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Parallel Media स्वतंत्र लेखक

07/07/2026










06/07/2026
06/07/2026













06/07/2026










निराश मत होना प्रिय, मिलन तो होकर रहेगा हमारा क्षितिज पर तो धरती और आकाश भी मिल जाते है माना की सामाजिक बंधन है लेकिन बं...
06/07/2026

निराश मत होना प्रिय, मिलन तो होकर रहेगा हमारा
क्षितिज पर तो धरती और आकाश भी मिल जाते है
माना की सामाजिक बंधन है लेकिन बंधन भी टूटेंगे
प्रेम की धारा क़े आगे बंधनों क़े पहाड़ भी ढह जाते है



#मिलन






05/07/2026









04/07/2026











आँखे बंद हो तो दिखती हो खुलते ही गायब हो जाती हो कल्पनाओ मै तो आ जाती हो बाजूओ मैं नहीं समाती होहर एकांत मै जलसा हो तुम,...
02/07/2026

आँखे बंद हो तो दिखती हो खुलते ही गायब हो जाती हो कल्पनाओ मै तो आ जाती हो बाजूओ मैं नहीं समाती हो
हर एकांत मै जलसा हो तुम, हर बेचैनी का सुकून हो तुम मेरी पूरी कहानी हो पूरी दुनियां मानो यही बात बताती हो

आँखे बंद हो तो दिखती हो खुलते ही गायब हो जाती हो कल्पनाओ मै तो आ जाती हो बाजूओ मैं नहीं समाती हो










कल शाम बंद रेल फाटक के उस पार एक लड़की दिखी,आयु में थी मुग्धा, चंचलता में किशोरी, मानो कोई शिखी।चित्ताकर्षक काया की धनी,...
01/07/2026

कल शाम बंद रेल फाटक के उस पार एक लड़की दिखी,
आयु में थी मुग्धा, चंचलता में किशोरी, मानो कोई शिखी।

चित्ताकर्षक काया की धनी, नयनाभिराम व्यक्तित्व था,
देखते ही मन्त्रमुग्ध हो गया नेत्रों की धार थी ऐसी तीखी

नभ-सा विस्तृत ललाट उसका, उस पर बिंदिया मानो चन्द्रमा,
रंग था विशुद्ध धवल ऐसा, मानो दुग्ध-धारा का बहता झरना।

केशों की भूरे बहु-वेणी-कलाप, मानो लताएँ जटामांसी,
मनमोहिनी थीं उसकी अदाएँ, आँखें मानो मीनाक्षी।

क्षणभर के उस दृश्य ने मानो भविष्य की पटकथा लिखी।

कल शाम बंद रेल फाटक के उस पार एक लड़की दिखी,
आयु में थी मुग्धा, चंचलता में किशोरी, मानो कोई शिखी।

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