Idiot's Corner by Nand kishore Sharma

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मै?

 # " इडियट-नामा "  #---114521/08/26जब समय हमारी आँखों में, दो विपरीत भाव,रंग,अर्थ, एक,प्रेम में शरमाती,मुस्कुराती,महकती ...
21/08/2026

# " इडियट-नामा " #---1145

21/08/26

जब समय हमारी आँखों में,
दो विपरीत भाव,रंग,अर्थ,
एक,प्रेम में शरमाती,मुस्कुराती,
महकती आँखौं को अभिव्यक्त करती है,
दूसरी,पथरा गई,निश्प्रभ,निष्प्राण हों,
तो ऐसा ही महसूस होता है कि,
नियति हमको गढ़ रही है,
दोनों ही अनुभूतियों को जी लेने के बाद,
मन किसी एक किनारे नहीं ठहरता,
जीवन जीना उतना सहज नहीं रह जाता है।

मन में प्रेम की,सागर सी,दर्द की लहरें होती हैं,
आँखों के सूखे आँसूऔं में कोई छवि होती है,
आँसू बहते नहीं हैं, ग़ज़ल बन जाते हैं,
ग़ज़ल जो कागजों पर नहीं,
दिल की धड़कनों पर लिखी जाती है,
अदृष्य हथेलियाँ,हमारे आँसू पौछ जाती हैं।

ये अलग-अलग भाव,रंग,
जीवन को एक नया अर्थ देते हैं,
जैसे सुबह और शाम,सूरज और चाँद,
पतझड़ और बसन्त मिलकर एक हो गये हों,
मन के एक ही क्षितिज पर,
प्रेम और दर्द के रंगों का एक इन्द्रधनुष बन गया हो।

दर्द,प्रेम का रंग ही पा गया हो,
मन अशांत हो,कहीं दूर कुछ खोजता नहीं है,
शांत हो,आत्मा में एक और आत्मा को
गहनता से महसूस करता है,
समझ में आता है कि बाहर जो है भ्रम है,
" इडियट " अन्दर ही सत्य है।

# ● " इडियट " ● #

 # " इडियट-नामा " ●  #---114421/08/26शब्द वही हैं,बस शब्दों के, अर्थ और रंग बदल गये है, बदल गई है नैतिकता की परिभाषा, हम...
21/08/2026

# " इडियट-नामा " ● #---1144

21/08/26

शब्द वही हैं,बस शब्दों के,
अर्थ और रंग बदल गये है,
बदल गई है नैतिकता की परिभाषा,
हमारे आदर्श,विचार,भाषा,बदल गये हैं।

तुम दकियानूसी हो,
जो मानते हो पुरातन संस्कृति,
जाते हो मन्दिरों में,
पढ़ते हो रामायण,गीता,
लेते हो सात फेरे,विवाह वेदी पर।

हम आधुनिक हैं,पढ़ते हैं ग्रे लिटरेचर,
हम हाथौं में आरती का थाल नहीं,
रखते हैं ज़ामे-अंगूरी,
रहते हैं बिना फेरे लिव-इन में,
अराजकता फैलाना हमारा धर्म है।

हम प्रगतिशील हैं,वयस्क हैं,
जो चाहे,वह करेंगे,
नाचेंगे नंगे पब-बारों में,
घूमेंगे अर्द्धनग्न सड़कौं पर,
रहेंगे लिव-इन नें,
हम मानते नहीं,आत्मा के दर्शन को,
बेहूदा से बन्धनों को,
देह ही तो आनन्द का घर है,
रोक नहीं सकते माँ-बाप हमको,
कह दिया है अदालत ने।

हम इन्डियन हैं,
नहीं मानते भारतीय संस्कृति को,
कुछ कहोगे,रोकोगे अगर तो,
फोड़ देगें सर मारकर पत्थर,
हम काकरोच हैं,बीमारियों के वाहक,
फैले हैं हम संसद से कीचन तक,
डरो हमसे " इडियट ", नहीं तो,
आन्दोलन कर देगें हम जंतर-मंतर पर।

# ● " इडियट " ● #

 # " इडियट-नामा "  #---114320/08/26उम्र भी क्या-क्या न रंग दिखाती है,समय के साथ हर चीज बदल जाती है।सुबह का सुनहरा सूरज,द...
20/08/2026

