Idiot's Corner by Nand kishore Sharma

Idiot's Corner by Nand kishore Sharma "इडियट्स कॉर्नर " पर आपका स्वागत है।
मै?

 # " इडियट-नामा "  #---102921/06/26पिता सूरज है,माँ है मन,ममता पिता उर्जा है,माँ संस्कार,भावना, ये जन्मदाता हैं,मित्र,पथ...
21/06/2026

# " इडियट-नामा " #---1029

21/06/26

पिता सूरज है,माँ है मन,ममता
पिता उर्जा है,माँ संस्कार,भावना,
ये जन्मदाता हैं,मित्र,पथप्रदर्शक हैं,
सर पर मिली इनसे छत,आसमाँ है,
पिता हैं हिम्मत,हौसला, साहस,
हम अपने माता- पिता की ही छाँया हैं।

पिता वह जीवन्त आईना हैं,
जिसमें हम अपना अक़्श देखते हैं,
देखकर जिनको हम अपना
चरित्र,विचार,सोच किरदार गढ़ते हैं।

जो करते हैं ख़ामोशी से हमारे लिए दुआ,
जो सिखाते हैं,क्या अच्छा है,क्या बुरा,
वे हैं हमारी जरूरतों के आपूर्तिकर्त्ता,
भगवान से ऊँचा हैं उनका हमारे लिए दर्जा।

हमारे दिल की धड़कनें,सासें,संगीत हैं,
प्रकृत्ति का कण-कण मधुर संगीत है,
ऊँचे महल,धन का संचय, भोग है,
हमारे उत्तम चरित्र,विचार,प्रेम,दुआ,संवेदना,
अपने किरदार को ऊँचाईयाँ देना जीवन का योग है।

दिन बड़ा हो या रातें,मिलेंगे चौबीस घण्टे ही,
तुम लौट आओ,तो होगा हमारे लिए वह बड़ा दिन है।

पिरोना भावों को शब्दौं में,कलम योग है,
रूह में बसाना किसी की रूह को,प्रेम योग है,
जोड़ना आत्मा को परमात्मा से भक्ति योग है,
जोड़ना देह से देह को भोग योग है।

मेरे हिस्से में जो आया है "इडियट" वह,
कलम, प्रेम, विरह, के महायोग हैं।

# ● " इडियट " ● #

आसमाँ कर रहा बादल योग है।

 # " इडियट-नामा "  #---102820/06/26ज़िन्दगी एक लम्बी, जलेबी सी, घुमावदार सड़क है, जिसमें अनेको मोड़ है, कहीं गढ़े हैं, न...
20/06/2026

# " इडियट-नामा " #---1028

20/06/26

ज़िन्दगी एक लम्बी,
जलेबी सी,
घुमावदार सड़क है,
जिसमें अनेको मोड़ है,
कहीं गढ़े हैं,
नगर-निगम की सड़कों से,
कहीं बाधाएँ हैं,
सड़कों पर लगे बैरिकेड्स से,
कहीं गूलाब खिले हैं,
नीट के पेपर आऊट हो जाने से,
कहीं बिछे काँटे हैं,
अवसादग्रस्त छात्रों की
होने वाली आत्महत्याऔं से,
कहीं चरित्र बिक रहे हैं,
सरकारी जाँच आयोग से,
भोर है एक छोर पर,
दूसरी और ज़िन्दगी की शाम है।

रिश्तों के,दोस्ती के,
मोहब्बत-नफ़रतों के,
खुले हुए बाजार है,
भीड़ है,शोर है,
मिलते हैं अजनबी,
अपने नाराज हैं,
सबका अपना स्वार्थ है,
दर्द के मज़ार हैं,
जहाँ जलते यादों के चिराग हैं,
श्मशान आखिरी पड़ाव है,
उसके आगे,रूहों का अदृष्य गाँव है।

ज़िन्दगी के सुनहरे पन्नों पर,
प्रेम के अमिट,
महकते अक्षरों से,
किसी का नाम लिख देना ज़िन्दगी है।

बनाना प्रतिमा किसी की,
हृदय में, मन ही मन,
किसी का नाम जपना,
समर्पित भावों से,
प्रेम को समझना ईश्वर,
प्रेम करना नहीं,
प्रेम के रंग में रंगकर,
खुद प्रेम हो जाना,
प्रेम की सहज,सुन्दर,बंदगी है।

