Ashok Charan

Ashok Charan इसे आग की राग मत कहो अभिलाषा गाता हूँ मैं
मत ढूंढो व्याकरण आचरण की भाषा गाता हूँ मैं
©अशोक चारण

फलासिया (उदयपुर राजस्थान )कवि सम्मेलन प्रारम्भ....
12/04/2024

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09/04/2024

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कुछ अफ़साने तेरे हैं तो कुछ अफ़साने मेरे भी हैं कुछ दीवाने तेरे हैं तो कुछ दीवाने मेरे भी हैं ©अशोक चारण
29/03/2024

कुछ अफ़साने तेरे हैं तो कुछ अफ़साने मेरे भी हैं
कुछ दीवाने तेरे हैं तो कुछ दीवाने मेरे भी हैं

©अशोक चारण

Ready to fly from Kolkata to Jaipur...
24/03/2024

Ready to fly from Kolkata to Jaipur...

22/03/2024
21/03/2024

#विश्वकवितादिवस



कैसे राग कोई गाता है ये मत पूछो
कैसे गीत लिखा जाता है ये मत पूछो
शेर ग़ज़ल मिसरा मतला या क़ता रुबाई
कोई कैसे कह पाता है ये मत पूछो
शब्दकोश जितना विकसित है उतने ही पर्याय लिखोगे
तुम जितने अक्षर पढ़ लोगे उतने ही अध्याय लिखोगे

तुम कंठों में राग लिखोगे , दावा है
तुम मरुथल में बाग लिखोगे दावा है
शब्द भाव में आग भरी है उसको पी लो
फिर कागज़ पर आग लिखोगे , दावा है
तय कर लो कक्षा की किस्मत में कितने संकाय लिखोगे
तुम जितने अक्षर पढ़ लोगे उतने ही अध्याय लिखोगे

शब्द ब्रह्म है इनसे डरना सीखो प्यारे
गागर में सागर को भरना सीखो प्यारे
कविता लिखने की अभिलाषा एक बूँद है
इसी बूँद को सागर करना सीखो प्यारे
खुद को वचनबद्ध कर लो कि खुद का ही अभिप्राय लिखोगे
तुम जितने अक्षर पढ़ लोगे उतने ही अध्याय लिखोगे

©अशोक चारण

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