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चाचा की लंगोट में मस्ती का खजानानमस्कार मित्रों, मेरी इस सच्ची कहानी में आपका स्वागत है. मुझे लड़कों में शुरू से दिलचस्पी...
19/05/2026

चाचा की लंगोट में मस्ती का खजाना

नमस्कार मित्रों, मेरी इस सच्ची कहानी में आपका स्वागत है. मुझे लड़कों में शुरू से दिलचस्पी थी. पर यह पता नहीं था कि मैं गे हूं। एक बार मेरे चाचा हमारे घर आये तो उनको लंगोट पहने देख मेरे दिल में कुछ कुछ हुआ.

नमस्ते दोस्तो, कैसे हो आप लोग?
मैं नक्श एक बार फिर से हाजिर हूं एक नयी कहानी के साथ।
मगर शुरूआत करने से पहले मैं आप सभी पाठकों का दिल से शुक्रिया करता हूं कि आप लोगों की ओर से मुझे इतना प्यार मिला है.

यहाँ से मुझे कुछ ऐसे दोस्त भी मिले यहाँ से जिन्होंने अपने किस्से साँझा किये मेरे साथ!
उन्हीं में से एक घटना मैं आपको बता रहा हूँ।

अब मैं कहानी पर आता हूं उसी दोस्त के शब्दों में!

मेरा नाम रोनी है.
यह बात तब की है जब मैं 12वीं में पढ़ता था। मुझे वैसे तो लड़कों में शुरू से ही दिलचस्पी थी. पर यह पता नहीं था कि मैं गे हूं।
और मुझे मर्द लोग बहुत पसंद थे।

एक दिन मेरे घर एक दूर के रिश्ते के पापा के कजिन भाई आये।
पापा के भाई यानि चाचा जी।

उनकी उम्र रही होगी 28 साल के लगभग।
तब मैं था 19 साल का … बिल्कुल अपनी जवानी की शुरुआत में।

मैं इन चाचा जी से पहले कभी नहीं मिला था।

उस दिन जब वे आये तब हमारे एक रिश्तेदार के घर शादी थी जो हमारे ही शहर में थी।
घर के सभी लोग वहीं शादी अटेंड करने गए थे।

मैं और चाचा जी भी गए. पर रात को हम लोग खाना खाकर वापस आ गए।
जबकि मम्मी और पापा वहीं शादी में रुक गए थे।

घर पहुँच कर हमने कपड़ बदल लिए।
चाचा जी ने लुंगी और बनियान पहनी और बाहर आँगन में चारपाई पे सोने की तैयारी करने लगे।

उनके शरीर पर काफी बाल थे. मैंने पहली बार उनकी बॉडी देखी. और मैंने देखा कि उन्होंने गाँव वाली चड्डी पहन रखी थी। वो एक लंगोट थी।
मुझे आशा है कि आप सभी जानते होंगे कि लंगोट क्या होती है.
पर मैं तब नहीं जानता था।

मैंने चाचा जी से पूछा- चाचा जी, यह कैसी अंडरवियर है आपकी?
चाचा जी हंस दिए, बोले- यह रियल इंडियन अंडरवियर है.
और उन्होंने अपनी लुंगी हटा कर अपनी लंगोट दिखाई.

लंगोट के अंदर कसे हुए चाचा जी के लं* को देखकर तो मैं मस्ती में भर गया।

चाचा का लंगोट में कसा लं* देखकर मेरी तो लार ही टपक पड़ी थी।
मेरा मन कर रहा था कि मैं उसे छूकर देखूँ एक बार और प्यार कर के देखूँ।

लंगोट से बाहर चाचा की झांटें दिख रही थी।

मैंने चाचा जी से कहा- मैंने आज तक लंगोट कभी नहीं पहना है।

चाचा जी ने पूछा- तुम कैसी अंडरवियर पहनते हो?
तो मैंने उन्हें बताया- फ्रेंची।
मैंने शॉर्ट्स पहन रखी थी।

चाचा ने मुझसे पूछा- क्या तुम लंगोट पहन कर देखना चाहोगे?
तो मैंने कहा- हाँ जी ज़रूर!

चाचा अपने बैग से एक साफ़ लंगोट लेकर आये।
वो हरे रंग की एक लंगोट थी।

मैंने अपनी शॉर्ट्स उतार दी।
और उन्होंने मेरी अंडरवियर के ऊपर से ही मेरे को लंगोट पहनाई.

जब वो मुझे लंगोट पहना रहे थे तो मैं थोड़ा एक्साइट हो गया था.
जिसे चाचा जी ने महसूस किया पर कुछ कहा नहीं; और उन्होंने इसे नार्मल लिया।

फिर चाचा जी ने कहा- अब जाकर बाथरूम में खुद ट्राई करो और केवल लंगोट पहन कर दिखाओ.
मैं बाथरूम में गया और अपनी अंडरवियर उतार कर लंगोट पहन ली।

लंगोट मुझे बहुत ही सेक्सी लग रही थी।
मेरा लं* पूरा खड़ा हो गया था इसे पहनते हुए।

इसीलिए थोड़ी देर बाथरूम में खुद को नार्मल किया और फिर बाहर आया।
फिर मैं बनियान और लंगोट पहन कर बाथरूम से बाहर आया.
मुझे बहुत शर्म भी आ रही थी।

चाचा जी मुझे देखकर हंस दिए, कहने लगे- बहुत सुन्दर लग रहे हो।

मैंने चाचा जी से पूछा- क्या मैं इस लंगोट को अपने पास रख लूं?
चाचा जी ने कहा- ठीक है, यह लंगोट मेरी तरफ से तुम्हें गिफ्ट। अब रात हो गयी है और चलो सो जाओ।

मैंने कहा- चाचा जी, आप मेरे कमरे में ही आकर सो जाइये। वैसे भी आज मम्मी पापा रात को आने वाले नहीं।
तो चाचा जी ने कहा- ठीक है.
और वो और मैं मेरे पापा के कमरे में सोने के लिए आ गए क्योंकि उस कमरे में डबल बेड था.

मैंने चाचा जी से कहा- क्या मैं लंगोट में ही सो जाऊं?
चाचा जी ने कहा- हां सो जाओ।

मैंने पूछा- कहीं रात को लंगोट खुल गयी तो?
तो चाचा जी ने कहा- नहीं खुलेगी. चिंता मत करो.

चाचा लुंगी पहने हुए थे और बनियान!

फिर हम दोनों ने कमरे की लाइट ऑफ की और नाईट बल्ब जला लिया।
चाचा जी मेरे बगल में सोये हुए थे। वे जल्दी ही सो गए।

पर मुझे नींद नहीं आ रही थी … एक तो लंगोट पहन रखी थी। ऊपर से मुझे चाचा जी बहुत सेक्सी लग रहे थे। खासकर जबसे मैंने उनकी लंगोट में कसे हुए लं* की झांटें देख ली थी.

मुझसे रहा नहीं गया तो मैं उठा और चाचा जी की लुंगी की तरफ देखा।
मैंने धीरे से उनकी लुंगी हटाई तो उनकी लाल लंगोट में कसा लं* मेरे सामने दिख गया.

मैंने डरते हुए धीरे से अपना हाथ उनके लंगोट के ऊपर रखकर उनके लं* को छुआ।
मेरा दिल बहुत तेज धड़क रहा था.

फिर मैंने धीरे से चाचा जी की लुंगी की गाँठ खोल दी।
उनकी लुंगी उनके कमर से सरक कर नीचे गिर गयी।

अब चाचा जी सिर्फ लंगोट और बनियान में थे।
ठीक मेरी तरह।

मेरा लं* पूरा खड़ा हो चुका था. मेरा दिल मेरे काबू में नहीं था।
मैं जानता था कि मैं गलत कर रहा हूं पर फिर भी मैं करता जा रहा था।

मैंने चाचा जी के लं* को लंगोट के ऊपर से ही दबाना शुरू कर दिया.