# " इडियट-नामा " #---1143

20/08/26

उम्र भी क्या-क्या न रंग दिखाती है,
समय के साथ हर चीज बदल जाती है।

सुबह का सुनहरा सूरज,
दोपहर को यौवन पा तपता है,
और तपाता है,
बिखेरता है,अपनी सतरंगी किरणें,
शाम को मंद,उदास सा ढ़ल जाता है।

चाँद बढ़ता है,एक-एक कदम,
बिखेरता है अपने रूप की माधुरी,
पूर्ण यौवन पाकर पूनम को,
मुग्ध कर लेता है मन को बिखेरकर चाँदनी,
घटता है धीरे-धीरे यौवन,
अंधेरों में खो जाता है अमावस को।

यही तो हमारा जीवन भी है,
चढ़ते हैं सीढ़ियाँ,बचपन से यौवन तक,
गुरूर से चलते हैं छलकाते यौवन,
धीरे-धीरे उतार आता है,
शिथिल होते जाते हैं अंग-अंग,
ढ़ल जाता है इतराता,लुभाता यौवन,
काले,घने,कुंतल केश,हो जाते हैं धवल,
पड़ जाती हैं झूर्रियाँ,चाँद से मुख पर,
धूंधले हो जाते हैं मदभरे नयन,
किताबों में रखे गूलाब से हो जाते हैं अधर,
झूक जाती है कमर,चलना नहीं होता सहज,
देह हो जाती है बीमारियों का घर।

कहाँ गई वे काली, घुँघराली ज़ूल्फ़ें,
जो झूलती रहती थी कन्धों पर,
मछली सी बड़ी-बड़ी आँखें,
जिसपर दिल कितने थे कुर्बान,
आवाज आती थी पीछे से कोमलांगनी की,
"जानेमन", " जानेमन ",
औ गंजे,पूछता है "इडियट" हमसे दर्पण।

ढूँढ़ता है मन "इडियट",वही बीते पहर,
मगर लौटकर कहाँ आते हैं बीते दिन,
बस नहीं बदलता आत्मा में बसा प्रेम,
मन पूछता है,आँखें ढ़ूढ़ती है,कहाँ हो तुम,
कोई कहता है आसमाँ से,तुम्हारी रूह में हैं हम।

# ● " इडियट " ● #

 # " इडियट-नामा "  #---1142प्रेम का कथानक, सीधे रास्ते नहीं चलता, कई मोड़ों से गुजरता हैं, कई मुश्किलें आती हैं, कुछ पा ...
20/08/2026

# " इडियट-नामा " #---1142

प्रेम का कथानक,
सीधे रास्ते नहीं चलता,
कई मोड़ों से गुजरता हैं,
कई मुश्किलें आती हैं,
कुछ पा जाते हैं,कुछ खो देते हैं,
हर सपना पूरा नहीं होता हैं,
किरचें रह जाती हैं आँखौं में।

कुछ रह जाते हैं रास्तों में,
काॅलेज की लाईब्रेरी में,
किताबों में रखे ख़तों में सिमटकर,
सपने ढ़ह जाते हैं ताश के पत्तों से,
बहुत कम घर बना पाते हैं,
बाकी पुरानी किताबों से,
तुल जाते हैं रद्दी से,समाज के तराजू में।

कुछ किताबें हम पढ़ते हैं,
कुछ हमें पढ़ती हैं,
कुछ को हम लिखते हैं,
कुछ हमें लिखती हैं।

अलिखा भी पढ़ लें हम,
अनकहा भी सुन लें हम,
इसी को शायद प्रेम कहते हैं,
नियति मिलाये या न मिलाये,
मगर जीवन में,
प्रेम की ख़ुश्बू तो रहती है,
मन में अनुभूति तो रहती है,
साथ चल पायें या न चल पायें,
आँखें ख़्वाब तो बूनती हैं।

रह जाते हैं पदचिन्ह,
रास्तों में,उस मोड़पर,
जिस मोड़ से,
अलग-अलग रास्तों पर,
मुड़ जाते हैं हम,
कभी वापस नहीं लौटने,
वह मौड़ हमें आवाज तो देता है।

# ● " इडियट " ● #

 # " इडियट-नामा "  #---114119/08/26मैं किसी भी रास्ते से जाऊँ, हर रास्ता, वहाँ जाकर खत्म हो जाता है, जहाँ तुम छुट गये थे...
19/08/2026

