार सोलन जिले से संबंध रखती हैं और पांगी विकास खंड में खंड विकास अधिकारी की जिम्मेदारी संभाल रही हैं।
दोनों अलग-अलग प्रशासनिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए पांगी की विकास प्रक्रिया का हिस्सा बने हुए हैं। अब उनका व्यक्तिगत जीवन भी इसी घाटी से जुड़ गया है।
अधिकारियों और स्थानीय लोगों ने दी बधाई
दोनों अधिकारियों के विवाह की जानकारी मिलने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों, कर्मचारियों, जनप्रतिनिधियों, स्थानीय लोगों, मित्रों और शुभचिंतकों ने उन्हें बधाई दी। लोगों ने नवविवाहित जोड़े के सुखद, सफल और खुशहाल वैवाहिक जीवन की कामना की।
क्षेत्रवासियों के लिए यह विवाह इसलिए भी यादगार बन गया है कि जिस पांगी ने दोनों अधिकारियों को उनकी कर्मभूमि के रूप में अपनाया, वही घाटी अब उनके जीवन के खूबसूरत अध्याय की गवाह भी बनी है।
कर्मभूमि से जीवनसाथी तक का यह सफर पांगी की कठिन पहाड़ियों के बीच बनी एक ऐसी कहानी है, जिसे स्थानीय लोग लंबे समय तक याद रखेंगे।

वन्दे मातरम् को विवाद का विषय बनाना दुर्भाग्यपूर्ण : शान्ता कुमारपालमपुर, 20 अगस्त। पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय...
20/08/2026

वन्दे मातरम् को विवाद का विषय बनाना दुर्भाग्यपूर्ण : शान्ता कुमार
पालमपुर, 20 अगस्त। पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री शान्ता कुमार ने कहा कि यह बड़े दुर्भाग्य और चिंता की बात है कि स्वतंत्रता के 80 वर्ष बाद भारत में ‘वन्दे मातरम्’ विवाद का विषय बन गया है। जिस ‘वन्दे मातरम्’ ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान करोड़ों भारतीयों को संघर्ष में शामिल होने की प्रेरणा दी, आज उसी को लेकर विवाद खड़ा किया जा रहा है।
शान्ता कुमार ने कहा कि इतिहास गवाह है कि वर्ष 1937 तक कांग्रेस सहित सभी लोग ‘वन्दे मातरम्’ गाते थे। उन्होंने कहा कि उस समय मोहम्मद अली जिन्ना ने इसका विरोध किया, जिसके बाद कांग्रेसियों ने ‘वन्दे मातरम्’ के दो छंद गाना बंद कर दिया।
उन्होंने इंडोनेशिया का उदाहरण देते हुए कहा कि वह आज एक मुस्लिम देश है, लेकिन वहां कभी हिंदू धर्म और राम संस्कृति का प्रभाव रहा है। यही कारण है कि मुस्लिम बहुल होने के बावजूद इंडोनेशिया में रामलीला का आयोजन होता है और अनेक हिंदू मंदिर भी स्थापित हैं।
शान्ता कुमार ने एक प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि जब भारत के एक मंत्री ने इंडोनेशिया के मंत्री से पूछा कि देश के मुस्लिम होने के बावजूद वहां रामलीला क्यों होती है, तो उन्होंने उत्तर दिया था कि “हमारे पूर्वजों ने पूजा करने का तरीका बदला था, संस्कृति और हमारे बाप-दादा नहीं बदले।”
उन्होंने कहा कि जब मुस्लिम देश इंडोनेशिया अपनी सांस्कृतिक विरासत के रूप में रामलीला को स्वीकार कर सकता है और राम मंदिरों को स्थान दे सकता है, तो भारत में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और सोनिया गांधी को पूरा ‘वन्दे मातरम्’ गाने में क्या आपत्ति है।
शान्ता कुमार ने कहा कि वह केवल इतना कहना चाहते हैं कि भगवान भारत के कांग्रेस नेताओं को सद्बुद्धि दें।

लोहारपुरा व मिल्ख पंचायतों में सांस्कृतिक दल ने किया योजनाओं का प्रचारनूरपुर, 20 अगस्त। सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा ...
20/08/2026