# ● " इडियट " ● #

 # " इडियट-नामा "  #---102720/06/26वे दिन कुछ अलग-अलग से थे, प्रेम के रंग खिले-खिले थे, जीने के ढ़ंग कुछ अलग थे, आँखों म...
20/06/2026

# " इडियट-नामा " #---1027

20/06/26

वे दिन कुछ अलग-अलग से थे,
प्रेम के रंग खिले-खिले थे,
जीने के ढ़ंग कुछ अलग थे,
आँखों में सपने मेगा कलर थे,
जी जाते थे उनकी मधुर मुस्कान से।

मैं सुबह-शाम,
अपनी बालकनी में बैठा,
करता था तुम्हारी प्रतिक्षा कि,
तुम आ जाओ,
अपनी बालकनी में तो,
तुम्हारे दीदार को जायें,
दूर से ही दुआ-सलाम हो जाये।

वक्त बीता,एक ही हो गई,
हमारी बालकनी,
सुबह-शाम हम बैठते थे साथ
चाय का कप लिए हाथों में,
बातें करते थे मुस्कुराकर आँखों से,
भींगते थे साथ बरसातों में,
मखमली,नरम धूप में जाड़ौं में,
शीतल,मन्द पवन में गरमियों में।

वक्त बदला,हो गया अकेला,
उम्र के आखिरी पड़ाव पर,
बैढ़ा हूँ,चाय, कलम लिए हाथौं में,
खुद से बातें करता अकेला,
खोया तुम्हारे ख़्यालों में,
तुमपर भींगी सी ग़ज़ल कहता,
आँखों में विरानी,ख़ामोशी लिए लबों पर,
तुम झाँक रही हो आसमाँ की बालकनी से।

नहीं बैठता गार्डन में बुढ़ौं के साथ,
बीपी है किसी का लो,किसी का हाई,
कोई दिल का मरीज,किसी को डायबिटीज,
सभी मजबूरी में करते हैं डायटिंग,योगा,
हम खाते हैं,आलू-गोभी,पनीर का परोठा।

नहीं है कोई कलाप्रेमी,कलम-योगी,
सभी हैं पेंशन भोगी,टेंशन के रोगी,
हम बैठते हैं चाय का कप लिए बालकनी में,
कलम-किताब लिए हाथों में,
भींगते रहते हैं यादौं की मधुर फूहारौं में।

"इडियट" क्या मिलेगा ऐसा कोई,
जिसको न हो अपनी सेहत की चिन्ता कोई।

# ● " इडियट " ● #

 # " इडियट-नामा "  #---102619/06/26उदास सी धुंधली शाम, तन्हाईयाँ, रूह पर दस्तक़ देती यादें, ख़ामोशियाँ, ख़ामोशियों में त...
19/06/2026

# " इडियट-नामा " #---1026

19/06/26

उदास सी धुंधली शाम,
तन्हाईयाँ,
रूह पर दस्तक़ देती यादें,
ख़ामोशियाँ,
ख़ामोशियों में तुमसे बातें,
रोज की तरह ही,
मन में घुमते ख़्यालात,
हाथौं में कलम,
आँखों में अतीत के अक़्श,
पलकों पर ठहरे अश्क़,
शब्दों में बहता दिल का दर्द,
बिना रूह का साँसों का सफ़र।

ये अमानतें हैं प्यार की,
जो दे गई मुझे,
निष्प्राण,निश्प्रभ आँखें तुम्हारी,
रूकी हुई साँसें तुम्हारी,
करना है अब बिना रूह ही सफ़र,
मिलना मुमकिन नहीं,
इस जन्म में अब औ'' मेरे हमसफ़र।

यार इडियट,
माना की अक्ल नहीं है तुममें,
संवेदनशील हृदय है,
रूह से मोहब्बत है,
इतने आलिम हैं महफ़िल में,
इनसे अक्ल थोड़ी सी उधार ही ले लो।

पलकें भिगौंने से,
दर्द, दिल में बोने से,
शव, कन्धों पर ढ़ोने से,
लौटते नहीं जाने वाले,
यही जीवन का सत्य है,
जानम समझा करो,
मुस्कुराया करो दिल से,
खुद के खुद ही हमसफ़र बनो।

# ● " इडियट " ● #

 # " इडियट-नामा "  #---102518/06/26ख़ामोश कर दी  दिल की हर धड़कन, तुम्हारी ख़ामोशी ने।रूठ गया दिल भी मेरा मुझसे, तुम्हार...
18/06/2026

