18/08/2024
रक्षाबंधन कब और कैसे मनाएं ? भद्राकाल कब है? वैदिक रक्षासूत्र(राखी) किन चीजों से बनाए और उन चीजों का महत्व क्या है? राखी बांधते समय कौन सा श्लोक बोले?! यह सब जानने के ईस लेख को अंत तक जरूर पढे 👇
🏵️ वैदिक रक्षाबंधन 🏵️
••••••••••••••••••••••••••
🤛🏵️ राखी बांधने का शुभ मुहूर्त - और कब बांधे राखी ⤵️
🌝 श्रावणी पूर्णिमा का समय
🗓️ 19 अगस्त, सोमवार
* सुबह 3:04 से रात्रि 11:55 तक*
❌ भद्रा काल जब राखी नहीं बांधनी है
* दोपहर 1:33 तक
✅ राखी बांधने का शुभ मुहूर्त
* दोपहर 1:34 से रात्रि 9:08 बजे तक
👌 शुभ मुहूर्त में भी विशेष शुभ मुहूर्त
* दोपहर 2:17 से शाम 7:06 तक है
••••••••••••••••••••••••••
🏵️ वैदिक रक्षा सूत्र (राखी) का महत्व 👇🏽👇🏽
वैदिक राखी का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि सावन के मौसम में यदि रक्षासूत्र को कलाई पर बांधा जाये तो इससे संक्रामक रोगों से लड़ने की हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है। साथ ही यह रक्षासूत्र हमारे अंदर सकारात्मक ऊर्जा का संचरण भी करता है।
🏵️🎗️ वैदिक रक्षा सूत्र बनाने की विधि 👇🏽👇🏽
🖐️ इसके लिए 5 वस्तुओं की आवश्यकता होती है -
🌿 दूर्वा (घास)
🌾 अक्षत (चावल)
🟠 केसर
🟡 चंदन
🟡 पीली सरसों के दाने ।
÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷
🎗️🖐️ इन ५ वस्तुओं को रेशम के कपड़े में लेकर उसे बांध दें या सिलाई कर दें, फिर उसे कलावा (નાડાછડી) में पिरो दें, आप इस पोटली को फेंसी राखी के नीचे भी बांध सकते है। इस प्रकार वैदिक राखी तैयार हो जाएगी ।
••••••••••••••••••••••••••
🪭🖐️ इन पांच वस्तुओं का महत्त्व 👇🏽
🌿 दूर्वा - जिस प्रकार दूर्वा का एक अंकुर बो देने पर तेज़ी से फैलता है और हज़ारों की संख्या में उग जाता है, उसी प्रकार मेरे भाई का वंश और उसमे सदगुणों का विकास तेज़ी से हो । सदाचार, मन की पवित्रता तीव्रता से बढ़ता जाए । दूर्वा गणेश जी को प्रिय है अर्थात हम जिसे राखी बाँध रहे हैं, उनके जीवन में विघ्नों का नाश हो जाए ।
🌾 अक्षत - हमारी गुरुदेव व ईश्वर के प्रति श्रद्धा कभी क्षत-विक्षत ना हो सदा अक्षत रहे ।
🟠 केसर - केसर की प्रकृति तेज़ होती है अर्थात हम जिसे राखी बाँध रहे हैं, वह तेजस्वी हो । उनके जीवन में आध्यात्मिकता का तेज, भक्ति का तेज कभी कम ना हो ।
🟡 चंदन - चंदन की प्रकृति शीतल होती है और यह सुगंध देता है । उसी प्रकार उनके जीवन में शीतलता बनी रहे, कभी मानसिक तनाव ना हो । साथ ही उनके जीवन में परोपकार, सदाचार और संयम की सुगंध फैलती रहे ।
🟡 सरसों के दाने - पीली सरसों की प्रकृति तीक्ष्ण होती है अर्थात इससे यह संकेत मिलता है कि समाज के दुर्गुणों को, कंटकों को समाप्त करने में हम तीक्ष्ण बनें ।
••••••••••••••••••••••••••
🙏🏻🖐️ इन पांच पदार्थों के अलावा कुछ राखियों में हल्दी, कौड़ी व गोमती चक्र भी रखा जाता है। इस प्रकार इन पांच वस्तुओं से बनी हुई एक राखी को सर्वप्रथम अपने गुरुदेव व ईष्टदेव के श्री-चित्र पर अर्पित करें । फिर बहनें अपने भाई को, माता अपने बच्चों को, दादी अपने पोते को शुभ संकल्प करके बांधे ।
