28/08/2025
बहुत वक़्त से तू क्यों मुखातिब नहीं हुआ खुद से
मुझे अपनी परेशानियां बता मैं पूछ रहा हूँ तुझसे
क्या हो गया है तुझको अब कहाँ खो गया है तू
तू तो वो है जो मशविरा करता था अक्सर खुदसे
तुझमें जो जिंदादिल इंसान है बस उससे बातें कर
खुदरा सिक्का भी चलता है मैंने अक्सर कहा है तुझसे
कभी शौक नहीं रहा तेरा किसी पर उंगली उठाये तू
भला और भी अच्छा कौन जानता है तुझे मुझसे
तू अपने किरदार में आ और बस अपना रस्ता चल
क्या किया है तूने ये ज़माना है हमेशा पूछेगा तुझसे
जीत देओल