राजपूतानी छवि

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गुर्जराधिपति क्षत्रिय सम्राट  #नागभट्ट (805-833), अपने पिता  #वत्सराज से गद्दी प्राप्त कर गुर्जर-प्रतिहार राजपूत राजवंश ...
05/07/2024

गुर्जराधिपति क्षत्रिय सम्राट #नागभट्ट (805-833), अपने पिता #वत्सराज से गद्दी प्राप्त कर गुर्जर-प्रतिहार राजपूत राजवंश के चौथे राजा बने। उनकी माता का नाम सुन्दरीदेवी था। नागभट्ट द्वितीय को परमभट्टारक, महाराजाधिराज और कन्नौज विजय के बाद 'परमेश्वर' की उपाधि दी गई थी।भारतीय इतिहास में "गुर्जर-प्रतिहार" वंश का महत्वपूर्ण स्थान है, इन प्रतिहार वंश के क्षत्रिय (राजपूत) बहुत कुशन प्रशासक थे, इन्होंने गुर्जर क्षेत्र पर विजय प्राप्त किया था, इस विजय के पश्चात इन्हें गुर्जर प्रदेश विजेता अर्थात गुर्जराधिपति उपाधि मिला ! मध्यकाल से पहले इन्होंने 500 वर्ष तक अरबी आक्रमणकारियों का सामना किया वह, समय सर्वाधिक प्रसिद्ध गुर्जर प्रतिहार राजपूत वंश ही था !!प्रतिहार वंश' को #गुर्जर_प्रतिहार वंश (छठी शताब्दी से 1036 ई.) इसलिए कहा गया, क्योंकि प्रतिहार राजपूतो ने गुर्जर क्षेत्र पर विजय प्राप्त किया था, गुजरात व दक्षिण-पश्चिम राजस्थान के क्षेत्र को गुर्जर क्षेत्र कहा जाता था। प्रतिहारों के अभिलेखों में उन्हें श्रीराम के अनुज लक्ष्मण का वंशज बताया गया है, जो श्रीराम के लिए प्रतिहार (द्वारपाल) का कार्य करता था। कन्नड़ कवि 'पम्प' ने महिपाल को 'गुर्जर क्षेत्र विजेता'' कहा है। 'स्मिथ' ह्वेनसांग के वर्णन के आधार पर उनका मूल स्थान आबू पर्वत के उत्तर-पश्चिम में स्थित भीनमल को मानते हैं। कुछ अन्य विद्वानों के अनुसार उनका मूल स्थान अवन्ति था।

सन् 1840 में काबुल में युद्ध में 8000 पठान मिलकर भी 1200  #सनातनी क्षत्रियों (राजपूतो) का मुकाबला 1 घंटे भी नही कर पाये।...
05/07/2024

सन् 1840 में काबुल में युद्ध में 8000 पठान मिलकर भी 1200 #सनातनी क्षत्रियों (राजपूतो) का मुकाबला 1 घंटे भी नही कर पाये।

वही इतिहासकारो का कहना था की चित्तोड की तीसरी लड़ाई जो 8000 क्षत्रियों और 60000 मुगलो के मध्य हुयी थी , वहा अगर क्षत्रिय 15000 होते तो अकबर भी जिंदा बचकर नहीं जाता।

"इस युद्ध में 48000 सैनिक मारे गए थे जिसमे 8000
क्षत्रिय और 40000 मुग़ल थे वही 10000 के करीब
घायल थे"।

और दूसरी तरफ गिररी सुमेल की लड़ाई में 15000 क्षत्रिय, 80000 तुर्को से लडे थे, इस पर घबराकर शेर शाह सूरी ने कहा था "मुट्टी भर बाजरे (मारवाड़) की खातिर हिन्दुस्तान की सल्लनत खो बैठता "।

उस युद्ध से पहले जोधपुर महाराजा मालदेव जी नहीं गए
होते तो शेर शाह ये बोलने के लिए जीवित भी नही रहता।

