Dil Diyan Gallan

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इस रंग बिरंगे त्यौहार पर सभी दुःख और द्वेष की भावना को भुलाकर जिंदगी की एक नयी शुरुआत कीजिये और होली के रंग से अपने जीवन...
18/03/2022

इस रंग बिरंगे त्यौहार पर सभी दुःख और द्वेष की भावना को भुलाकर जिंदगी की एक नयी शुरुआत कीजिये और होली के रंग से अपने जीवन में खुशियां भर लीजिये.. Happy Colorful Holi Friends…

If any bastard (actor) had diedSo the media would have been cryingThe souls of politicians come outAnd the people of Ind...
20/09/2020

If any bastard (actor) had died
So the media would have been crying
The souls of politicians come out
And the people of India would have come on the road
There is so much slavery, now what can be bigger impotence than this.

India's great hockey player Mr. Balbir Singh Senior, who left with his hockey stick... had contributed to India in winning three Olympic gold medals.. at the same time, his 5 goals against the Netherlands in the 1952 Helsinki Olympic Finals. No one has been able to break the record till date...
Salute to you 🇮🇳

Don't spread the dirt of rip.. pay tribute

HARE KRISHNAISKCON UJJAIN ❤️❤️ LIVE
12/08/2020

HARE KRISHNA
ISKCON UJJAIN ❤️❤️ LIVE

https://www.faadumasti.com/story-of-mahabharat/
07/04/2020

https://www.faadumasti.com/story-of-mahabharat/

महाभारत भारतीय हिंदू संस्कृति की एक अमूल्य धरोहर है। शास्त्रों में इसे पांचवें वेद की उपमा दी गई है जिसके रचयिता म...

23/03/2020

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Admin
Sonali

इटली के यह दोनों मियां बीवी डाक्टर है और दोनों दिन रात लग कर 134 मरोजो को बचायालेकिन खुद 8 वे दिन क्रोना वायरस से बीमार ...
22/03/2020

इटली के यह दोनों मियां बीवी डाक्टर है और दोनों दिन रात लग कर 134 मरोजो को बचाया
लेकिन खुद 8 वे दिन क्रोना वायरस से बीमार हो गए और अलग अलग कमरे में शिफ्ट कर दिए गए
जब दोनों मिया बीवी डाक्टर को लगा कि हम बच नहीं पाएंगे
दोनों हॉस्पिटल के लांज में , खड़े होकर मुहब्बत भरी नज़रों से एक दूसरे को देखा , kiss किया
और आधे घंटे के बाद दोनों मर गए
क्रोना तूने ऐसे डाक्टर की ज़िन्दगी लेली जो तुम्हे मात देने के लिए एक एक मिनट मरिजो को बचाने में लगे थे
आखिर
अपने वतन के लिए खुद को किया कुर्बान
सलाम तुम्हे
सलाम तुम्हारे जज्बे को
अब हम को लड़ना है
थोड़ा सा ध्यान
थोड़ी सी जागरूकता ।।t😔😔😥😥😥😥

राधिका और नवीन को आज तलाक के कागज मिल गए थे। दोनो साथ ही कोर्ट से बाहर निकले। दोनो के परिजन साथ थे और उनके चेहरे पर विजय...
18/03/2020

राधिका और नवीन को आज तलाक के कागज मिल गए थे। दोनो साथ ही कोर्ट से बाहर निकले। दोनो के परिजन साथ थे और उनके चेहरे पर विजय और सुकून के निशान साफ झलक रहे थे। चार साल की लंबी लड़ाई के बाद आज फैसला हो गया था।
दस साल हो गए थे शादी को मग़र साथ मे छः साल ही रह पाए थे।
चार साल तो तलाक की कार्यवाही में लग गए।
राधिका के हाथ मे दहेज के समान की लिस्ट थी जो अभी नवीन के घर से लेना था और नवीन के हाथ मे गहनों की लिस्ट थी जो राधिका से लेने थे।

साथ मे कोर्ट का यह आदेश भी था कि नवीन दस लाख रुपये की राशि एकमुश्त राधिका को चुकाएगा।

राधिका और नवीन दोनो एक ही टेम्पो में बैठकर नवीन के घर पहुंचे। दहेज में दिए समान की निशानदेही राधिका को करनी थी।
इसलिए चार वर्ष बाद ससुराल जा रही थी। आखरी बार बस उसके बाद कभी नही आना था उधर।