थोड़ी ही देर में चाचा जी का लं* तन गया.
मुझे पता नहीं था कि चाचा जी सोये हुए है या सोने का नाटक कर रहे थे; पर उनकी आँखें बंद थी.

अब चाचा जी का लं* भी खड़ा था और उनकी लंगोट उनके लं* को पूरा नहीं संभाल पा रही थी।

उनके खड़े लं* को देखकर मुझसे रहा नहीं गया. मैं अपने होंठों को उनके लंगोट के पास ले गया।
और मैंने उनके लं* को लंगोट के साथ ही मुँह में ले लिया.

अब तक चाचा जी भी उठ गए थे पर अब वो भी उत्तेजित थे।
उन्होंने अपनी लंगोट खोल दी और उन्होंने अपना फनफनाया लं* मेरे मुँह में पूरा दे दिया.

मैं बेतहाशा उसे चूसने लगा. उनका लं* काफी मोटा था … लगभग 7 इंच लम्बा रहा होगा।

चाचा जी मेरे बालों में अपना हाथ फेरने लगे और अपने दूसरे हाथ से मेरे शरीर को सहलाने लगे। वो मेरे बूब्स को सहलाते हुए नीचे की ओर बढ़ने लगे।

वो मेरे लंगोट में खड़े लं* को भी सहलाने लगे। उन्होंने मेरी लंगोट भी खोल दी और मेरी गां*सहलाने लगे।

मैं चाचा का लं* चूसे जा रहा था.

एक बार मैंने उनके लं* की पूरी चमड़ी नीचे खींची ओर उसके गुलाबी सुपारे को प्यार से देखा और फिर जीभ से उसे चाटने लगा.
फिर से मैंने चाचा जी का पूरा लं* मुँह में ले लिया और जोर जोर से चूसने लगा.

चाचा जी भी अब आज मेरी कमसिन जवानी का मजा ले रहे थे.
सच बताऊं … उस दिन मैंने अपनी लाइफ में पहला लौड़ा चूसा था.

पर चाचा जी का लं* मुझे इतना टेस्टी लगा रहा था कि क्या बताऊं!
लं* मुँह से निकालने का मन ही नहीं कर रहा था।

चाचा जी अब धीरे धीरे मेरी गां*को तैयार कर रहे थे.

उन्होंने अपने थूक से मेरी गां*को पूरा गीला कर दिया था।
वे अपनी उंगली से धीरे धीरे मेरी गां*को चोदने लगे।

चाचा जितना अपनी उंगली मेरी गां*के अंदर डालते … उतना ही मैं उनका लं* मुँह में निगल रहा था।
काफी देर तक लं* चूसने के बाद उन्होंने मुझे अपने ऊपर लिटा लिया.

उन्होने अपनी बनियान उतार दी और मेरी भी उतार दी.
हम दोनों नंगे होकर एक दूसरे से चिपक गए.

मैं अपने लं* से उनके लं* को दबाने लगा. उनकी हेयरी बॉडी मेरे पूरे शरीर से रगड़ खा रही थी तो मुझे बहुत अच्छा लग रहा था।
इस तरह उनके बॉडी से अपने आपको रगड़ना साथ में मेरा लं* भी उनके लं* से रगड़ रहा था.

फिर थोड़ी देर तक यों ही एक दूसरे के ऊपर लेटे रहने के बाद चाचा जी ने मुझे अपने नीचे ले लिया.
उन्होंने मुझे बिस्तर पे उल्टा लिटा दिया और मेरी दोनों टांगें चौड़ी कर दी।

चाचा ने एक बार फिर अपने फनफनाये लं* पे थूक लगाया; वे मेरी गां*पे अपना लं* रगड़ने लगे और धीरे धीरे लं* गां*में घुसाने लगे।

मैं इतना उत्तेजित था कि गां*उचका उचका कर चाचा जी की मदद करने लगा अपनी गां*मरवाने में!

चाचा जी बहुत अनुभवी थे.
वे धीरे धीरे मेरे गां*में अपना लं* डाल रहे थे. जब भी मुझे दर्द होता तो वे रुक जाते और थोड़ी देर बाद फिर थोड़ा और लं* अंदर घुसाते।

इस तरह धीरे धीरे उन्होंने अपना पूरा लं* मेरी गां*में डाल दिया.
मुझे विश्वास नहीं हो रहा था कि मेरी गां*में इतना मोटा और लम्बा लं* पूरा अंदर घुस गया था.

वैसे मुझे लगता है कि 19 साल में गां*इतने बड़े लं* लेने के लिए तैयार हो जाती है; बस थोड़ा दर्द सहने की ज़रूरत है.
और उस रात मेरे अंदर दर्द सहने की पूरी ताकत आ गयी थी.

मैं अपनी जवानी चाचा जी के सेक्सी लंगोट पे लुटा देने को तैयार था.
आज मैं पूरा चुद कर जवान होना चाहता था.

चाचा जी ने अब मुझे धीरे धीरे चोदना शुरू कर दिया.
अब वे मुझे चूम भी रहे थे; मेरे गालों को चाट चाट के पूरा गीला कर दिया था; मेरी चूची मसल मसल कर लाल कर दिया।

वो जब भी मेरी बूब्स दबाते तो मैं और खुश हो जाता। मैं और उचक उचक कर उनका लं* अपनी गां*में लेता।
सच कहूँ तो दर्द के साथ मुझे मजा भी बहुत आ रहा था।

चाचा जी भी मुझे पूरा लड़की समझ कर चोदे जा रहे थे.
और मैं चुदवाता जा रहा था।

काफी देर के बाद चाचा जी ने मेरी गां*में ही अपना माल निकाल दिया।
चाचा जी के गर्म गर्म वीर्य से मेरी गां*भर गयी।

मुझे एक अलग ही अहसास हो रहा था जब उनका माल मेरी गां*में उतार रहा था।

उनकी चुदाई से मैं भी बिस्तर पे ही झड़ गया.

थोड़ी देर तक चाचा जी मेरे ऊपर ऐसे ही लेटे रहे। उनका लं* मेरी गां*में ही था।

फिर बाद में उन्होंने मेरी गां*से अपना लं* निकाला और मुझे सीने से लगा लिया.
मैं भी उनके बालों भरे जिस्म से चिपक गया.

चाचा मेरे नंगे बदन को सहलाते रहे. और ज्यादातर मेरी गां*को सहला रहे थे.

पता नहीं कब मुझे नींद आ गयी.

सुबह जब मेरी आँख खुली तो देखा कि मैं बिस्तर पे नंगा सो रहा था.
चाचा जी शायद बाथरूम में नहा रहे थे।

मैंने अपनी शॉर्ट्स उठायी और पहन ली और बनियान भी पहन ली।

तभी दरवाजे की घण्टी बजी.
मम्मी पापा घर वापस आ गए थे.

चाचा जी नहा कर बाहर आ गए.

मम्मी नाश्ता बनाने लगी।

पापा ने चाचा जी और मुझसे पूछा- और रात कैसी रही? आराम से सोये या नहीं?
चाचा जी ने मेरी तरफ देखा और मुस्कुरा कर कहा- हाँ रात बहुत अच्छी रही।

मैं शर्मा रहा था. मैं बाथरूम में चला गया नहाने को!

तो यह थी कहानी मेरी और मेरे सेक्सी चाचा जी की.

उसके बाद चाचा जी अक्सर हमारे घर आने लगे और हमने कई बार सेक्स किया।

बाद में जब उनकी शादी हो गयी तब उनका मेरे से मिलना काम हो गया.
पर अब भी जब वो आते हैं, मैं उनसे अपने मन की सारी बातें बताता हूँ।
और वो अभी भी मेरे सबसे अच्छे दोस्त और सेक्स पार्टनर भी हैं।

तो दोस्तो … यह थी कहानी रोनी और उसके चाचा जी की। मुझे आपके कमैंट्स का इंतज़ार रहेगा.

