Idiot's Corner by Nand kishore Sharma

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 # " इडियट-नामा "  #---119624/09/26कौन है जो अभित है,भयभीत नहीं, अच्छे-अच्छे शेरों को देखा है,होते मूषक,घर में शेरनी के ...
24/09/2026

# " इडियट-नामा " #---1196

24/09/26

कौन है जो अभित है,
भयभीत नहीं,
अच्छे-अच्छे शेरों को देखा है,
होते मूषक,
घर में शेरनी के सामने,
घर में शान्ति चाहिए तो,
डरा करो "इडियट" बीबी से।

पहले बच्चे डरते थे माँ-बाप से,
अब माँ-बाप डरते हैं बच्चौं से,
शरीफ तो हर जगह डरता है,
कानून डरता है अपराधियों से,
डरावना है सियासत का चेहरा,
हम डर जाते हैं अपनी परछाँईयों से।

डरना चाहिए वक्त से,भगवान से,
पाप करने,बेईमानी करने से,
मगर आजकल कौन डरता है इनसे,
भगवान ही डरते होगें हम अमानुषों से।

पीपल का भूत मिला नहीं कभी,
मगर डर लगता है हमें भूतों से,
पता है सबको वही अन्तिम सत्य है,
मगर हमें डर लगता है मौत से।

झूठ कहते हैं वे कि डर नहीं लगता किसी का,
डर जाता हूँ मैं खुद को देखकर आईने में,
अब तो असत्य ही सत्य को डराता है,
कभी डर लगता होगा,असत्य को सत्य से।

# ● " इडियट " ● #

 # " इडियट-नामा "  #---119524/09/26बद्दुआएँ मत लो "इडियट"किसी की, बरबाद कर देगी, लो दुआएँ,आबाद कर देगी,हम जैसे कर्म करें...
24/09/2026

# " इडियट-नामा " #---1195

24/09/26

बद्दुआएँ मत लो "इडियट"किसी की,
बरबाद कर देगी,
लो दुआएँ,आबाद कर देगी,
हम जैसे कर्म करेंगे,वे लौटकर,
हमारे पास ही आयेंगे।

काटेंगे पेड़,लेगें रिश्वत,
करेंगे किसी को बेघर,
ठगेंगे,लूटेंगे किसी को,
करेंगे अपराध,बेईमानी,
किसी का मन दुखायेंगे,
प्रताड़ित करेंगे गर किसी को,
वादा करके गर नहीं निभायेंगे,
करेंगे अन्याय गर,
न्याय के पद पर बैठकर,
देगें सजा बेगुनाहों को,
तो बद्दुआएँ ही पायेंगे।

करेंगे भला,हम गर किसी का,
मन नहीं दुखायेंगे किसी का,
रखेंगे सबके लिए मन में दया,करूणा,
देगें भूखे को रोटी,प्यासे को पानी,
लगायेंगे पेड़,चलेंगे ईमान-धरम पर,
करेंगे काम अच्छा तो दुआएँ ही पायेंगे।

ये जो आग बरसती है आसमान से,
कहीं अतिवृष्टि,कहीं अनावृष्टि,
ये ज़लजले,बद्दुआएँ हैं प्रकृत्ति की,
देश देता है बद्दुआएँ उनको,
जिनने नहीं रखा संविधान में संस्कृति को।

तलाकों के मुकदमों में लाखों लेकर,
समझौता करने वाले,
उनका सहायक कानून,
किसी की मजबूरी का फायदा उठानेवाले,
बेईमान,अमानुष,स्वार्थी सियासत,
सोच लीजिए क्या पायेंगे,दुआएँ कि बद्दुआएँ।

बेईमानी का मनभर सोना,
भगवान को चढ़ाने वाले,
पुण्य कमाते हैं कि,
किसी भूखे को रोटी खिलाने वाले,
विचार कर लेना "इडियट"।

# ● " इडियट " ● #

 # " इडियट-नामा "  #---119423/09/26निश्तेज,निष्प्राण आँखों की, कथा हूँ, व्यथा हूँ, ख़ामोशियों की सदा हूँ, प्रेम और दर्द ...
23/09/2026