# " इडियट-नामा " #---1141

19/08/26

मैं किसी भी रास्ते से जाऊँ,
हर रास्ता,
वहाँ जाकर खत्म हो जाता है,
जहाँ तुम छुट गये थे,
किसी का जाना,
बस उसका जाना नहीं होता,
एक सैलाब होता है,
जो सबकुछ बहा ले जाता है।

दर्द खोने का वही जानता है,
जो पीछे अकेला रह जाता है,
सिन्दूर का रंग छुटता नहीं हथेली से,
सिन्दूर लगाकर लाया था जिसको,
सिन्दूर लगाकर छोड़ आना होता है।

न चेतन,न अचेतन,न जिवित, न मृत,
एक जिन्दा शव रह जाता है,
आती-जाती साँसें ही,
जिन्दा होने का प्रमाण होती हैं,
जबकि वह तो मरने वाले के साथ,
मर चुका होता है।

एक शुन्य,एक खाली जगह,
आ जाती है जीवन में,
जो कभी नहीं भरती,
मन में स्मृतियाँ रह जाती हैं,
सागर की लहरों,अदृष्य हवाऔं सी,
सुगन्ध रह जाती हैं,
जीवन का कोई अर्थ नही होता,
कुछ चीजों का कोई विकल्प नहीं होता है।

जीवन की डायरी के पन्ने,
रह जाते हैं अलिखित,
मन कागज पर उतर नहीं पाता है,
जो लिखना होता है,
आँखें शुन्य में लिखती रहती है,
जिसे कोई पढ़ नहीं पाता है,
आँखों को पढ़ना सबको कहाँ आता है,
प्रेम,दर्द,शब्दों में परिभाषित नहीं होते,
दर्द ही प्रेम हो जाता है,
मुश्किलों में जीना सीख देता है,
ख़त लिखो भी "इडियट" अगर,
आसमाँ तक कोई हरकारा नहीं जाता है।

# ● " इडियट " ● #

 # " इडियट-नामा "  #---114019/08/26सावन बरसा कहीं रिमझिम, कहीं फट गये बादल, कहीं बाढ़ का ताण्डव, कहीं सूखा, कहीं हिमस्खल...
19/08/2026

# " इडियट-नामा " #---1140

19/08/26

सावन बरसा कहीं रिमझिम,
कहीं फट गये बादल,
कहीं बाढ़ का ताण्डव,
कहीं सूखा,
कहीं हिमस्खलन,
कहीं दिलों में,
कहीं पहाड़ौं में दरारें
समझो "इडियट",
प्रकृत्ति करती है क्या इशारे।

आसमाँ एक है,
जाति,भाषा,धर्म में,
हम बँट गये हैं,
नाम एक है इन्सान,
मन में भेद हो गये हैं,
समझो "इडियट",
सरहदें करती हैं क्या इशारे।

मर गया इडियट,
आये कान्धा देने वे,
जिनके हम कर्जदार थे,
मुँह मोड़ लिया उनने,
जो हमारे कर्जदार थे,
कौन अपना है,पराया कौन,
समझो "इडियट",
सम्बन्ध कर रहें हैं क्या इशारे।

भूख है जिनको,सत्ता की,
कुर्सी की,
कोशिशें कर रहे हैं जी तौड़,
देश तौड़ने की,
गद्दारों का गठबंधन,
समझो "इडियट",
कर रहा है क्या इशारे।

बेगुनाह प्रताड़ित है अदालत में,
गुनहगार घूमता खुला है,
सच अकेला है,
झूठ के साथ काफ़िला है,
न्याय बिक रहा है,
खरीददार वे हैं जिनके पास,
धन-बल है,सत्ता है,
समझो "इडियट",
व्यवस्थायें करती हैं क्या इशारे।

हाथौं में कलम लेकर बैठे हो अकेले,
दर्द में भी प्रेम महसूस करते हो,
समझो "इडियट",
ख़ामोशियाँ कर रहीं है क्या इशारे।

# ● " इडियट " ● #

 # " इडियट-नामा "  #---113918/08/26मुझे तुमसे मोहब्बत है, औ' हिमालय, सागर,नदियाँ,संस्कृति, मेरे दिल में बसता, हमारा प्या...
18/08/2026

# " इडियट-नामा " #---1139

18/08/26

मुझे तुमसे मोहब्बत है,
औ' हिमालय,
सागर,नदियाँ,संस्कृति,
मेरे दिल में बसता,
हमारा प्यारा वतन हिन्दुस्ताँ है।