.ट्रेन में गां*मरवाने की इच्छा पूरी कीनमस्कार मित्रों, मेरा नाम संजय सिंह है. मेरी उम्र 32 साल, लुधियाना पंजाब का रहना व...
18/05/2026

.ट्रेन में गां*मरवाने की इच्छा पूरी की

नमस्कार मित्रों, मेरा नाम संजय सिंह है. मेरी उम्र 32 साल, लुधियाना पंजाब का रहना वाला हूँ. मैंने इस साईट पर बहुत सी सेक्स स्टोरीज पढ़ी हैं. सेक्स स्टोरी पढ़ कर मुझे लगा कि मुझे भी अपना एक्सपीरियेन्स शेयर करना चाहिए.

वैसे तो मेरी शादी हो चुकी है और मेरी वाइफ भी मुझसे बहुत खुश है. हमारी सेक्स लाइफ भी अच्छी है. हम तकरीबन एक या दो दिन बाद सेक्स कर लेते हैं. हम दोनों एक दूसरे से सॅटिस्फाइड हैं. पर न जाने क्यों अब भी मुझे एक अलग सी चाहत रहती है … मेरी वो चाहत है लं* की चाहत … जी हां फ्रेंड्स, मुझे लं* लेने की बड़ी चाहत रहती है.

शादी से पहले मैंने अपने एक फ्रेंड के साथ गे सेक्स किया था. लेकिन शादी के बाद मैंने कभी ऐसा नहीं किया. मेरी इच्छा तो बहुत होती है, लेकिन बदनामी के डर से मैं किसी का भी लं* नहीं ले सकता. बस जब भी चाहत होती है, टॉयलेट में जाकर फिंगर्स से काम चला लेता हूँ. लेकिन अभी कुछ दिन पहले मेरी लं* लेने की इच्छा अनायास ही पूरी हो गई.

एक दिन मुझे ऑफिस के काम की वजह से न्यू देल्ही जाना था. वहां पर मुझे 11 बजे तक पहुंचना था. इसलिए मैंने सुबह 3:30 वाली गाड़ी से जाना बेहतर समझा. ठीक वक़्त पर मैं स्टेशन पहुंच गया. गाड़ी आई और मैं जनरल डिब्बे में चढ़ गया. डिब्बे में बिल्कुल भी भीड़ नहीं थी. और लगभग सारे यात्री अपनी अपनी सीट पर बैठे या अधलेटे सो रहे थे.

मैंने सोचा कि चलो क्यों इनको डिस्टर्ब किया जाए. उस दिन गर्मी भी बहुत थी. इसलिए मैं गेट के पास ही खड़ा हो गया. थोड़ी देर में गाड़ी चल पड़ी. गाड़ी ने थोड़ा मोशन पकड़ा ही था कि मैंने देखा एक लड़का ट्रेन की ओर भागा आ रहा था. उसके पास एक भारी बैग भी था. डिब्बे के पास आकर उसने अपना बैग मेरी ओर कर दिया. मैंने देर ना करते हुए उसका बैग पकड़ कर अन्दर रखा और जल्दी से उसका हाथ पकड़ने के लिए अपना हाथ बाहर निकाला. उसने मेरा हाथ पकड़ा और जंप करके गाड़ी में आ गया. अन्दर आकर वो मुझे थैंक्स बोलने लगा.

मैंने कहा- अरे ठीक है ये तो मेरा फर्ज था … इट’स ओके.
वो अपनी सांसें सयंमित करने लगा.
मैंने उससे पूछा- तुमको कहां जाना है?
तो वो बोला- मुझे आगरा जाना है.

फिर हम दोनों इधर उधर की बातें करने लगे. वो एक बड़ा ही हैंडसम लड़का था. उसकी हाइट तकरीबन 5 फुट 7 इंच रही होगी. उसे देख कर लगता था कि वो जिम करता होगा. क्योंकि उसकी बॉडी देखने में पूरी फिट लग रही थी. लेकिन वो एक ग़रीब परिवार का लड़का था. मैंने ये अंदाज ऐसे लगाया क्योंकि उसके पास कोई एंड्राय्ड फोन नहीं था. मेरा अंदाज सही भी निकला.

कुछ देर उसे देखने के बाद मेरी दबी हुई अभिलाषा फिर से जागृत हो गई और उसे देख कर मेरी चाहत मुझे काण्ड कर देने पर आतुर कर देने लगी. लेकिन मुझे ये चिंता थी कि इसके साथ अगर करवाने की कोशिश भी करूँ तो कहां काम उठवाऊं. एक ही जगह थी टॉयलेट … टॉयलेट की सोचते ही मेरी गां*में कीड़ा कुलबुलाने लगा. मेरे दिमाग़ की बत्ती जलने बुझने लगी.

मैंने उससे बात करनी शुरू कर दी. पहले तो मैं उससे नॉर्मल बातें करने लगा. लेकिन बाद में अपनी चालाकी से उसे सेक्सी बातों पे ले आया. बात करते करते मैं उसे उसकी सेक्स लाइफ के बारे में पूछने लग गया. साथ ही अपनी भी बता दी. अभी सुबह के 4:15 हुए थे. सारे यात्री सोए हुए थे.

मैंने मौका हाथ से निकल जाने देना ठीक नहीं समझा और बातों बातों में उसे अपने मन की इच्छा बता दी. वो तो जैसे भूखा ही था. उसने झट से मेरी गां*को पकड़ कर दबा दिया. उसकी इस हरकत से मुझे बहुत उत्तेजना महसूस हुआ.

वो बोला- मैं तैयार हूँ, पर हम सेक्स कहां करें.
मैंने कहा कि मेरे पास एक आइडिया हैं.
वो बोला- क्या?
मैं बोला कि मैं अभी टॉयलेट में जा रहा हूँ, तुम थोड़ी देर बाद टॉयलेट में आ जाना. क्योंकि अभी सभी लोग सो रहे थे इसीलिए किसी को पता भी नहीं चलेगा.

वो मेरी इस बात से खुश हो गया. मैं इधर उधर देख कर टॉयलेट में घुस गया. थोड़ी देर बाद वो भी टॉयलेट में आ गया.
मैंने उससे पूछा कि उसको किसी ने देखा तो नहीं?
तो वो बोला कि अभी किसी को पता नहीं चला.

अन्दर आते ही उसने मुझे अपने साथ जकड़ लिया. मैं भी उसकी बांहों में आकर खुश हो गया. पहले तो उसने मेरे लिप्स को चूसना शुरू कर दिया. मैं भी एग्ज़ाइटेड हो कर उसका साथ देने लगा. वाइफ के साथ लिप किस बहुत बार की थी. लेकिन ये फर्स्ट टाइम था जब मैं किसी लड़के के साथ लिप किस कर रहा था. मुझे ये बहुत अच्छा लग रहा था. वो लिप किस करने के साथ साथ मेरी गां*को मसल रहा था.

करीब 10 मिनट लिप किस के बाद हम अलग हो गए. मैं अपने घुटनों के बल उसके सामने बैठ गया. उसने अपनी पेंट को खोल कर नीचे किया. फिर अंडरवियर को नीचे करते ही उसका 7 इंच का फनफनाता हुआ लं* मेरे सामने आ गया.

मेरा तो जैसे रोम रोम ही खिल गया. मैंने उसके लं* को पकड़ा और उसके सुपारे को किस किया. उसने लं* मेरे मुँह में देने का इशारा किया, तो मैंने उसके लं* को मुँह में भर लिया.