सभी परिजन अपने अपने घर जा चुके थे। बस तीन प्राणी बचे थे।नवीन, राधिका और राधिका की माता जी।

नवीन घर मे अकेला ही रहता था। मां-बाप और भाई आज भी गांव में ही रहते हैं।

राधिका और नवीन का इकलौता बेटा जो अभी सात वर्ष का है कोर्ट के फैसले के अनुसार बालिग होने तक वह राधिका के पास ही रहेगा। नवीन महीने में एक बार उससे मिल सकता है।
घर मे प्रवेश करते ही पुरानी यादें ताज़ी हो गई। कितनी मेहनत से सजाया था इसको राधिका ने। एक एक चीज में उसकी जान बसी थी। सब कुछ उसकी आँखों के सामने बना था।एक एक ईंट से धीरे धीरे बनते घरोंदे को पूरा होते देखा था उसने।
सपनो का घर था उसका। कितनी शिद्दत से नवीन ने उसके सपने को पूरा किया था।
नवीन थकाहारा सा सोफे पर पसर गया। बोला "ले लो जो कुछ भी चाहिए मैं तुझे नही रोकूंगा"
राधिका ने अब गौर से नवीन को देखा। चार साल में कितना बदल गया है। बालों में सफेदी झांकने लगी है। शरीर पहले से आधा रह गया है। चार साल में चेहरे की रौनक गायब हो गई।

वह स्टोर रूम की तरफ बढ़ी जहाँ उसके दहेज का अधिकतर समान पड़ा था। सामान ओल्ड फैशन का था इसलिए कबाड़ की तरह स्टोर रूम में डाल दिया था। मिला भी कितना था उसको दहेज। प्रेम विवाह था दोनो का। घर वाले तो मजबूरी में साथ हुए थे।
प्रेम विवाह था तभी तो नजर लग गई किसी की। क्योंकि प्रेमी जोड़ी को हर कोई टूटता हुआ देखना चाहता है।
बस एक बार पीकर बहक गया था नवीन। हाथ उठा बैठा था उसपर। बस वो गुस्से में मायके चली गई थी।
फिर चला था लगाने सिखाने का दौर । इधर नवीन के भाई भाभी और उधर राधिका की माँ। नोबत कोर्ट तक जा पहुंची और तलाक हो गया।

न राधिका लौटी और न नवीन लाने गया।

राधिका की माँ बोली" कहाँ है तेरा सामान? इधर तो नही दिखता। बेच दिया होगा इस शराबी ने ?"

"चुप रहो माँ"
राधिका को न जाने क्यों नवीन को उसके मुँह पर शराबी कहना अच्छा नही लगा।

फिर स्टोर रूम में पड़े सामान को एक एक कर लिस्ट में मिलाया गया।
बाकी कमरों से भी लिस्ट का सामान उठा लिया गया।
राधिका ने सिर्फ अपना सामान लिया नवीन के समान को छुवा भी नही। फिर राधिका ने नवीन को गहनों से भरा बैग पकड़ा दिया।
नवीन ने बैग वापस राधिका को दे दिया " रखलो, मुझे नही चाहिए काम आएगें तेरे मुसीबत में ।"

गहनों की किम्मत 15 लाख से कम नही थी।
"क्यूँ, कोर्ट में तो तुम्हरा वकील कितनी दफा गहने-गहने चिल्ला रहा था"
"कोर्ट की बात कोर्ट में खत्म हो गई, राधिका। वहाँ तो मुझे भी दुनिया का सबसे बुरा जानवर और शराबी साबित किया गया है।"
सुनकर राधिका की माँ ने नाक भों चढ़ाई।

"नही चाहिए।
वो दस लाख भी नही चाहिए"

"क्यूँ?" कहकर नवीन सोफे से खड़ा हो गया।

"बस यूँ ही" राधिका ने मुँह फेर लिया।

"इतनी बड़ी जिंदगी पड़ी है कैसे काटोगी? ले जाओ,,, काम आएगें।"

इतना कह कर नवीन ने भी मुंह फेर लिया और दूसरे कमरे में चला गया। शायद आंखों में कुछ उमड़ा होगा जिसे छुपाना भी जरूरी था।

राधिका की माता जी गाड़ी वाले को फोन करने में व्यस्त थी।

राधिका को मौका मिल गया। वो नवीन के पीछे उस कमरे में चली गई।

वो रो रहा था। अजीब सा मुँह बना कर। जैसे भीतर के सैलाब को दबाने दबाने की जद्दोजहद कर रहा हो। राधिका ने उसे कभी रोते हुए नही देखा था। आज पहली बार देखा न जाने क्यों दिल को कुछ सुकून सा मिला।

मग़र ज्यादा भावुक नही हुई।

सधे अंदाज में बोली "इतनी फिक्र थी तो क्यों दिया तलाक?"