लोहारपुरा व मिल्ख पंचायतों में सांस्कृतिक दल ने किया योजनाओं का प्रचार

नूरपुर, 20 अगस्त। सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा चलाए जा रहे विशेष प्रचार अभियान के तहत वीरवारर को ग्राम पंचायत लोहारपुरा और मिल्ख में नुक्कड़ नाटकों का आयोजन किया गया। कलाकारों ने गीत-संगीत के माध्यम से अनुसूचित जातियों के कल्याणार्थ चलाई जा रही योजनाओं जैसे अन्तर्जातीय विवाह प्रोत्साहन योजना, अनुवर्ती कार्यक्रम योजना, स्वर्ण जयंती आश्रय योजना की जानकारी दी। इसके अलावा मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना, इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजनाओं सहित प्रदेश सरकार की अन्य जनकल्याण योजनाओ की जानकारी भी दी।
नाट्य दल ने बताया कि अन्तर्जातीय विवाह पर 2 लाख रुपये प्रोत्साहन, आजीविका साधन हेतु आर्थिक सहायता, सिलाई मशीन पर 1,800 रुपये सब्सिडी तथा गृह निर्माण के लिए 1.50 लाख रुपये अनुदान जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने लोगों को प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का लाभ लेने का आह्वान किया। साथ ही नशा निवारण का संदेश भी दिया गया।
कार्यक्रम में पंचायत प्रतिनिधियों,आंगनबाड़ी वर्कर,आशा वर्कर सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।

कृषि विश्वविद्यालय द्वारा गाजर घास (पार्थेनियम) जागरूकता सप्ताह का आयोजन, प्रबंधन को बढ़ावाफायर न्यूज, पालमपुर, 19 अगस्त...
19/08/2026

कृषि विश्वविद्यालय द्वारा गाजर घास (पार्थेनियम) जागरूकता सप्ताह का आयोजन, प्रबंधन को बढ़ावा

फायर न्यूज, पालमपुर, 19 अगस्त 2026: चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर द्वारा कृषि विज्ञान विभाग एवं इसके कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) के माध्यम से गाजर घास जागरूकता सप्ताह मनाया जा रहा है। इसका उद्देश्य किसानों को पार्थेनियम खरपतवार के हानिकारक प्रभावों तथा इसके प्रभावी प्रबंधन के प्रति जागरूक करना है।

इसी कड़ी में अभियान के तहत आज पालमपुर तहसील के पुन्नर गांव में एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें 72 किसानों को गाजर घास के मानव स्वास्थ्य, पशुधन एवं फसलों पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों के साथ-साथ इसकी रोकथाम एवं नियंत्रण के विभिन्न उपायों की जानकारी दी गई। कार्यक्रम शस्य विज्ञान विभाग के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ, जिसमें परियोजना प्रभारी डॉ. पंकज चोपड़ा ने किसानों को महत्वपूर्ण तकनीकी जानकारी प्रदान की।

डॉ. चोपड़ा ने बताया कि पार्थेनियम खरपतवार प्रकाश एवं तापमान जैसे पर्यावरणीय कारकों के प्रति अत्यंत संवेदनशील है तथा यह बड़ी संख्या में हल्के बीज उत्पन्न करता है, जो हवा, पानी, कृषि यंत्रों तथा अन्य माध्यमों से तेजी से फैल जाते हैं। इस खरपतवार में पार्थेनिन नामक रसायन पाया जाता है, जो मनुष्यों एवं पशुओं में दमा, खांसी, त्वचा पर चकत्ते, खुजली तथा एलर्जी जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।

किसानों को खरपतवार प्रबंधन की यांत्रिक, रासायनिक एवं जैविक विधियों के बारे में विस्तार से अवगत कराया गया। विशेष रूप से यांत्रिक नियंत्रण उपायों को अपनाने तथा खरपतवार के सीधे संपर्क से बचने के लिए आवश्यक सावधानियों पर बल दिया गया। साथ ही विभिन्न कृषि एवं गैर-कृषि परिस्थितियों में उपयुक्त शाकनाशियों के चयन, मात्रा एवं सही उपयोग की जानकारी भी दी गई।

जैविक प्रबंधन के अंतर्गत किसानों को ज़ाइगोग्रामा भृंग जैसे प्राकृतिक शत्रुओं के उपयोग के साथ-साथ अल्टरनेन्थेरा एवं अन्य जैविक विकल्पों के बारे में भी जानकारी दी गई, ताकि पार्थेनियम के एकीकृत प्रबंधन को बढ़ावा दिया जा सके।

विश्वविद्यालय द्वारा शस्य विज्ञान विभाग एवं केवीके के माध्यम से सप्ताह भर जागरूकता एवं क्षमता निर्माण गतिविधियाँ आयोजित की जा रही हैं, जिससे किसान एवं ग्रामीण समुदाय गाजर घास की पहचान, रोकथाम एवं प्रभावी प्रबंधन अपनाकर कृषि क्षेत्रों एवं आसपास के वातावरण को इस हानिकारक खरपतवार से मुक्त रखने में सक्रिय भागीदारी निभा सकें।

‘वंदे मातरम्’ पर विवाद दुर्भाग्यपूर्ण, कांग्रेस पर मुस्लिम तुष्टीकरण का आरोप: शांता कुमारफायर न्यूज,पालमपुर, 19 अगस्त। प...
19/08/2026