# " इडियट-नामा " #---1194

23/09/26

निश्तेज,निष्प्राण आँखों की,
कथा हूँ, व्यथा हूँ,
ख़ामोशियों की सदा हूँ,
प्रेम और दर्द की दास्ताँ हूँ।

जो बीत गया वो कल हूँ,
रूह से निकली दुआ हूँ,
ढ़ल गई जो,वह शाम हूँ,
बिना चाँद का खाली आसमान हूँ।

प्रतिबिंब है मेरी आँखों में,
निश्तेज,निष्प्राण आँखों का,
जल रही है चिता दिल में,
निर्जन,निःशब्द,वीरान श्मशान हूँ।

खोने को बाकी बचा नहीं कुछ,
जिन्दा हूँ, मगर मर चुका हूँ,
घर में रहकर भी,मन से यायावर हूँ,
गूलाब था कभी,अब सूखे पात हूँ।

गंगाजल था कभी अब तेजाब हूँ।
बिना बादलों की बरसात हूँ,
चल रहा हूँ जीवन के मुश्किल रास्तों पर,
सूखी नदी में आया "इडियट" सैलाब हूँ।

# ● " इडियट " ● #

 # " इडियट-नामा "  #---119322/09/26अक्सर सोचता हूँ,हमारी पहचान क्या है,इन्सान होने की,कि मूलतः जानवर होने की। कोई पहचाना...
22/09/2026

# " इडियट-नामा " #---1193

22/09/26

अक्सर सोचता हूँ,हमारी पहचान क्या है,
इन्सान होने की,कि मूलतः जानवर होने की।

कोई पहचाना गया अपनी लिबास से,
दौलत-शोहरत,व्यवहार,मिज़ाज से,
खुबसूरती,श्रृंगार किसी की पहचान हुई,
कोई अभिनय और अपने-अपने स्वार्थ से,
पद-प्रतिष्ठा किसी की पहचान बन गई।

कोई विचार,चरित्र,संस्कृति-संस्कार से,
कोई अक्षरों से,ज्ञान के अभिमान से,
किसी की पहचान सत्ता का गुरूर,
किसी की मुर्खता ही पहचान बन गई।

क्या यही सच्ची पहचान है हमारी,
हमारी पहचान तो हमारी आत्मा है,
आत्मा में बसा प्रेम है,संवेदना है,
कब जानेंगे हम कि हम एक इन्सान हैं।

किसी की साँसों का टूटना,
आँखों का निस्तेज,निष्प्राण हो जाना,
क्या सिर्फ उसका जाना ही होता है,
कि उसके साथ दूसरा भी टूट जाता है,
निस्तेज,निष्प्राण हो जाता है,
क्या जानेवाला अपने साथ दूसरे के,
मन का सुकून,शान्ति भी नहीं ले जाता है।

इससे जीवन में आ गई कमी क्या,
कभी पूरी हो पाती है "इडियट",
खाली जगह क्या कभी भर पाती है,
शब्द क्या उस दर्द को कह सकते हैं,
मौत क्या,सिर्फ साँसों का टूटना ही है।

जबतक हमारा " मैं ", हमारे साथ जुड़ा है,
हम कभी जान ही नहीं सकते हम क्या हैं।

# ● " इडियट " ● #

 # " इडियट-नामा "  #---119121/09/26खूब सीखा है हुनर,जर्रे को आफ़ताब बनाने का, जुगनू को महताब,ख़ार को गूलाब बनाने का।रात ...
21/09/2026

# " इडियट-नामा " #---1191

21/09/26

खूब सीखा है हुनर,जर्रे को आफ़ताब बनाने का,
जुगनू को महताब,ख़ार को गूलाब बनाने का।

रात चाँदनी है,मगर मन में घना अंधेरा है,
यही अंजाम होता है,दिल के टूट जाने का।

कलम हाथौं में हो,रूह में अक़्श उसकी रूह का,
वक्त मुश्किल होता है बहुत खुद को आजमाने का।

आसमान बना दिया दिल को,पूनम,अमावस को,
क्या खूब काम है रोज,मज़ार पर दीपक जलाने का।

हद है यह मोहब्बत की,जो करते हो रूह से मोहब्बत,
ज़ज्बा है तुममें,खुद को भूलकर,उसको याद रखने का।