"मैंने नही तलाक तुमने दिया"

"दस्तखत तो तुमने भी किए"

"माफी नही माँग सकते थे?"

"मौका कब दिया तुम्हारे घर वालों ने। जब भी फोन किया काट दिया।"

"घर भी आ सकते थे"?

"हिम्मत नही थी?"

राधिका की माँ आ गई। वो उसका हाथ पकड़ कर बाहर ले गई। "अब क्यों मुँह लग रही है इसके? अब तो रिश्ता भी खत्म हो गया"

मां-बेटी बाहर बरामदे में सोफे पर बैठकर गाड़ी का इंतजार करने लगी।
राधिका के भीतर भी कुछ टूट रहा था। दिल बैठा जा रहा था। वो सुन्न सी पड़ती जा रही थी। जिस सोफे पर बैठी थी उसे गौर से देखने लगी। कैसे कैसे बचत कर के उसने और नवीन ने वो सोफा खरीदा था। पूरे शहर में घूमी तब यह पसन्द आया था।"

फिर उसकी नजर सामने तुलसी के सूखे पौधे पर गई। कितनी शिद्दत से देखभाल किया करती थी। उसके साथ तुलसी भी घर छोड़ गई।

घबराहट और बढ़ी तो वह फिर से उठ कर भीतर चली गई। माँ ने पीछे से पुकारा मग़र उसने अनसुना कर दिया। नवीन बेड पर उल्टे मुंह पड़ा था। एक बार तो उसे दया आई उस पर। मग़र वह जानती थी कि अब तो सब कुछ खत्म हो चुका है इसलिए उसे भावुक नही होना है।

उसने सरसरी नजर से कमरे को देखा। अस्त व्यस्त हो गया है पूरा कमरा। कहीं कंही तो मकड़ी के जाले झूल रहे हैं।

कितनी नफरत थी उसे मकड़ी के जालों से?

फिर उसकी नजर चारों और लगी उन फोटो पर गई जिनमे वो नवीन से लिपट कर मुस्करा रही थी।
कितने सुनहरे दिन थे वो।

इतने में माँ फिर आ गई। हाथ पकड़ कर फिर उसे बाहर ले गई।

बाहर गाड़ी आ गई थी। सामान गाड़ी में डाला जा रहा था। राधिका सुन सी बैठी थी। नवीन गाड़ी की आवाज सुनकर बाहर आ गया।
अचानक नवीन कान पकड़ कर घुटनो के बल बैठ गया।
बोला--" मत जाओ,,, माफ कर दो"
शायद यही वो शब्द थे जिन्हें सुनने के लिए चार साल से तड़प रही थी। सब्र के सारे बांध एक साथ टूट गए। राधिका ने कोर्ट के फैसले का कागज निकाला और फाड़ दिया ।
और मां कुछ कहती उससे पहले ही लिपट गई नवीन से। साथ मे दोनो बुरी तरह रोते जा रहे थे।
दूर खड़ी राधिका की माँ समझ गई कि
कोर्ट का आदेश दिलों के सामने कागज से ज्यादा कुछ नही।
काश उनको पहले मिलने दिया होता?

14/03/2020
 #जब तक शिक्षित नही होगे तब तक आपका अधिकार कोई और छीनता रहेगा। 🤔
31/01/2020

#जब तक शिक्षित नही होगे तब तक आपका अधिकार कोई और छीनता रहेगा। 🤔

अपने ऊपर फैंके गये तेजाब की पीड़ा को झेला है और उस पीड़ा को भुलाकर अपनी सेल्फी ली है ये सेल्फी दुनिया की सबसे खूबसूरत से...
16/01/2020

अपने ऊपर फैंके गये तेजाब की पीड़ा को झेला है और उस पीड़ा को भुलाकर अपनी सेल्फी ली है ये सेल्फी दुनिया की सबसे खूबसूरत सेल्फियों में से एक है।
सचमुच ये दुनिया की खूबसूरत महिलाओं मे से है इनके साहस जज्बे को सलाम जिन्होंने भयानक हादसे के बाद भी अपनी ज़िन्दगी को बनाया

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