क्या बताऊं. … उसके लं* का स्वाद तो मुझे जैसे पागल ही कर रहा था. मैं कभी उसके गुलाबी सुपारे को जीभ से चाटता और कभी उसका पूरा लं* अपने मुँह में उतार लेता.

वो भी आंख बंद करके लं* चुसवाने का पूरा मजा ले रहा था. मैंने करीब दस मिनट तक उसका लं* पूरी तबियत से चूसा. मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे मैं सातवें आसमान पर पहुंच गया हूँ. फिर उसने मुझे खड़ा किया और मेरी पैन्ट खोल दी. मेरे लं* को थोड़ा हिलाने के बाद उसने मुझे घुमा दिया और झुकने को बोला.

मैं उसके सामने झुक कर खड़ा हो गया. और मैंने खिड़की का सहारा ले लिया. उसने मेरे चूतड़ों को फैलाया और मेरी गां*को चाटने लगा. कुछ देर गां*चाटने के बाद उसने अपने लं* का सुपारा मेरी गां*के फूल पर टिका कर एक हल्का सा शॉट दे मारा.

लं* की चाहत होने के कारण मैं अपनी गां*में दो या तीन तीन उंगली डाल लेता था … जिस वजह से मेरी गां*खुल चुकी थी. जैसे ही उसने हल्का शॉट मारा, उसका सुपारा मेरी गां*में घुस गया. एक तो उंगली डालने वजह से मेरी गां*थोड़ी खुली हुई थी और दूसरा उसने चाट के उससे गीला कर दिया था. इसीलिए उसके लं* के अन्दर जाने की मुझे कोई ख़ास तकलीफ़ ना हुई. साथ ही मज़ा भी बहुत आया. ऐसा लगा कि खुजली मिटाने की यंत्र अन्दर घुस गया हो.

फिर उसने एक और शॉट लगाया और अपना पूरा लं* मेरे अन्दर कर दिया. मैं तो मजे के कारण मरा जा रहा था. फिर उसने अपने लं* को आगे पीछे करना शुरू कर दिया. मुझे इतना मजा आ रहा था कि मैं उसे बयान नहीं कर सकता.

करीब 15 मिनट तक उसने मेरी चुदाई की और बाद में वो मेरी गां*में ही झड़ गया. उसके साथ मेरा भी पानी निकल गया. आज मेरी लं* लेने की चाहत पूरी हो गई थी. इसीलिए मैं बहुत खुश था.

गां*मराने के चक्कर में काफी समय हो गया था. मैंने टाइम देखा तो 5 बज गए थे. मैं धीरे धीरे टॉयलेट से बाहर निकला. थोड़ी देर बाद वो भी बाहर आ गया. इतने में स्टेशन आया, तो मैं बदनामी के डर से उस डिब्बे से उतर गया और उस लड़के से आंख बचा कर दूसरे डिब्बे में चढ़ गया. इस तरह मेरी लं* की चाहत भी पूरी हो गई और खुद लं* देने वाले को मेरे बारे में पता नहीं चला.

तो फ्रेंड्स मेरी ये सच्ची घटना आपको कैसी लगी, प्लीज़ मुझे कमेंट करके जरूर बताना. यह मेरी पहली गे सेक्स स्टोरी है, इसलिए इसमें मुझसे ग़लतियां भी बहुत हुई होंगी. सो प्लीज़ मुझे माफ़ कर देना. धन्यवाद.

गां*मारने की बजाए खुद की मरवा आयाहिंदी गां*चुदाई स्टोरी में पढ़ें कि मैं सेक्स करना चाहता था. कोई चूत ना मिली तो मैंने एक...
18/05/2026

गां*मारने की बजाए खुद की मरवा आया

हिंदी गां*चुदाई स्टोरी में पढ़ें कि मैं सेक्स करना चाहता था. कोई चूत ना मिली तो मैंने एक लड़के को गां*मरवाने के लिए पटाया. मैं उसकी गां*मारने उसके घर गया तो …

नमस्ते दोस्तों! मेरा नाम आदि है यह मेरी अपनी कहानी है। मैं भोपाल का रहने वाला हूं मेरी उम्र 21 वर्ष है। मैं दिखने में गोरा और पतला हूँ और मेरा लं* 6 इंच का है। तो दोस्तो, हिंदी गां*स्टोरी पर आते है। हुआ यों कि सेक्स की लालसा में पोर्न देखते देखते एक बार गे पोर्न विडियो खुल गई।

उस मूवी में एक लड़का उलटा लेटा हुआ था; दूसरा उसकी गां*पर लं* लगाए हुए उस को पेल रहा था. तब मेरा भी मन हुआ कि क्यों ना किसी लड़के की गां*मारी जाए. वैसे तब तक मैंने कभी चुदाई नहीं की थी।

इसीलिए मैंने फेसबुक पर एक फेक अकाउंट बनाया और ऐसे लड़कों की तलाश करन लगा जो अपनी गां*मरवाते थे।

इसी बीच मेरी कई लड़कों से बात हुई.
लेकिन उनमें से कोई ऐसा साहसी ही नहीं निकला जो मुझसे मिल सके और आगे का काम कर सके.

फिर एक दिन ढूंढते ढूंढते मुझे राहुल नाम का एक लड़का मिला।
उसकी उम्र 30 साल थी.

धीरे-धीरे उससे बात शुरू हुई तो मालूम चला कि उसे गां*मरवाने में मजा आता है।

उसने बताया कि उसने पहले भी अपनी गां*मरवाई है.

फिर मैंने 1 दिन हिम्मत करके उससे मिलने को कहा.
यह मेरा पहला अनुभव था कि मैं किसी से इस तरह मिलने जा रहा था.

मेरे मन में एक डर भी था परंतु मैंने मन बना लिया था कि राहुल से मैं मिलूंगा।

राहुल ने बताया कि वह रूम लेकर अकेला रहता है तथा शाम को मुझसे मिल सकता है.

उन दिनों दिसंबर की ठंड ने मुझे और उत्तेजित कर दिया।

मैं पैदल ही निकल गया. उसका रूम पास में ही था.

जैसे ही मैं उसके दिए पते पर पहुंचा, मैंने उसको फोन लगाया.

वह खिड़की से झांक कर मुझे ही देख रहा था.
उसकी नजरों ने मुझे पहचान लिया तथा मेरे उभरे हुए जींस से उसे पता चल गया कि मैं ही वह प्यासा हूँ.

उसने मुझे खिड़की से ही आवाज देकर ऊपर बुलाया.

यह मेरी राहुल से पहली मुलाकात थी.

दिखने में उसका गठीला बदन मुझे आमंत्रण दे रहा था.

मैं डरता डरता ऊपर गया.
उसने गेट खोला और मुझे अंदर ले लिया।

मैं खड़ा था, मेरे हाव भाव से ऐसा लग रहा था जैसे मैं गां*मारने नहीं मरवाने आया हूं।
उसने कहा- डरो मत, हम दोस्त की तरह हैं।

मैं थोड़ा शांत हो गया.
फिर उसने कहा कि चलो शुरू करते हैं।

उसने मेरी टीशर्ट उतार दी और खुद अपनी टी-शर्ट उतार दी.
मेरे हाव भाव किसी शर्मीली लड़की की तरह थे।

अब उसने अपना हाथ मेरी जींस के अंदर डाल दिया और मेरे लं* को सहलाने लगा.

मैं कामुकता से अपनी आंखें बंद करके उसका आनन्द ले रहा था।
और मैं उसके शरीर पर हाथ फिराता रहा.

मैंने भी अपना हाथ उसके लं* पर लगाया, उसका लं* एकदम कठोर हो चुका था. उसका लं* 6 का था.

मुझे उसके लं* को पकड़ना बहुत अच्छा लगा तथा मैं उसे सहलाने लगा।

वह मेरी गले पर चुंबन कर रहा था.