# " इडियट-नामा " #---1025

18/06/26

ख़ामोश कर दी दिल की हर धड़कन,
तुम्हारी ख़ामोशी ने।
रूठ गया दिल भी मेरा मुझसे,
तुम्हारे रूठ जाने से।

उदास हैं शामो-सुबह,दिल खफ़ा-खफ़ा,
दर्द होता है मुस्कुराने में।
क्यों मिले थे हम,ज़ुदा होना लिखा था जब,
ख़त लिखें तुमको किस ठिकाने पे।

कफ़न औढ़े,,दिल में लिए चिता के अंगारे,
रहें कबतक,,,, जिन्दा इन्सानों में।
तुम्हारे ख़्यालों में बहता रहता है मन का निर्झर,
मन बहलता नहीं कलम,किताबों से।

हिज़्र की रातें हो गई कितनी लम्बी,अंधेरी,
दिवस हो गये हजारौं में।
ख़ुदा बुला ले,दिल भर गया तेरी खुदाई से,
चैन मिलता नहीं दर्द की मज़ारों में।

नशा उतरता ही नहीं,तुम्हारी मोहब्बत का,
रह गये हम "इडियट",दास्तानों में।
मिले हो गये सालौं,दिल बेज़ार रहता है,
लौट आओ तुम किसी बहाने से।

# ● " इडियट " ● #

 # " इडियट-नामा "  #---102418/06/26एक सपना देखा था हमारे पूर्वजों ने, आजाद भारत का कि, खिलेंगे फूल जिसमें हमारी संस्कृति...
18/06/2026

# " इडियट-नामा " #---1024

18/06/26

एक सपना देखा था हमारे पूर्वजों ने,
आजाद भारत का कि,
खिलेंगे फूल जिसमें हमारी संस्कृति के,
जिसके लिए हुए शहीद लाखों,
भोगा रक्तरंजित विभाजन,
क्या हकीकत हो गया वह सपना।

सदियों से मौन क्यों हैं हम,
अन्याय के खिलाफ
संस्कृति के हो रहे पतन,
भ्रष्टाचार,विसंगतियों के खिलाफ,
आवाज क्यों नहीं उठाते हैं,
हम तो अन्यायियों के साथ खड़े हैं,
संस्कृति-भंजकों के साथ कदम मिलाते हैं।

जो कभी शर्म समझा जाता था,
" गे होना, लिव-इन में रहना ",
अब कानूनी मान्यता प्राप्त हो गया है,
उसे कानूनी सुरक्षा,संरक्षण मिल गया है,
भरण-पोषण,विरासत का कानूनी अधिकार,
ससम्मान समाज का आशीर्वाद मिल गया है,
कल इनको मंचों पर, सम्मानित किया जायेगा,
सरकारी नौकरी में आरक्षण दिया जायेगा,
क्या यही है आजाद, विकसित,आधुनिक,
सभ्य,सांस्कृतिक भारत का हमारा सपना।

भ्रष्टाचार अब संस्कार हो गया है,
अपराध,नफ़रत,धर्म व्यापार हो गया है,
अपराधियों को संरक्षण प्राप्त है,
हो सकता है कल भ्रष्टाचारियों,राष्ट्रद्रोहियों,
अपराधियों,गे,लिव-इन को प्रोत्साहित कर,
महिमामंडित,पुरूष्कृत किया जाये,
उन्हें " देश का गौरव, देशरत्न, देशभूषण ",
सम्मानों के अलंकरण से अलंकृत किया जाये,
"इडियट" यह जो हकीकत है,क्या था हमारा सपना।

# ● " इडियट " ● #

 # " इडियट-नामा "  #---102317/06/26सपने नींद के,हम रात को देखते हैं, सुबह टूट जाते हैं,शाम तक भूल जाते हैं। जागी आँखों क...
17/06/2026

# " इडियट-नामा " #---1023

17/06/26

सपने नींद के,हम रात को देखते हैं,
सुबह टूट जाते हैं,शाम तक भूल जाते हैं।

जागी आँखों के सपने पूरे करने के लिए,
ज़नूनी होना होता है,दृढ़ संकल्प लिए,
संघर्ष करते,मुश्किल रास्तों पर चलना होता है।

