28/09/2026
गजलक्ष्मी व्रत (जिसे हाथी पूजा या महालक्ष्मी व्रत भी कहा जाता है) भाद्रपद शुक्ल अष्टमी से शुरू होकर आश्विन कृष्ण अष्टमी (पितृ पक्ष की अष्टमी) तक मनाया जाने वाला 16 दिनों का अत्यंत पवित्र व्रत है। इस दिन हाथी पर सवार माँ लक्ष्मी (गजलक्ष्मी) के रूप की विशेष पूजा की जाती है।
व्रत का महत्व
वैभव और समृद्धि: मान्यता है कि इस दिन गजलक्ष्मी की पूजा करने से दरिद्रता दूर होती है और घर में सुख-समृद्धि आती है।
सोना खरीदने का शुभ दिन: पितृ पक्ष के दौरान मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं, लेकिन गजलक्ष्मी अष्टमी का दिन अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन सोना या चांदी खरीदना बेहद फलदायी माना जाता है।
पौराणिक कथा (कुंती और अर्जुन): मान्यता है कि महाभारत काल में माता कुंती ने महालक्ष्मी व्रत के लिए अर्जुन से इंद्रलोक के ऐरावत हाथी को धरती पर बुलवाया था और उसकी पूजा की थी।पूजा सामग्री
मिट्टी, चांदी या धातु का हाथी (ऐरावत का प्रतीक)
माँ लक्ष्मी की मूर्ति या चित्