07/07/2026
स्मृति लेख........❤️❤️❤️🙏🙏
सितारों से आगे जहां और भी है
❤️Happy birthday sir🙏
आज स्व रणबीर सर का जन्म दिन है। आज जयपुर रंगमंच में आपके न होने का महत्व पता चलता है। पिछले 35 सालों से आपको करीब से देखा, आपका रंगमंच के प्रति सुबह से शाम तक ओढ़ना और बिछौना सिर्फ़ रंगमंच ही होता था।
आज जयपुर रंगमंच की दीवारें खामोश है,रंगमंच की नूरानी के लिए हमेशा लड़ने वाला इंसान आप जैसा
इस शहर में कोई न होगा।आज भी रविन्द्र मंच और जवाहर कला केंद्र की खामोश दीवारें रणबीर सर को ढूंढती होगी।
रणबीर सिंह क्या नहीं थे। हर बात अपनी बेबाक से बोलते थे । कोई सा विषय ले लो,हर विषय की जानकारी हर समय उनके पास रहती थी। रंगमंच के चलते फिरते इनसाइक्लोपीडिया थे।दुनिया का किसी कोने की रंगमंच की जानकारी ले लो,वो हमेशा देंने को तैयार रहते थे। हमेशा युवाओं को प्रोत्साहन के लिए तत्पर रहते थे।पूरे हिंदुस्तान से रिसर्च स्टूडेंट्स की रंगमंच की जानकारी के लिए नए युवाओं और पुराने रंगकर्मियों की उनके घर पर जमावड़ा हमेशा रहता था।
आज के दौर में हिंसा और सांप्रदायिकता अहिष्णुनता के दौर में वे प्रकाश पुंज थें।
लिखने को तो बहुत है.....बस ..आज जयपुर रंगमंच और इप्टा परिवार में आपकी कमी हमेशा खलती है .….और इस शहर का दुर्भाग्य कहे कि हम व्यक्ति के जाने के बाद गुणानुवाद करने लगते हैं।
सर को जितना मैने करीब से देखा परखा,वो एक स्पष्ट वक्ता थे,और यही उनकी शख्शियत की खास पहचान थी और वही उन्हें भला बुरा भी बनाती थी।
कभी समझौतावादी नहीं रहे, चाहे रंगमंच पर हो या सत्ता की गलियारे में।
ऐसे बहुत सारे किस्से हैं। एक यायावर चिंतक नाट्यकर्मी की कमी और उनकी बातें इस शहर के रंगमंच को अब जरूर अखरता है। वक्त वक्त की बात है,ऐसा लगता वक्त बंद मुट्ठी से जल्दी फिसल गई।
आज भी सर के बहुत सारे लिखे हुए लेख, कई नाट्य रूपांतरण नाटक, कहानियां कई विषयों पर किताबें, कई सदियों तक पढ़ी जाएंगी और उनके नाटकों का मंचन देश के कोने कोने में खेले जाएंगे ..... और ऐसे ही हम और आने वाली पीढ़ियां आपको याद करते रहेगी।
लिखने को बहुत ढेर सारा है....सर लव यू मिस यू 🙏🙏🙏❤️❤️❤️
संजय विद्रोही
अध्यक्ष
इप्टा जयपुर