रिसते हैं जख़्म अब भी,
दौरे-गुलामी के,
शौर्य बहने लगता है रक्त में,
सुन शहादत शहीदों की,
श्रेय ले लिया किसी और ने,
हालाते-वतन,हालाते-सियासत,
देखकर मन पूछता है,क्या सचमुच,
आजाद हो गया हमारा हिन्दुस्ताँ है।

आजाद हो गया गर देश हमारा तो,
क्यों है मुफ़लिसी,गुरबत,अशिक्षा,
दिलों के बीच नफ़रत क्यों है,
जिनको डर लगता है देश में,
वे यहाँ रहते क्यों हैं,
समझते हैं खुद को शहंशाह,
सियासत की ऐसी फ़ितरत क्यों है,
इन्सान की शक्ल में दरिंदे क्यों है,
सुरक्षित नहीं है नर-नारी,बच्चे,
क्यों हैं कत्लो-गारत,अपराध,दंगे,गद्दार,
भुखमरी,बेरोजगारी,संस्कृति भंजक,
क्यों सदियों से देश में महमाँ हैं।

गये गोरे फिरंगी,आ गये काले,
बदला क्या,हमें मिला क्या,
देश को गाली देने की आजादी क्यों है,
बे-ईमान,बे-ज़मीर,अपराधी,ऐश में हैं,
आम आदमी,स्त्री,बच्चे,ईमानदार परेशाँ हैं।

श्रेय ले लिया जिनने आजादी दिलाने का,
जिम्मेदारी क्यों नहीं लेते, बदहाली,
विभाजन,कत्लों,बलात्कारों की,
पूछते हैं हिमालय,भारतमाता,
ख़ामोशियों में बन्द क्यों यह दास्ताँ है।

हमें मिला खून से सना,लाशों से पटा,
बलात्कारित,टूटा-फूटा भारत,
अपने ही देश में झेला विस्थापन का दंश,
विदेशी भाषा,विदेशी संस्कृति,
संविधान में नहीं है देश की संस्कृति,
देश में हत्यारों को बना दिया महान,
पढ़ने को मिला हत्यारों का इतिहास,
बताओ "इडियट",
क्या यही शहीदों के सपनों का हिन्दुस्ताँ है।

# ● " इडियट " ● #

 # " इडियट-नामा "  #---113818/08/26समुन्दर की एक ऊँची और तेज लहर,मुझे बहाकर,हरेभरे,सुन्दर द्वीप पर ले आई।द्वीप पर ऊँचे,घ...
18/08/2026

# " इडियट-नामा " #---1138

18/08/26

समुन्दर की एक ऊँची और तेज लहर,
मुझे बहाकर,हरेभरे,सुन्दर द्वीप पर ले आई।

द्वीप पर ऊँचे,घने,सुनहरे फलों के पेड़ थे,
खुबसूरत,सुगन्धित लाल फूल खिले थे,
हर तरह के,रंगों के,पशु-पक्षी थे,
लम्बे-लम्बे,रंग-बिरंगे,खुबसूरत साँप थे,
सभी इन्सानों की भाषा में बात कर रहे थे,
जानवर हम इन्सानों की तरह दरिन्दे नहीं थे।

पेड़ौं पर फूलों की लताएँ लिपटी थी,
सुगन्धित लताऔं,फूलों के,झूले डले थे,
पक्षी मेरे स्वागत में वृन्दगान गाने लगे,
उनने कहा," देव आपका स्वागत है,
प्रतिक्षा करें,देवी अभी आती ही होगी "।

एक रंगीन कोयल ने कहा,"देव इडियट",
इन्सानों की तरह यहाँ न नफ़रत है,न ज़हर,
हममें धर्म,जाति,भाषा का द्वन्द्व नहीं है,
यह प्रैम का द्वीप है,प्रेम की देवी का घर है,
साँपों में भी अमृत है,कोई हिंसक नहीं है।

द्वीप के बीच एक सुन्दर सरोवर बना था,
जिसके पानी का रंग सुनहरा था,
उसमें स्फटिक का बना शिवलिंग तैर रहा था,
नीले,सफेद,लाल कमल खिले थे,
मैं सरोवर में से नहाकर बाहर आया तो,
मेरे वस्त्र,देह,सुनहरे,सुगन्धित हो गये,
देह से,वस्त्रों से सुनहरी किरणें फूटने लगी।