‘वंदे मातरम्’ पर विवाद दुर्भाग्यपूर्ण, कांग्रेस पर मुस्लिम तुष्टीकरण का आरोप: शांता कुमार
फायर न्यूज,पालमपुर, 19 अगस्त। पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री शांता कुमार ने ‘वंदे मातरम्’ को लेकर चल रहे विवाद पर कांग्रेस को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ स्वतंत्रता आंदोलन का मंत्र और राष्ट्रीय उद्घोष बन गया था, जिसने करोड़ों देशवासियों को प्रेरित किया। ऐसे राष्ट्रगीत के दो छंदों को लेकर विवाद खड़ा करना स्वतंत्र भारत के लिए दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है।
शांता कुमार ने कहा कि मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति के कारण देश को विभाजन का दंश झेलना पड़ा। विभाजन के दौरान लाखों लोगों की जान गई और करोड़ों लोग विस्थापित हुए। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बावजूद कांग्रेस के लिए मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति आज भी महत्वपूर्ण बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में ‘वंदे मातरम्’ का पूरा गीत गाया जाता था। भगत सिंह और अशफाक उल्ला खान जैसे क्रांतिकारी भी इसे राष्ट्रभक्ति की भावना के साथ गाते थे। बाद में मोहम्मद अली जिन्ना ने गीत के उन दो छंदों पर आपत्ति जताई, जिनमें देवी दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती का उल्लेख है। इसके बाद उन छंदों को गाने की परंपरा समाप्त कर दी गई।
शांता कुमार ने कहा कि उस समय की व्यवस्था और परंपरा के अनुरूप ‘वंदे मातरम्’ को महात्मा गांधी से लेकर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी तक नेताओं ने गाया। उन्होंने कहा कि समय के साथ व्यवस्था और सरकारें बदलीं तथा कानून के माध्यम से उन दो छंदों को फिर ‘वंदे मातरम्’ का हिस्सा बनाया गया है। ऐसे में आज किसी को भी इस पर आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि यह विडंबना है कि जिन देवी-देवताओं और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं को लेकर जिन्ना ने आपत्ति जताई थी, उन्हीं को लेकर आज भी कांग्रेस के कुछ नेताओं की आपत्ति सामने आती है। शांता कुमार ने सवाल उठाया कि यदि अशफाक उल्ला खान जैसे देशभक्तों को पूरा ‘वंदे मातरम्’ गाने में कोई आपत्ति नहीं थी, तो आज कांग्रेस नेताओं को इसके दो छंदों से आपत्ति क्यों है।

एफआरए के तहत पात्रों को प्राथमिकता के तहत अधिकार दिलाएं- आशीष बुटेलनगर निगम में मामले पर आयोजित बैठक में विधायक ने जारी ...
18/08/2026

एफआरए के तहत पात्रों को प्राथमिकता के तहत अधिकार दिलाएं- आशीष बुटेल
नगर निगम में मामले पर आयोजित बैठक में विधायक ने जारी किए दिशा निर्देश

फायर न्यूज,पालमपुर, 18 अगस्त। नगर निगम पालमपुर में वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) के तहत मामलों की समीक्षा हेतु एक विशेष बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में पालमपुर के विधायक आशीष बुटेल विशेष तौर पर उपस्थित रहे।

बैठक के दौरान विधायक ने संबंधित विभागीय अधिकारियों से एफआरए के तहत प्राप्त आवेदनों एवं प्रगति की विस्तृत जानकारी ली तथा अधिकारियों से बिंदुवार फीडबैक प्राप्त किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पात्र व्यक्तियों को उनके कानूनी अधिकार दिलाने में किसी भी प्रकार की देरी न की जाए और सभी मामलों का निपटारा समयबद्ध व प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित किया जाए।

विधायक बुटेल ने कहा कि राज्य सरकार का मुख्य ध्येय जरूरतमंद और पात्र लोगों को वन अधिकार अधिनियम के तहत उनका हक दिलाना है। उन्होंने नगर निगम के प्रतिनिधियों, पंचायती राज प्रतिनिधियों, बीडीसी सदस्यों और नगर निगम के पार्षदों से आह्वान किया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में पात्र व्यक्तियों की पहचान कर पात्रों को हक दिलाने में सक्रिय भूमिका निभाएं। इसके अतिरिक्त, प्रक्रियाओं को सुगम बनाने के लिए एफआरसी (वन अधिकार समितियों) के तहत प्रशिक्षण सत्र आयोजित करने के भी निर्देश दिए गए।

उन्होंने उपमंडल प्रशासन के अधिकारियों से कहा कि सरकार इस मामले पर संजीदगी से कार्य कर रही है। इस मामले पर अधिकारी किसी भी प्रकार की कोताही न बरतें।

बैठक में महापौर राधा सूद, उप-महापौर नीलम मलिक, आयुक्त नेत्रा मेती, एसडीएम पालमपुर डॉ. ओपी यादव, संयुक्त आयुक्त रमेश चंद, आरओ आदित्य, नगर निगम के पार्षद अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
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