22/05/2026
ग्यारह वर्ष पहले रंग राजस्थान की शुरुआत एक सरल लेकिन महत्वपूर्ण उद्देश्य के साथ हुई थी — राजस्थानी भाषा, लोक संस्कृति और रंगमंच को एक सशक्त मंच प्रदान करना। उस समय जब क्षेत्रीय भाषाएँ और लोक परंपराएँ नई पीढ़ी से धीरे-धीरे दूर होती जा रही थीं, तब इस महोत्सव ने राजस्थानी कहानियों, लोक कलाओं और स्थानीय सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों को समाज के केंद्र में लाने का कार्य किया।
इन वर्षों में रंग राजस्थान ने अनेक राजस्थानी भाषा आधारित नाटकों, लोक प्रस्तुतियों, सांस्कृतिक संवादों और स्कूल आउटरीच कार्यक्रमों का आयोजन किया। थिएटर और लोक कलाओं के माध्यम से बच्चों और युवाओं को राजस्थान की भाषा, संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक मूल्यों से जोड़ने का सतत प्रयास किया गया। हमारे लिए भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान और विरासत की आत्मा है।
आज माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा राजस्थान सरकार को राजस्थानी भाषा को मान्यता देने और राज्य के विद्यालयों में इसे विषय के रूप में लागू करने के निर्देश का निर्णय हमारे लिए अत्यंत हर्ष और गर्व का विषय है। यह निर्णय उस उद्देश्य और सोच से गहराई से जुड़ा हुआ महसूस होता है जिसके साथ रंग राजस्थान ने अपनी यात्रा शुरू की थी।
हमें विश्वास है कि यह ऐतिहासिक कदम आने वाली पीढ़ियों को अपनी मातृभाषा और सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का कार्य करेगा। यह केवल भाषा की जीत नहीं, बल्कि राजस्थान की लोक परंपराओं, कला और सांस्कृतिक अस्मिता की भी बड़ी जीत है।