अब उसने अपने होंठ मेरे होंठों पर टिका दिए और मेरे और अपने सारे कपड़े उतार दिए।

मैं उतावला हो रहा था. मुझे उसका लं* बहुत पसंद आया.

मैंने उसके लं* को हाथ से पकड़ा और हिलाने लगा.

तभी एकाएक मैं नीचे झुका और उसके लं* को मुंह में ले लिया.
और मैं बहुत अच्छे से उसका लं* चूसने लगा.

यह देखकर मैं हैरान हो गया कि उसने भी मेरा सिर पकड़ कर मेरे मुख से अपने लं* की खूब मसाज करवाई.

फिर थोड़ी देर मेरे रुकने के बाद वह झुका और मेरे लं* को अपने मुंह में ले लिया.

अब मेरे विचार एकदम बदल गए थे। अब मेरी इच्छा अपनी गां*मरवाने की हो रही थी.
मैंने उससे कहा- मुझे भी अपनी गां*मरवानी है।

वह हैरान हो गया.
पर उसको इस पर कोई आपत्ति नहीं थी.

उसने मुझे बिस्तर पर पटक दिया.
मैं किसी लड़की की तरह बिस्तर पर निढाल हो गया.
और उसने पास रखी कोल्ड क्रीम उठाई और अपने लं* पर लगायी.

मैं डर रहा था.
तो मैंने उससे कहा- देख भी, मैंने माभी नहीं किया ऐसा काम … तुम आराम से करना।

उसने मुझे आश्वासन दिया कि वह आराम से करेगा.

फिर उसने अपना मुंह मेरी गां*पर लगाया और अपनी जीभ से मेरी गां*को चाटने लगा.

मुझे आनंद की अनुभूति हुई।

मैं आंखें बंद करके उसकी जीभ का मजा लेने लगा.

अब उसने अपनी उंगली पर क्रीम लगाई और मेरी गां*के अंदर उंगली डाल दी.
मेरी टाइट गां*में उंगली जैसे ही गयी, मुझे दर्द का एहसास हुआ.

मैं सहम गया लेकिन उसकी उंगली कहीं मुझे आनंद भी दे रही थी।

मैंने आंखें बंद कर ली और सिसकारियां लेने लगा. मुझे सिसकारियाँ लेते देख उसने मेरा लं* अपने मुंह में ले लिया.

अब एक तरफ वह मेरे लं* को चूस रहा था और दूसरी तरफ धीरे-धीरे अपनी उंगली मेरी गां*में अंदर बाहर कर रहा था.
शायद वह इस काम में निपुण था।

वह मेरी गां*को ढीला कर रहा था जिससे लं* के जाने पर ज्यादा दर्द ना हो।

अब उसने मेरी टांगों को अच्छे से फैलाया और उसने अपने लं* का सुपारा मेरी गां*पर रख दिया कुछ देर लं* को गां*पर सहलाने के बाद उसने अपने लं* धीरे-धीरे मेरी गां*में डालना शुरू कर दिया।

शुरुआती दौर में मुझे दर्द हुआ लेकिन लं* ने धीरे धीरे मेरी गां*में अपनी जगह बना ली थी।
थोड़ा सा लं* मेरी गां*में जा चुका था, मुझे दर्द हो रहा था. मैं सिसकारियाँ ले रहा था.

लेकिन उसके हाथ मेरे लं* को सहलाने लगे जिससे मेरा दर्द कम हो गया।

तब उसने थोड़ा सा झटका मारकर थोड़ा लं* और अंदर कर दिया।
वह अनुभवी लग रहा था इसलिए धीरे-धीरे मेरी गां*खोल रहा था.

उसका करीब आधा लं* मेरी गां*के अंदर था और मुझे दर्द हो रहा था.

तभी उसने एक तेज धक्का मारा.
मेरी तो जैसे जान ही निकल गई. मेरी तेज आवाज निकली और उसने अपना हाथ मेरे मुँह पर रख दिया.

इस अवस्था में उसका पूरा लं* मेरी गां*के अंदर था।
मुझे बहुत दर्द हो रहा था.

उसने धीरे-धीरे अंदर बाहर करना शुरू कर दिया।
मेरी एक टांग उसके कंधे पर थी और दूसरी बिस्तर पर!

कुछ देर बाद मुझे मजा आने लगा. अब मैं भी अपनी गां*को उठा उठा कर उसका साथ दे रहा था।

तभी उसने अपना लं* मेरी गां*से निकाला और मुझे घोड़ी बनने को कहा.
मैं उठा और घोड़ी बन गया.

उसने अपने अनुभव का परिचय देते हुए तकिया मेरे पेट के नीचे लगा दिया और अपने लं* पर क्रीम लगाते हुए उसने अपना लं* मेरी गां*में डाल दिया।
मुझे एक बार फिर दर्द हुआ.
लेकिन इस बार उसकी मिठास ही कुछ अलग थी।

वह मुझे पीछे से चोद रहा था और मेरी दर्द और आनन्द मिश्रित सिसकारियां निकल रही थी।

मेरी आवाज कमरे की दीवार से टकराकर मेरे कानों तक वापस आ रही थी.
साथ ही गां*और लं* की रगड़ की पाच पाच की मिली जुली आवाज मुझे और कामुक बना रही थी।

मेरी गां*में उसके लं* के झटके तेज होते गए; इतनी तेज कि मुझे दर्द होने लगा.
और इसी तेजी के साथ उसने अपना गर्म गर्म वीर्य मेरी गां*में छोड़ दिया.

उसका गर्म रस मेरे अंदर हिचकोले मार रहा था।
मैं सोच भी नहीं सकता था कि मैं वहां गां*मारने गया था पर अपनी कुंवारी गां*मरवा कर आ गया.

मुझे अपनी गां*खुली खुली महसूस हो रही थी।

इसके बाद में कई बार राहुल के पास गया और अपनी गां*मरवाई.
लेकिन अब मैं अपनी गां*मरवाने के साथ-साथ उसकी भी गां*मारने लगा.

दोस्तो, कैसी लगी आपको मेरी हिंदी गां*स्टोरी? मुझे कमेंट्स में और मेल करके बतायें.
धन्यवाद.

30/04/2026

hi

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मित्रो, मैं निहार एक बार फिर से आपके सामने अपनी गे  कहानी के साथ हाजिर हूँ.मेरी हॉट गे  कहानी के पिछले भागलं* लेने का गे...
24/03/2026

मित्रो, मैं निहार एक बार फिर से आपके सामने अपनी गे कहानी के साथ हाजिर हूँ.
मेरी हॉट गे कहानी के पिछले भाग
लं* लेने का गे वैडिंग प्लानर का सपना-2
में अब तक आपने पढ़ा था कि नैना और मेरे सामने एक समलैंगिक शादी का प्रस्ताव था.

अब आगे की हॉट गे कहानी:

आज इस नए तरीके की शादी को लेकर अपने काम में अचानक आए बदलाव से मैं कुछ असमंजस में था.

नैना भी काफी शॉक्ड लग रही थी, उसने अपने आपको संभालते हुए मेरी तरफ देखा.

और फिर कुछ सोच कर बोली- सबसे पहले तो मैं आप दोनों को शुभकामनाएं देना चाहती हूँ … और साथ ही साथ उन हजारों लोगों की तरफ से भी शुक्रिया कहना चाहती हूँ कि आप ये शादी करके समाज में अपने आस-पास के लोगों को इसके बारे में बढ़ावा दे रहे हैं. पर मैं समझ नहीं पा रही हूँ कि आप लोगों ने हमें ही क्यों चुना … और वो भी जब आप लोग खुद जानते हैं कि यहां इस तरह की शादी … और इसको लेकर जो दिक्कतें हैं … वो किस तरह की हैं.

