23/01/2026
मैं रोया परदेस में भीगा माँ का प्यार
दुःख ने दुःख से बात की बिन चिट्ठी बिन तार
सीधा सादा डाकिया जादू करे महान
एक ही थैले में भरे आँसू और मुस्कान
बच्चा बोला देख कर मस्जिद आली-शान
अल्लाह तेरे एक को इतना बड़ा मकान
अन्दर मूरत पर चढ़े घी, पूरी, मिष्टान
मंदिर के बाहर खड़ा, ईश्वर माँगे दान।
मुझ जैसा इक आदमी मेरा ही हमनाम
उल्टा सीधा वो चले मुझे करे बद-नाम
लेकर तन के नाप को घूमे बस्ती गाँव
हर चादर के फेर से बाहर निकले पाँव.
सातों दिन भगवान के क्या मंगल क्या पीर
जिस दिन सोए देर तक भूखा रहे फ़कीर
अच्छी संगत बैठ कर, संगी बदले रूप
जैसे मिल कर आम से, मीठी हो गई धूप
छोटा कर के देखिए जीवन का विस्तार
आंखों भर आकाश है, बाहों भर संसार
रस्ते को भी दोष दे, आँखें भी कर लाल
चप्पल में जो कील है, पहले उसे निकाल