इस देश के इतिहासकारो ने और स्कूल कॉलेजो की किताबो मे आजतक सिर्फ वो ही लडाई पढाई जाती है, जिसमे हम कमजोर रहे। वरना बप्पा रावल और राणा सांगा जैसे योद्धाओ का नाम तक सुनकर मुगल की औरतो के गर्भ गिर जाया करते थे।

रावत रत्न सिंह चुंडावत की रानी हाडा का त्यागपढाया नही गया, जिन्होने अपना सिर काटकर दे दिया था।

पाली के आउवा के ठाकुर खुशहाल सिंह को नही पढाया जाता, जिन्होंने एक अंग्रेज के अफसर का सिर काटकर किले पर लटका दिया था।

महाराजा गोविंद्रचंद्र गहड़वाल जी का इतिहास नही पढ़ाया जाता जिन्होने तुर्क सुल्तान मसूद और बहराम शाह की सेनाओ को घास मूली की तरह काटते हुए धूल चटाया और भारत भूमि से खदेड़ दिया ।

महाराजा छत्रसाल ने 30 घोड़े और एक छोटी टुकड़ी के साथ मुगलों के खिलाफ बिगुल फूका और उन्होने मुगलों से संपुर्ण बुंदेलखण्ड आजाद कराया और औरंगजेब को मारकर सनातन की रक्षा किया ।

यह कुछ क्षत्रिय (राजपूत) योद्धाओं की सूची👇

चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य
चक्रवर्ती सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य
सम्राट अशोक महान
राजा भोज परमार
महाराणा कुंभा
महाराणा सांगा
महाराणा प्रताप जी सिसोदिया
शिवा जी महाराजा भोंसले
मिहिरभोज प्रतिहार
हर्षवर्धन बैस
महाराजा गोविंद्रचंद्र गहड़वाल
महाराजा अनंगपाल सिंह तोमर
वीर डुंगर भाटी
राष्ट्रवीर दुर्गादास राठौड़
महाराजा जयचंद्र राठौड़
वीर आल्हा - ऊदल
रावल जैसल भाटी
हम्मीर देव चौहान
वीर पृथ्वीराजसिंह चौहान
सुजान सिंह शेखावत
भीमदेव सोलंकी
महाराजा व्याघ्रदेव बघेल
भंजिदल जडेजा
राव चंद्रसेन राठौड़
कल्ला जी राठौड़
बाप्पा रावल
नागभट प्रतिहार(पढियार)
मिहिरभोज प्रतिहार(पढियार)
राणा सांगा
रानी दुर्गावती
रानी पद्मनी
झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई
वीर जयमल मेड़तिया
महाराजा रुद्र प्रताप सिंह बुंदेला
महाराजा वीर सिंह बुंदेला
वीर क्षत्रसाल बुंदेला
हमीरसिंह गोहिल
राजा कुलचंद जादौन
बाबू वीर कुँवर सिंह
बन्दा सिंह बहादुर
राऊ बज्जर सिंह राठौड़

इन जैसे महान योद्धाओं को नही पढ़ाया/बताया जाता है, जिनके नाम के स्मरण मात्र से ही शत्रुओं के शरीर में आज भी कंपकंपी शुरू हो जाती है।

जय माॅ भवानी 👏

#सनातन











जन्म दियो क्षत्राणी , एडो करो कर्म,लाज माटी री राखनी है , क्षत्राणी परमों धर्म ।  #क्षत्राणी 💥💥
05/07/2024

जन्म दियो क्षत्राणी , एडो करो कर्म,
लाज माटी री राखनी है , क्षत्राणी परमों धर्म ।

#क्षत्राणी 💥💥










आसोप (जोधपुर) के मांडण गढ़ के भीतरी दृश्य #इतिहास
05/07/2024

आसोप (जोधपुर) के मांडण गढ़ के भीतरी दृश्य
#इतिहास










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