मानवेन्द्र ने मेरी तरफ मुड़ते हुए कहा- मुझे नहीं लगता कि आपको इस तरह की शादी करवाने में कोई प्रॉब्लम होने वाली है … और मुझे इस बारे में आपकी खुराना वाली वैडिंग में मेरे कजिन से हुई मुलाकात से पता चला, जहां आपने ही इस तरह की वैडिंग की बात पर जोर दिया था.

मुझे याद आया कि खुराना की वैडिंग में मैंने एक जाट से अपनी सेवा करवाई थी. जिसके बाद में दो दिन तक ढंग से चल भी नहीं पाया था.

“खैर … आप लोगों को बजट के बारे में सोचने की कोई जरूरत नहीं है … न ही जल्दी जवाब देने की. आप दोनों आज रात हमारे गेस्ट हैं और यही हवेली में आप दोनों के कमरे भी हैं. आप दोनों आज रात हमारे साथ डिनर कीजिए और आपका जो भी जवाब होगा, आप हमें बताइएगा.”

नैना ने मेरी तरफ देखा … और मैंने नैना को देख कर अपने कंधे हिला दिए.

ऐसे मामलों में दोनों का हां करना बनता था, लेकिन मैंने नैना को ही सारी जिम्मेदारी दे रखी थी.
नैना को भी मुझ पर विश्वास था कि उसके कही किसी बात को मैं टालने वाला नहीं था.

फिर अंत में नैना ने मेरी तरफ देखा और कुछ सोच कर हामी भर ही दी.

मेरे चेहरे पर एक मुस्कराहट सी आ गयी. मैं उन दोनों के लिए खुश था कि कोई तो खुश है इस दुनिया में … और शादी भी कर ही रहे हैं.

अब शादी के लिए वेन्यू ढूंढना था, तो हमने दोनों ने आपस में आदित्य और हरप्रीत से पूछना ही बेहतर समझा.

उन्होंने हमें रेस्ट करने को कहा और कहा कि वो लंच पर हमें कुछ बताना चाहते हैं.

इसके बाद हम दोनों अपने कमरों में वापस चले गए.

मैंने होटल के एक बंदे को बुलाया. वो दिखने में काफी अच्छा लग रहा था. उससे मैंने होटल का टूर करवाने को कहा.

तो उसने मुझे होटल का अच्छा टूर दिया. होटल काफी अच्छा था … और तारीफे काबिल था.

मैं थोड़ा थक गया था, तो अपने कमरे में लौट आया. मैंने जैसे ही कमरे में एंट्री ली और दरवाजे से एंटर हुआ, किसी ने मुझे पीछे से दबोच लिया. उसने मेरी आंखों पर अपने हाथ रखे और मुझे कस के जकड़ लिया.

“आह … मानवेन्द्र तुम्हारे परफ्यूम की खुशबू बहुत अलग है. मैं तुम्हें बिना देखे भी पहचान लेता हूँ.” मैंने हंसते हुए कहा.
“पता है न … जब लोग खुशबू से पहचानने लगें, तो प्यार हो जाने का डर लगा रहता है.” मानवेन्द्र ने मेरे सामने आकर मुझे एक किस करते हुए कहा.

वैसे हमारी हाइट दोनों की लगभग बराबर ही थी, तो हम आसानी से एक दूसरे के होंठों तक पहुंच जा रहे थे.

“चुप करो … और ये प्यार-व्यार सिर्फ फिल्मों में होता है … या रोमांस की उपन्यासों में और पहले ही आपको बता दूं जनाब कि मुझे प्यार नाम के शब्द से ही नफरत है. मेरा फलसफा कुछ और ही है जनाब.” मैंने जवाब दिया.
“यानि बस मिलो, पेलो और दफा हो लो!”

मानवेन्द्र ने मेरे शर्ट के बटन खोलते हुए ही मुझे गाल पर से गर्दन तक किस करना चालू कर दिया.

“नहीं, मिलो और पेलो, पर दिल से मत खेलो … आह.” मैंने भी मानवेन्द्र की टी- शर्ट को खोलते हुए एक तरफ रखते हुए एक सिसकारी ली.

उसके होंठ बड़ी तेजी से मेरे बदन पर होते हुए मेरे निप्पलों तक आ पहुंचे थे- मुझे आज इनका दुद्दू पीना है … आह … उंह.
वो मेरे एक बोबे को पूरा मुँह में भरकर चूसने लगा.

इस समय वो अपने घुटनों को हल्का सा मोड़ कर मेरे निप्पलों को बारी बारी से चूस रहा था. उसने मुझे मेरी गां* के नीचे जांघों से पकड़ा और मेरी छाती को अपने मुँह के सामने ले आने के लिए मुझे जमीन से उठाकर गेट की तरफ ले गया.

मैंने इशारा समझते हुए गेट पर कुंडी लगायी और उसके सर को हाथों से पकड़ कर उसके मुँह को अपने सीने में दबा दिया.

अब मानवेन्द्र मुझे उठाकर बेड की तरफ ले गया और मुझे बेड पर पटक दिया. खुद अपनी पैंट से आजाद होकर उसने अपने फनफनाते लं* को अपनी चड्डी में सैट किया. इससे उसका लौड़* चड्डी की इलास्टिक में फंस कर जैसे ऑक्सीजन के लिए गुहार लगाने लगा.

फिर उसने मेरी पैंट को एक झटके में पैरों के नीचे खींचा और मुझे पैंट से अलग कर दिया. पैंट के साथ ही चड्डी को भी मानवेन्द्र ने खींच कर निकल दिया था. मुझे लगा कि जैसे वो थोड़ा गुस्से में था.

मैंने पूछा- तुम इतना अलग क्यों बर्ताव कर रहे हो … जैसे काफी वाइल्ड हो रहे हो … या गुस्से में हो!
“ऐसा कुछ नहीं है मेरी जान, मैंने बस जो कल रात को शुरू किया है, आज मैं उसी को खत्म करना चाहता हूँ. पता नहीं मेरे बॉस मुझे कब बुला लें … उससे पहले कि वो तुम्हें लंच पर बुलाएं, मैं तुम्हारा लंच करना चाहता हूँ.”

ये कहते हुए उसने मुझे उल्टा किया और मेरी गां* में अपना मुँह दे दिया.
वो बेड के नीचे बैठा था. मैं आधा बेड पर और पेट के नीचे गां* से मुड़ा हुआ उसकी जीभ को अपनी गां* में फील कर रहा था.

उसने मेरी गां* से मुँह हटाया और मेरी गां* में. ‘थू ..’ करके खूब सारा थूक डाल दिया. फिर मेरी गां* को खोल खोल कर चाटने लगा. उसकी जीभ जैसे मेरी गां* को फाड़ कर अन्दर घुस जाना चाहती थी.

उसके मुँह से जब मुझे अपनी गां* में गर्मी फील होने लगी, तो उसने मुझे चोद* शुरू कर दिया.

मैं भी पूरी तरह से खुद को उसे सौंप कर आराम से लेट गया और सिसकारियां भरने लगा. उसने अपने दोनों होंठों के बीच मेरे छेद को मुँह में भरा और उसे मेरे होंठों की तरह ही चूसने लगा.

मैंने गां* को ढीला छोड़ दिया. मेरी कुलबुलाती गां* धीरे धीरे खुलने लगी.

उसने एक उंगली अपने मुँह में डाली और उसे पूरा थूक में भिगो कर उसे मेरी गां* में डाल दिया.

‘आउच … ओह फुह ..’ करके मैं उसकी मोटी उंगली के दर्द से कराह गया.
“वाह … क्या छेद है … अन्दर से भी टाइट … कसम से इसे बड़ा करने में मुझे बड़ा मजा आएगा.”

ऐसा कहकर मुझे मेरे दर्द से जुदा करने के लिए वो फिर से मुझे मुँह से चोद* लगा.