🌟✨ ‘रक्षाबंधन के दिन वैदिक रक्षासूत्र बाँधने से वर्ष भर रोगों से हमारी रक्षा रहे, बुरे भावों से रक्षा रहे, बुरे कर्मों से रक्षा रहे'- ऐसा एक-दूसरे के प्रति सत्संकल्प करते हैं।
••••••••••••••••••••••••••
📖 महाभारत में यह रक्षा सूत्र माता कुंती ने अपने पोते अभिमन्यु को बाँधी थी । जब तक यह धागा अभिमन्यु के हाथ में था तब तक उसकी रक्षा हुई, धागा टूटने पर अभिमन्यु की मृत्यु हुई ।
🙏🏻 इस प्रकार इन पांच वस्तुओं से बनी हुई वैदिक राखी को शास्त्रोक्त नियमानुसार बांधते हैं तो हम पुत्र-पौत्र एवं बंधुजनों सहित वर्ष भर सुखी रहते हैं ।
••••••••••••••••••••••••••
🤛🏵️ रक्षा सूत्र बांधते समय ये श्लोक बोलें 👇🏽👇🏽
💫 येन बद्धो बलि राजा,
💫 दानवेन्द्रो महाबलः ।
💫 तेन त्वां अभिबध्नामि,
💫 रक्षे माचल माचल: ॥
अर्थ: जिस पतले रक्षासूत्र ने महाशक्तिशाली असुरराज बलि को बाँध दिया, उसीसे मैं आपको बाँधती हूँ । आपकी रक्षा हो । यह धागा टूटे नहीं और आपकी रक्षा सुरक्षित रहे। (शिष्य गुरु को रक्षासूत्र बाँधते समय ‘अभिबध्नामि' के स्थान पर ‘रक्षबध्नामि' कहें)
👧🏻👧🏻 रक्षाबंधन के दिन बहन भैया के ललाट पर तिलक-अक्षत लगाकर संकल्प करती है कि ‘जैसे शिवजी त्रिलोचन हैं, ज्ञानस्वरूप हैं, वैसे ही मेरे भाई में भी विवेक-वैराग्य बढ़े, मोक्ष का ज्ञान, मोक्षमय प्रेमस्वरूप ईश्वर का प्रकाश आये। मेरे भैया की सूझबूझ, यश, कीर्ति और ओज-तेज अक्षुण्ण रहे।'
👧🏻👧🏻 बहनें रक्षाबंधन के दिन ऐसा संकल्प करके रक्षासूत्र बाँधें कि ‘हमारे भाई धर्म प्रेमी, भगवत्प्रेमी बनें।' और भाई सोचें कि ‘हमारी बहन भी चरित्रप्रेमी, धर्मप्रेमी, भगवत्प्रेमी बने।' अपनी सगी बहन व पड़ोस की बहन के लिए अथवा अपने सगे भाई व पड़ोसी भाई के प्रति ऐसा सोचें। आप दूसरे के लिए भला सोचते हो तो आपका भी भला हो जाता है। संकल्प में बड़ी शक्ति होती है। अतः आप ऐसा संकल्प करें कि हमारा आत्मस्वभाव प्रकटे।
💫 सर्वरोगोपशमनं
💫 सर्वाशुभविनाशनम् ।
💫 सकृत्कृते नाब्दमेकं
💫 येन रक्षा कृता भवेत् ।।
अर्थ:‘इस पर्व पर धारण किया हुआ रक्षासूत्र सम्पूर्ण रोगों तथा अशुभ कार्यों का विनाशक है। इसे वर्ष में एक बार धारण करने से वर्ष भर मनुष्य रक्षित हो जाता है।'
📖 - (भविष्य पुराण)
••••••••••••••••••••••••••
🚩 उपाकर्म संस्कार : इस दिन गृहस्थ ब्राह्मण व ब्रह्मचारी गाय के दूध, दही, घी, गोबर और गौ-मूत्र को मिलाकर पंचगव्य बनाते हैं और उसे शरीर पर छिड़कते, मर्दन करते व पान करते हैं, फिर जनेऊ बदलकर शास्त्रोक्त विधि से हवन करते हैं। इसे उपाकर्म कहा जाता है। इस दिन ऋषि उपाकर्म कराकर शिष्य को विद्याध्ययन कराना आरम्भ करते थे।
🚩 उत्सर्जन क्रिया : श्रावणी पूर्णिमा को सूर्य को जल चढ़ाकर सूर्य की स्तुति तथा अरुंधती सहित सप्त ऋषियों की पूजा की जाती है और दही-सत्तू की आहुतियाँ दी जाती हैं। इस क्रिया को उत्सर्जन कहते हैं।
📚 स्रॊत:
🛕 संत आशारामजी आश्रम द्वारा प्रकाशित साहित्य "ऋषि प्रसाद" एवं "लोक कल्याण सेतु" से संकलित
🤛🏵️ रक्षाबंधन के पवित्र त्योहार की आपको खूब खूब बधाई 💐
📌🌎 Note: अपने स्वजनो और मित्रों को "वैदिक रक्षाबंधन" की यह अद्भुत जानकारी जरूर पहुंचाए। 🙏🕉️🚩