लिखते हो चिता की राख से भींगी ग़ज़ल-नज़्में,
सबमें नहीं होता हौसला दर्दे-दिल में मुस्कुराने का।

घूमते हो इश्क़ का शव लिए,अपने दिल के कन्धों पे,
हौसला है तुममें पीकर जामे-ज़हर जिन्दा रहने का।

त्यौहार,उत्सव,खुशी के पल ही नही,यादें भी लाते हैं,
बेज़ार रहता है दिल,मन नहीं होता खुशियाँ मनाने का।

चलो औढ़ लें कफ़न "इडियट" हम अपने ही हाथौं से,
सजा लें चिता,इन्तजार क्यों करें ख़ुदा के बुलावे का।

# ● " इडियट " ● #

 # " इडियट-नामा "  #---119020/09/26कुछ बातें कहने की नहीं, बस महसूस करने की होती है, उनको कहने,समझाने के लिए, शब्द बने ह...
20/09/2026

# " इडियट-नामा " #---1190

20/09/26

कुछ बातें कहने की नहीं,
बस महसूस करने की होती है,
उनको कहने,समझाने के लिए,
शब्द बने ही नहीं हैं और न,
शब्दों में मन के गूढ़ भावों को,
हम अभिव्यक्त ही कर सकते हैं।

क्यों हो जाता है प्रेम पहली नजर में,
क्यों होता है दर्द किसी से बिछुड़ने से,
किसी की आँखों का सम्मोहन,
क्यों हमें सम्मोहित कर लेता है,
किसी को रूह में हम क्यों महसूस करते हैं,
किसी का स्पर्श,आलिंगन,
हमें संवेगित क्यों करता है,
क्या इन संवेदनाऔं को हम शब्द दे सकते हैं।

किसी की लबों की मुस्कुराहट,
आँखों में बहता मद,
ख़ामोशियों की ज़ूबाँन,
मोहब्बत के इम्तहान,
प्रतिक्षा करते भीगें नयन,
किसी से बिछुड़ने से व्यथित मन,
किसी के मन की पीड़ा,
हम समझते हैं क्या,
क्या इन भावनाऔं को हम शब्द दे सकते हैं।

जल रहें हैं बादल कि,आसमान का दिल,
बरसती है बारिश कि,आसमान के अश्क़,
निकलता है चाँद रोज किसकी तलाश में,
बता सकते हैं आलिम, " इडियट " कि,
जलता है आफ़ताब किसके दर्द की आग में।

क्या कोई बता सकता है कि,
दुनियाँ में इन्सान कितने बचे हैं।

# ● " इडियट " ● #

 # " इडियट-नामा "  #---118919/09/26इश्क़ करते हो अगर तो, रूह से करो,देह से नहीं, रूप तो चढ़ती धूप है, शाम को ढ़ल जायेगी।...
19/09/2026

# " इडियट-नामा " #---1189

19/09/26

इश्क़ करते हो अगर तो,
रूह से करो,देह से नहीं,
रूप तो चढ़ती धूप है,
शाम को ढ़ल जायेगी।

दौलत का गुरूर क्यों,
शोहरत का सरूर क्यों,
आज बहार है,
कल ख़िजाँ भी आयेगी।

सफ़र इश्क़ का आसाँ नहीं है,
मुश्किलें आती हैं इस सफ़र में,
दर्द घुलेगा प्रेम में तो,
मोहब्बत पूजा हो जायेगी।

चली गई छोड़कर वो,
आसमाँ के सफ़र में तो
शिकायत क्यों उससे,
रूह में महसूस करोगे तो,
शिकायतें दुआ हो जायेगी।

इम्तहान आते हैं सफ़र में,
मिलोगे कभी तो आसमाँ में,
जन्मों जनम का साथ है,
वो फिर हमसफ़र हो जायेगी।

ये तो आँखें हैं "इडियट",
घुलेगा प्रेम तो मुस्कुरायेगी,
देखकर निष्प्राण आँखें,
अश्क़ों से भर भी जायेगी।

# ● " इडियट " ● #

 # " इडियट-नामा "  #---118819/09/26" तकिया कलाम " भी कमाल की चीज है, न जाने कब कोई शब्द अनायास, हमारी ज़ूबाँन पर चढ़ जात...
19/09/2026