“अहम्म … और अगर तुम इस मुँह को मेरी गां* में ही डाले रखोगे, तो मैं तुम्हें भी पूरा अन्दर ले लूंगा.” मैंने उसका जोश बढ़ाने के लिए कहा.

उसने धीरे धीरे मुँह से मेरी गां* को चाटते हुए एक उंगली कब अन्दर कर दी, मुझे पता भी नहीं चला.

चटाक करके मेरे बाएं चूत* पर एक चांटा मारते हुए उसने उसे लाल ही कर दिया था. पर दर्द और मजे में, मजे की मात्रा ज्यादा थी, तो मैंने भी उसके सर में अपने हाथ से मेरी गां* में धकेलना चालू कर दिया.

‘अम्मम्म ..’ करके वो मेरी गां* को चाटते हुए मेरी गां* में दूसरे हाथ की उंगली को डालने लगा.
‘थोड़ा दर्द सहन करना पड़ेगा लेकिन उसके बाद मजा बहुत आएगा … ओके!’

मेरी हामी पाते ही उसने दूसरे हाथ की एक उंगली मेरी गां* में डाली और गां* को दो फांक में करते हुए छेद को चाटने और चूसने लगा. कुछ देर तक ऐसा करने के बाद मानवेन्द्र ने मेरी गांड के छेद को चौड़ा करना चालू किया.

मानवेन्द्र ने पहले मेरे दोनों पैरों को अपने पैरों से चौड़ा किया … फिर दोनों हाथों की उंगली को, जो मेरी गां* में थीं, एक दूसरे के विपरीत दिशा में खींच कर गां* को चौड़ा करने लगा.

“थू … अब गां* को बिल्कुल ढीला छोड़ दो … और मुझे अन्दर जाने दो. मैं तुम्हारी गांड का टेस्ट अन्दर तक से कर लेना चाहता हूँ.”

ये कहकर उसने अपनी जीभ को धीरे धीरे करके आधा मेरी गां* में सरका दिया और हिलाने लगा.

मुझे उसकी जीभ की खुरदराहट अपनी गांड के अन्दर मजा देती हुई महसूस हुई.

जीभ को गोल गोल घुमा कर जब वो लगभग मेरी गां* में भीतर तक पहुंच गया, तब उसने अपने होंठों से मेरी गां* पकड़ा. उंगलियां बाहर निकालीं और चूतड़ों को फैला कर जीभ से मुझे चोदन* लगा.

मुझे लज्जत का ऐसा अहसास हो रहा था कि क्या लिखूं … ऐसा सुख देना तो मानो स्वयं कामदेव ने ही उसे सिखाया होगा.

मेरा कामदेव मुझे अपनी गां* को चौड़ा करने पर मजबूर कर रहा था. वो मेरी गां* का असली स्वाद अपनी जीभ से ही ले रहा था.

जब मेरी गां* से उसका मन भर गया, तो उसने मुझे अपने होंठों और हाथों की कैद से रिहा कर दिया. मेरे दोनों चूतड़* पर एक एक किस किया. मेरे दाएं चूत* पर दांत गड़ाते हुए, उसने एक प्यारी सी थपकी मारी.

“तुम्हारी गां* बड़ी लाजवाब है.” कहते हुए उसने मुझे एक चूमा मेरे गालों पर जड़ दिया और जीभ मेरे मुँह में घुसा दी.
मेरी गां* का टेस्ट मुझे ही कराते हुए वो मुस्कुरा दिया.

“इतनी अच्छी तरह से मेरी गां* की मुँह से चुदा* यानि की रिमिंग आज तक किसी ने नहीं की थी.” कहते हुए मैंने उसे किस किया.

उसने मुझे एक तरफ धक्का दिया, मेरे गालों को अपने हाथ से पिचकते हुए गुस्से से देख कर बोला- मेरा मुकाबला किसी और से मुझे बर्दाश्त नहीं.

ये कह कर उसने मेरे होंठों पर थूका और फिर खुद ही उसे चाट गया. फिर चूसने लगा.

मैंने उसे एक तरफ धक्का दिया और उसे बेड पर लिटाते हुए उसके लं* पर बैठ कर उसके मम्मे चूसने लगा. फिर कुछ देर में ही मैं उसके लं* पर अपना मुँह चलाने लगा. सुपारा, टट्टे और उसकी हल्की हल्की झांटों में मेरा थूक ही थूक हो गया था.

मैंने कुछ 10 मिनट तक उसके लं* को अपने मुँह में पनाह दिए रखा.
जब तक लौड़* ने मेरे मुँह के अन्दर, मेरी जीभ, मेरी तालू और मेरे गालों पर झटके दे दे कर उन्हें थका न दिया, तब तक मैं उसके लं* को किसी आइसक्रीम कर तरह चूसता रहा.

“वैसे तुम्हारा लौ* भी कमाल का है … देखो ना, पिघलता ही नहीं, टेस्ट भी अच्छा है. पर अगर ये धीरे धीरे पिघले, तो मजा ही कुछ और आए.”
मैंने ये सब अभी कहा ही था कि मानवेन्द्र के लौड़* से प्रीकम रिसने लगा.

मानवेन्द्र ने अपनी आंखों से अपने लौड़* की तरफ इशारा किया … और तुरंत मेरी आंखों में देखा. मानो वो कह रहा हो कि लो जैसा तुम कहो. मैंने बिना एक पल गंवाए उस प्रीकम को चाट लिया और लौड़े को पूरा गीला कर दिया.

मानवेन्द्र ने मुझे ऊपर खींचते हुए मुझे एक जोरदार किस किया और अपनी गोद में बिठा लिया.

किस करते हुए ही उसने एक कंडोम निकाला और मुझे नीचे लिटाया- चॉकलेट चलेगा?

मेरे हां कहते ही उसने मेरे गालों को पिचकाया और कंडोम को मेरे होंठों पर रख दिया.

‘ये तुम्हारे मुँह में नहीं जाना चाहिए.’ कहते हुए उसने कंडोम को मेरे होंठों पर रख दिया.

फिर लौड़* को कंडोम पर धीरे से सुपारे से सटा दिया. अब उसने धीरे धीरे अपने लं* पर धक्के लगाते हुए उसने लंड को मेरे मुँह में घुसेड़ना चालू किया.

कंडोम भी आहिस्ता से खुलने लगा और लंड मेरे मुँह में जाने लगा.

मुझे अपने होंठों पर कंडोम के डॉट्स फील होने लगे और लौड़* ने अपने कपड़े पहन लिए. कंडोम पहनने का इससे अच्छा तरीका मैंने कभी नहीं देखा था.

कंडोम का चॉकलेट टेस्ट मेरे मुँह से अपने मुँह में फील करने के लिए उसने मुझे एक किस किया और फिर मुझे उल्टा लिटा दिया.

मेरी गां* में थूक कर उसने लं* का सुपारा लगाया और धीरे धीरे करके गां* में लं* पेलने लगा.

मानवेन्द्र के द्वारा गां* की रिमिंग होने की वजह से ज्यादा दर्द तो नहीं हुआ लेकिन फिर भी लं* मोटा होने की वजह से मेरी गां* की दीवारों को थोड़ा और चौड़ा होना पड़ा.

गां* में लं* का सुपारा जाते ही मेरी गां* ने हिम्मत कर ली और धीरे धीरे एक एक दो झटकों को फील करते हुए मानवेन्द्र ने कुछ नब्बे सेकंड में पूरा लौ* अन्दर कर दिया.

अब मुझे दर्द थोड़ा ज्यादा होता, तो वो लं* को थोड़ा बाहर निकाल कर रुक जाता और फिर से धक्का चालू कर देता.

धीरे धीरे करके मानवेन्द्र का लौड़ा मेरी गां* में कब सैट हो गया, मुझे कुछ पता ही नहीं चला.

पर अब गां* के अन्दर जाते ही वो लौड़े को ट्विच करने लगा. एक पल के लिए तो मुझे लगा कि वो झड़ गया है.