शाम उतर आई थी,
आसमान से सुनहरी किरणें उतरी,
जो सुन्दर और सुनहरी युवती बन गई,
उसके सुनहरे वस्त्रों में,हीरे-मोती जड़े थे,
उसकी देह और वस्त्रों से चाँदनी फूट रही थी,
द्वीप अद्भुत,मादक सुगन्ध से भर गया,
उसने अपना सुनहरा घुँघट हटाया तो,
मेरे सामने "जूलियट" खड़ी मुस्कुरा रही थी।

हमारी हथेलियाँ मिली,आँखें मिली,
जूलियट के स्वर सितार से तरंगित हुए,
" मुझे पता था, आज तीज को तुम,
मेरा सिंधारा करने जरूर आओगे ",
आसमान से फूलों की बरसात होने लगी,
फूलों का बिस्तर बन गया,
हमने साथ,नीले कलम चढ़ाकर,शिवलिंग की पूजा की,
हम हाथ पकड़े फूलों के बिस्तर पर बैठ गये।

पशु-पक्षी,साँप,पाखी, हर्ष गीत गाकर नाचने लगे,
पेड़ झूमने लगे,हवाएँ संगीत देने लगी,
बादल गरजे,अमृत की बर्षा होने लगी,
और मेरी नींद खुल गई,सुबह की पाँच बज रही थी,
बाहर रिमझिम फूहारें पड़ रही थी,
मैं सपने की खुमारी में भींगता हुआ, घूमने निकल गया,
सोचता रहा,"इडियट" काश!! यह सपना सच होता।

# ● " इडियट " ● #

 # " इडियट-नामा "  #---113717/08/26ख़ामोशी भी एक ज़ूबाँन होती है,कह दो देते हैं हम मगर, क्या समझते हैं ज़ूबाँन,ख़ामोशी क...
17/08/2026

# " इडियट-नामा " #---1137

17/08/26

ख़ामोशी भी एक ज़ूबाँन होती है,
कह दो देते हैं हम मगर,
क्या समझते हैं ज़ूबाँन,ख़ामोशी की,
मुखर ही रहते हैं,कब रहे ख़ामोश हम,
क्या महसूस किया किसी की ख़ामोशी को,
क्या हम जानते हैं कि,
ख़ामोशी इम्तहान भी होती है।

क्या तुमने महसूस की है किसी की ख़ामोशी,
महसूस किया है मैंने, दर्द ख़ामोशी का,
अब महसूस करता हूँ सालौं से,
अपनी ख़ामोशी को,,, तुम क्या जाने,
यह ख़ामोशी क्या-क्या न कहती है।

हम जान पाते हैं खुद को,
ख़ामोशी अन्दर गहरे उतर जाती है जब,
हम चुप रहते हैं,मिलते हैं खुद से,
तो समझ आता है हमें कि,
ख़ामोशियौं में कितना सैलाब होता है,
जब ख़ामोशियाँ हमसे,
तनहाईयों में दर्दे-दिल की बात करती है।

ये ख़ामोशी ही कहती है ग़ज़ल,
कैनवास में भरती है रंग,
सितार को देती है सुर,
मौन में जख़्म,दर्द,दिल के,होते हैं मुखर,
ज़ूबाँन में हो सकता है हर्ष,ख़ामोशी में होता है दर्द,
एक ख़ामोशी,कितने ही पायदानों से गुजरती है।

गुजरकर देखो कभी,ख़ामोशी के गाँव से तो,
आयेगा समझ में कि ख़ामोशी क्या होती है,
कितना दर्द देती है,कितने इम्तहान लेती है,
ख़ामोशी,आँखों से, ख़ामोशी से रिसती है,
नजर आती है आँखों में मगर ख़ामोश रहती है।

शब्दों से परे,अलग होती है, ख़ामोशी की दुनियाँ,
जिसमें एक ख़ामोश अक़्श होता है,
अंधेरे आसमान में बुझा-बुझा चाँद होता है,
तिल-तिल मारकर ख़ामोशी, अकेले जीना सिखा देती है।

एक दिन ख़ामोशियों में गुजारकर तो देखो जरा,
अर्थ समझ में आ जायेगा "इडियट" ख़ामोशी का।

# ● " इडियट " ● #

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