# " इडियट-नामा " #---1188

19/09/26

" तकिया कलाम " भी कमाल की चीज है,
न जाने कब कोई शब्द अनायास,
हमारी ज़ूबाँन पर चढ़ जाता है,
और हमारी हर बात में जुड़कर,
हमारा " तकिया कलाम " हो जाता है।

पहली बार जब मैं मिला था उनसे तो,
मन ने कहा था "इडियट",यही है,
तुम्हारे ख़्वाबों-ख़्यालों की शहजादी,
तब से वह "जूलियट" हो गई और,
मेरा तख़ल्लुस, "इडियट" हो गया,
वैसे बुडबक,बेवकूफ जैसे अलंकरण तो,
मुझे बचपन में ही मिल गये थे,
"इडियट"शब्द उनका अंग्रेजी संस्करण हो गया।

और फिर यह "इडियट" शब्द,
मेरा तकिया कलाम हो गया,
प्रेयसी के परिणिता होने के बाद,
प्यार से उसे कह देता था, " इडियट साॅन्ग ",
वह मेरे लिए प्रेम का मधुर गीत ही थी,
इस शब्द में प्रेम था,आत्मियता थी,आत्मा थी,
रूह से प्रेम करनेवाला "इडियट" ही तो होता है।

आखिरी बार उसकी निष्प्राण आँखों में देखने पर,
मन में यही ख़्याल आया था,
" इडियट साॅन्ग ", अधुरी छोड़ गई न कहानी,
जाने क्यों हर जन्म में अधुरी ही रह जाती है कहानी।

" तकिया कलाम " बनाया नहीं जाता है,
खुद ब खुद,मन में बनकर,ज़ूबाँन पर चढ़ जाता है।

प्रतिक्षा वह नहीं है,जिसका लौटकर आना तय है,
प्रतिक्षा वह है,जिसका लौटना नामुमकिन हो,
ख़ुदा के घर जा चुका हो फिर भी,
हमारे मन में,आँखों में उसकी प्रतिक्षा हो,
ऐसे आदमी को "इडियट" ही कह सकते हैं न।

# ● " इडियट " ● #

18/09/2026

# " इडियट-नामा " #---1287

18/09/26

उड़ लो कितना भी,
आसमान में,
लौटकर जमीन पर,
आना पड़ेगा।

घूम आओ दुनियाँ,
लौटकर वापस,
घर ही आना पड़ेगा।

करोगे इश्क़ अगर तो,
दर्द भी मिलेगा,
दर्द से रिश्ता निभाना पड़ेगा।

जो आया है इस संसार में,
लौटकर ख़ुदा के घर,
एकदिन जाना ही पड़ेगा।

मत मुस्कुराओ किसी के,
चेहरे की झुर्रियाँ देखकर,
उस दौर में तुमको आना पड़ेगा।

किस बात का गुरूर है,
" इडियट ",
आये हो खाली हाथ,
खाली हाथ ही जाना पड़ेगा,

पहन लो कितने भी ब्राॅण्डेड कपड़े,
कफ़न का एक ही ब्राण्ड है,
उसी में लिपटकर जाना पड़ेगा।

# ● " इडियट " ● #

 # " इडियट-नामा "  #---118617/09/26किस युग से शुरू करूँ, अपनी कहानी,हर युग में मिले हम,बिछुड़े मिलकर, खिले फूलों की तरह,...
17/09/2026

# " इडियट-नामा " #---1186

17/09/26

किस युग से शुरू करूँ,
अपनी कहानी,
हर युग में मिले हम,
बिछुड़े मिलकर,
खिले फूलों की तरह,
बिखरे खिलकर,
लिखी मुस्कान ने कभी,
कभी आँसूऔं ने,
कभी प्रतिक्षा ने,
कभी कैफे जूलियट ने
कभी श्मशान ने,
लिखी हर युग ने,
हमारे प्रेम की कहानी,
तो दर्द की भी कहानी।

कौन लिखता है यह कहानी,
हर युग में एक सी ही,
हमारे जीवन की पटकथा,
वही मिलना-बिछुड़ना,
चहचहाना परिन्दों की तरह,
ख़ामोशियों की ग़ज़ल लिखना,
दर्द के मुश्किल रास्तों पर तनहाँ चलना।

# ● " इडियट " ● #

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