21/08/2026
# " इडियट-नामा " #---1145
21/08/26
जब समय हमारी आँखों में,
दो विपरीत भाव,रंग,अर्थ,
एक,प्रेम में शरमाती,मुस्कुराती,
महकती आँखौं को अभिव्यक्त करती है,
दूसरी,पथरा गई,निश्प्रभ,निष्प्राण हों,
तो ऐसा ही महसूस होता है कि,
नियति हमको गढ़ रही है,
दोनों ही अनुभूतियों को जी लेने के बाद,
मन किसी एक किनारे नहीं ठहरता,
जीवन जीना उतना सहज नहीं रह जाता है।
मन में प्रेम की,सागर सी,दर्द की लहरें होती हैं,
आँखों के सूखे आँसूऔं में कोई छवि होती है,
आँसू बहते नहीं हैं, ग़ज़ल बन जाते हैं,
ग़ज़ल जो कागजों पर नहीं,
दिल की धड़कनों पर लिखी जाती है,
अदृष्य हथेलियाँ,हमारे आँसू पौछ जाती हैं।
ये अलग-अलग भाव,रंग,
जीवन को एक नया अर्थ देते हैं,
जैसे सुबह और शाम,सूरज और चाँद,
पतझड़ और बसन्त मिलकर एक हो गये हों,
मन के एक ही क्षितिज पर,
प्रेम और दर्द के रंगों का एक इन्द्रधनुष बन गया हो।
दर्द,प्रेम का रंग ही पा गया हो,
मन अशांत हो,कहीं दूर कुछ खोजता नहीं है,
शांत हो,आत्मा में एक और आत्मा को
गहनता से महसूस करता है,
समझ में आता है कि बाहर जो है भ्रम है,
" इडियट " अन्दर ही सत्य है।
# ● " इडियट " ● #