“बस, हो गया?” मैंने रिलैक्स होते हुए पूछा.

तो उसने एक बेरहम झटका मेरी गां* में दे मारा.

“मजा आया … जब लौड़ा गां* में ऐसे ट्विच करता है, तो गां* को लगता है कि पानी आ गया और गां* शांत हो जाती है. लेकिन तभी असली मजा शुरू करना चाहिए.”
ये कहते हुए उसने मेरी गां* की चुदा* इस बार ताबड़तोड़ शुरू कर दी.

“ओह … आह हाय … यस फ़क मी.” मेरे ये शब्द जैसे जैसे मेरे मुँह से निकलते, उसका लौड़ा भी गां* से निकलता … पर अगले पल ही वापस अन्दर चला जाता.

“यस … तुम्हारी गां* को आज ढीला ही करना है.”
“यस और जोर से … डीपर हार्डर.” मैं चिल्ला चिल्ला कर चु* रहा था.

मानवेन्द्र ने मेरी गर्दन को मोड़ा और अपनी जीभ मेरे मुँह में घुसेड़ते हुए मेरी गां* पर हमले चालू रखे.

कुछ देर चोद* के बाद उसने मुझे मेरे पेट के नीचे हाथ डालकर उठाया और फिर कुतिया बना दिया.
मेरी गां* को दोनों हाथ से और चौड़ी कर दिया. अब उसका लं* मेरी गां* में और अन्दर तक चला गया.

झटके पर झटके अब तेज होते गए, बेड चु चु की आवाज करने लगा, गां* के पास से फच फच की आवाजें आने लगी.

आह ओह … की आवाजों से कमरा गूंजने लगा. कभी कभी गां* पर चटाक पड़ने की आवाज भी आती … और कभी कभी होंठों से होंठों मिलने पर केवल मम मम ममम की आवाज ही दबी रह जाती.

मेरी गां* चुदाई को 15 मिनट बीत चुके थे … पर मानवेन्द्र की स्पीड में कोई कमी नहीं आयी थी.

“पोजीशन चेंज करें?” उसने पूछा.

मैंने मूक सहमति दी, तो झट से वो बेड पर कमर के बल लेट गया और मेरी गां* के सिकुड़ने से पहले ही फिर से उसने लं* को मेरी गां* में पेल दिया.

गां* में इस तरह से लौ* लेते ही उसकी सिसकारी निकल गयी और गांड में लं* को गोल गोल घुमाने से उसका दही निकलने को हो गया.

कुछ देर बाद उसने मेरी गां* पर हाथ लगाया और मुझे ऊपर नीचे करने लगा,

मैंने उसके हाथों को हटाया और अपने घुटनों को मोड़ कर, उसकी छाती पर लेट गया.
मैं उसके होंठ चूमने लगा.

नीचे से वो मेरी गां* में लं* घुसाने लगा और हिलने लगा.
मैं भी हिल हिल कर उसके लं* को अपनी गां* से चोदने लगा.

मैंने उसके होंठों को छोड़ते हुए उसकी छाती पर हाथ रखे और अपने गां* को उसके खड़े मोटे लं* पर उचकाने लगा.

“सोचा नहीं था तुम्हारी गां* से मुझे इस तरह से भी मजा लेने का मौका मिलेगा.” मानवेन्द्र ने कहा.

मैंने एक स्माइल देते हुए उसके लं* पर अपने उचकने की स्पीड को बढ़ा दिया.

कुछ देर इसी तरह से चोद* के बाद वो बैठ गया और मुझे चूमने लगा.

फिर धक्का देकर मानवेन्द्र मेरे ऊपर आ गया और मेरी टांगों को मेरे कंधे पर सटा कर मेरे होंठों चूमते हुए मुझे चोद* लगा.

मुझे कुछ पांच मिनट बाद ही पैरों में दर्द होने लगा तो उसने मेरी गां* को खींच कर बेड के किनारे पर लिया और मेरी जांघों को पकड़ कर जमीन पर खड़ा होकर मुझे लं* पर चढ़ाने लगा.
कभी वो मेरे होंठों को, तो कभी मेरे मम्मों पर थूकता और उन्हें चूसकर काट भी लेता.

अब एक घंटा हो चला था. मेरी गां* भी अब मुझे गालियां देने लगी थी. पर शायद गां* को भी मजे आ रहे थे, या उसके मुँह में मूसल लं* के चलते वो कुछ कह नहीं पायी थी.

खैर … अब शायद मानवेन्द्र के श्रीमान का भी दही निकलने वाला था, जिसने मेरी गां* में इतनी देर तक मशीन चलायी थी.

मानवेन्द्र ने मेरे लौड़* को हिलाना चालू किया, पर शायद वो उसे मुँह में लेना चाह रहा था. वो उधर पहुंच नहीं पा रहा था.

कुछ देर बाद उसने मेरी गां* से ल*ड निकाला और बेड पर बैठ गया.

उसने मेरे बाएं हाथ को अपने दाये कंधे पर रखवाते हुए मुझे अपने लं* पर बैठा लिया.

अब मैं उसकी गोद में कुछ इस तरह था कि मेरी बगलें उसकी छाती से चिपकी हुई थीं.

थोड़ी देर में ही मैंने लं* पर चुदाई चालू कर दी … और इसी तरह वो मेरे लं* को भी अपने मुँह में ले पा रहा था.

अब हम दोनों के लं*, एक गां* और एक मुँह पेल रहे थे.
ये एक तरह से 69 की ऐसी मुद्रा थी जिस्मने मेरा लं* उसके मुँह में था और वो मेरी गां* को अपने लं* से भेद रहा था.

कुछ देर बाद जब हम दोनों चरम सीमा पर पहुंचने वाले थे, तो मानवेन्द्र मेरा इशारा पाकर तुरंत अपना कंडोम हटा कर लं* चुसवाने की पोजीशन में आ गया.

हम एक दूसरे के लं* को चूसने की पोजीशन में आ गए थे.

लं* चुसाई से पहले हमने एक दूसरे की आंखों में देखा, एक अनचाहा अनजाना सा फ़्लाइंग किस किया और फिर किसी भूखे भेड़िये की तरह एक दूसरे के लं* पर ऐसे टूट पड़े, जैसे होड़ लगी हो कि पहले कौन किसे फ्री करेगा.

मानवेन्द्र ने अपने हाथों को मेरे लौड़* पर कसकर पकड़ा और सुपारे को अपने मुँह से और बाकी ल*ड को हाथ से झाड़ने लगा.

मैंने अपने दोनों गालों को पिचकाया और पूरे लं* को गले तक ले जाते हुए हिलाने लगा.

जैसे ही चरम सीमा पर पहुंचने वाले थे हम दोनों ने लं* को एक दूसरे के गले तक धक्का दे दिया.
दोनों ने एक दूसरे के लं* को सेम टाइम पर पूरी इज्जत देकर अपने मुँह में एक दूसरे का पूरा स्वाद भर लिया.

मैंने कुछ आठ से दस धक्कों में पूरा लं* खाली कर दिया.
वहीं मानवेन्द्र ने भी कुछ बारह से पंद्रह झटके देकर अपने लं* का पूरा माल मेरे मुँह में डाल दिया.

फिर हम दोनों ने बैठ कर फिर से एक दूसरे की आंखों में देखा और फिर से एक दूसरे को चूमने लगे … जैसे कि कभी दुबारा अलग ही नहीं होना चाहते हों.

कुछ पल के इस कामुक झंझावात के बाद हम दोनों वहीं बेड पर लेट गए और बेतहाशा थके पड़े हुए लम्बी लम्बी सांसें भरने लगे.

तभी अचानक से ‘खट खट खट ..’ दरवाजे पर हुई एक दस्तक से हम दोनों चौंक गए.

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