मैंने भी सपने देखे,पूरे भी किये,
सपना था प्रेम का,प्रेम विवाह करने का,
घर का पुस्तकालय बनाने का,
मुश्किल रास्तों से गुजरकर जिन्हें हमने पूरे किये।

एक और सपना था,दार्शनिक बनने का,
वह प्रेम के रास्ते में आ गया तो उसे,
तोड़-मरोड़कर किताबों की आलमारी में रख दिया।

सपना देखा अच्छा इन्सान बनने का,
पता नहीं बन पाया हूँ कि नहीं।

वक्त के साथ सपनों ने अपनी तामीर बदल दी,
प्रेम,दर्द हो गया,कलम हमसफ़र हो गई,
अब बस एक ही ख़्वाहिश बची है,
इस फ़ानी ज़हाँ को जल्द अलविदा कह दूँ,
बिना आत्मा के जीकर भी क्या करे कोई।

सपने देखिए जनाब,सपने मन को पंख देते हैं,
सपने पूरे करने का मन में ज़ुनून,हौसला भी रखिए।

# ● " इडियट " ● #

आसमान में अद्भुत प्राकृतिक नजारा,
चाँद और शुक्र प्रेम की बातें कर रहें हैं।

 # " इडियट-नामा "  #---102217/06/26यक्षलोक की राजकुमारी स्वर्णलेखा,अप्सरा सी रूपवती थी, उसका देवलोक के राजकुमार, कंचनदेह...
17/06/2026

# " इडियट-नामा " #---1022

17/06/26

यक्षलोक की राजकुमारी स्वर्णलेखा,
अप्सरा सी रूपवती थी,
उसका देवलोक के राजकुमार,
कंचनदेह से प्रेम हो गया,
देवगुरू बृहस्पति के हाथौं,
उनका विवाह सम्पन्न हो गया।

वे वायुमार्ग से हनीमून पर निकले,
शाम हो गई तो वे रात्रिविश्राम के लिए,
इन्सानों की एक बस्ती में ठहर गये,
एक सद्पुरूष से नजर आते व्यक्ति ने,
अपने घर में उनको आश्रय दिया।

सुबह देव ने सद्पुरूष को धन्यवाद देकर,
सपत्नी जाने का उपक्रम किया तो,
उस सद्पुरूष ने यक्षिणी का हाथ पकड़कर कहा,
"दुष्ट,मैंने तुम्हें आश्रय दिया और तुम मेरी पत्नी का,
अपहरण कर अपने साथ ले जा रहे हो,
क्या तुममें जरा भी शर्म शेष नहीं रह गई है।"

मामला पंचायत में पहुँचा,
पंचों ने तीनों की बातें सुनी,
आपस में विचार-विमर्श किया,
पंचों को युवक-युवति का कहना सही लगा,
मगर उनने सोचा,यह युवक तो वापस चला जायेगा,
हमें तो गाँव में इनके साथ ही रहना है,
इनसे बैर क्यों मोल लें,
पंचों ने फैसला उस सद्पुरूष के पक्ष में दे दिया।

देव-यक्षिणी चीखते,चिल्लाते,रोते रहे,
मगर उनकी करूण पुकार किसी ने नहीं सुनी।

देव निराश हो वापस जाने लगा तो,
" रूको देव ",
सद्पुरूष ने यक्षिणी का हाथ,देव के हाथों में देते हुए कहा,
"यह इन्सानों की बस्ती है जिनने,
अपने मूल्य,संस्कार,विचार खो दिये हैं,
ये हैवान,गिद्ध,भेड़िए,काॅकरोच हो गये हैं,
इनकी नजर दूसरों की बहन-बेटियों,
स्त्रियों,धन,सत्ता,कुर्सियों पर होती है।"

"भविष्य में किसी जंगल में रात बिता लेना,
जंगली जानवरों पर विश्वास कर लेना,
किसी अमानुष इन्सान पर विश्वास नहीं करना,
ये तो धर्मालयों में भी अपने स्वार्थ के लिए जाते हैं,
लिव-इन में रहते हैं,माँ-बाप को वृद्धाश्रम छोड़ आते हैं,
जाओ,अपने घर,देवलोक लौट जाओ,वापस नहीं आना।

# ● " इडियट " ● #

 # " इडियट-नामा "  #---102116/06/26बरसना होता है बादलों को तो वे, जंगल-पहाड़,शहर-गाँव नहीं देखते हैं।जिनको पानी होती है ...
16/06/2026

