16/06/2024
वो पालक है वो पोषक है
वो ईश्वर के तुल्य है
उसका मोल नहीं हो सकता
पिता बहुत अमुल्य है ।
तेरा पहला वो मित्र है
दुर्गंध में वो इत्र है
उसके दिल में बनता है जो
वो तेरा ही चित्र है ।
अंधियारे को दूर भगाती
वो सुबह की धूप है
इस धरतीं पर तेरे लिये
वो ईश्वर का रूप है ।
दिन है चाहे रात है
हर पल तेरे साथ है
गिर नहीं सकता तू बंदे
उसने थामा तेरा हाथ है ।
उसने थामा तेरा हाथ है ।।