# " इडियट-नामा " #---1021

16/06/26

बरसना होता है बादलों को तो वे,
जंगल-पहाड़,शहर-गाँव नहीं देखते हैं।

जिनको पानी होती है मंजिल,
वे मौसमों का मिज़ाज नहीं देखते हैं।

इम्तहान नहीं देखते हैं कोई,
सभी परिणाम देखते हैं,
किसीको मतलब नहीं है कि,
जिन रास्तों पर चलकर आया है,
उनमें कितने काँटे बिछे थे,
आई होगी कितनी मुश्किलें,
पाँव लहुलुहान हुए होगें,
ज़ख़्म कितने गहरे हुए होगें,
मंज़िल की चाह रखनेवाले,
कभी पाँवों के छाले नहीं देखते हैं,
इश्क़ करने वाले दर्द नहीं देखते हैं।

बीत गया जो सफ़र ज़िन्दगी का,
मुश्किल ही रहा होगा,
निष्प्राण आँखों में देखने वाली आँखें,
फिर सजीव नहीं रहती,
किसको पता है कि शव को चिता में,
जलन होती है कि नहीं,
जिन्दा बच गया जलन महसूस करता है,
मरूभूमि के मुसाफ़िर रास्ते में छाँव नहीं देखते हैं।

इश्क़ करने वाले चेहरा नहीं, दिल देखते हैं,
जो रखते हैं हौसला वे सैलाब नहीं देखते हैं ।

# ● " इडियट " ● #

 # " इडियट-नामा "  #---102016/06/26पाॅश इलाके में हो अपना, सबसे न्यारा,बड़ा सा खुबसूरत बंगला, मोटर-गाड़ी,नौकर-चाकर,हीरा-...
16/06/2026

# " इडियट-नामा " #---1020

16/06/26

पाॅश इलाके में हो अपना,
सबसे न्यारा,बड़ा सा खुबसूरत बंगला,
मोटर-गाड़ी,नौकर-चाकर,
हीरा-जवाहरात,सोना-चाँदी,
कालाबाजारी,अवैध कमाई,
विलासिता के प्रचुर साधन,
हर चीज ब्राॅण्डेड, लग्जिरियस लाईफ,
गुड़िया सी फैशनेबल,खुबसूरत वाईफ,
क्या यही है ज़िन्दगी,
अच्छे चरित्र,विचार,शान्ति-सुकून कुछ भी नहीं।

भ्रष्टाचार,रिश्वत,बेईमानी,चाटुकारिता,
क्या यही है सरकारी नौकरी,
ईमानदारी,स्वाभिमान कुछ भी नहीं।

येन-केन-प्रकारेण सत्ता पाने के लिए,
बेचना ज़मीर-ईमान अपना,
समझना देश को जागीर अपनी,
सेवक की शपथ लेकर,हो जाना शहंशाह,
राजनीति का यही मूल्य,अर्थ,धर्म,विकल्प तो नहीं।

करना बिना बात आन्दोलन स्वार्थ के लिए,
विवेकहीन,दृष्टिहीन होकर,देना समर्थन,
न होना अनुशासित,न मानना नियम-कानून,
अच्छा नागरिक होने का यह धर्म तो नहीं,

लिव-इन,गे,पब-बार,कल्ब,ड्रग्स,
अर्द्धनंग्नता,बेशर्मी,फूहड़ता का कल्चर,
क्या यही है आधुनिकता,
ये हमारी संस्कृति के अंग तो नहीं।

माँ-बाप को वृद्धाश्रम,भाई,भाई का दुश्मन,
यह हमारी सामाजिक व्यवस्था तो नहीं।

क्या देह,वासना,उपहार को कहते हैं प्यार,
आत्मा,वफ़ा,विश्वास,धैर्य,त्याग कुछ भी नहीं।

खाते हो जीने के लिए कि,जीते हो खाने के लिए,
भूखे को खिलाने से बड़ा उपकार तो कुछ भी नहीं।

हिम्मत रखें,धैर्य रखें,हौसला रखें,प्रयास रखें,
खुद पर,भगवान पर "इडियट", विश्वास रखें,
क्या मुश्किलों में हम इतना भी कर सकते नहीं,
एक-दूजे को समर्पित भाव से प्रेम कर सकते नहीं।

# ● " इडियट " ● #

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