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◆सबको मुकम्मल जहां नही मिलता◆पढ़िए और सीखिए के सबकुछ हासिल कभी नही हो सकता।●●●●●●●शमी क्रिकेटर की कहानी पर्दे के पीछे की-...
30/10/2023

◆सबको मुकम्मल जहां नही मिलता◆पढ़िए और सीखिए के सबकुछ हासिल कभी नही हो सकता।●●●●●●●शमी क्रिकेटर की कहानी पर्दे के पीछे की---
जिंदगी सबको सबकुछ नहीं देती। बड़ा नाम देती है तो बहुत कुछ छीन लेती है। मो. शमी के पास क्या कुछ नहीं है। बेस्ट बॉलर का तमगा है। पैसा है। घर है। सम्मान है। लेकिन परिवार नहीं है। पत्नी के गंभीर आरोप हैं। अपनी ही बेटी से मिल नहीं सकते।

शमी जब अकेले होते होंगे तब अपनी उपलब्धियों का जश्न मनाने के लिए किसी को खोजते जरूर होंगे।
लेकिन कोई दिखता नहीं होगा। मैदान में भी कभी कोई ऐसा नज़र नहीं आया जो स्पेशली शमी के लिए दिखा हो।

शमी के पास तमाम उपलब्धियों के बीच एक सूनापन है जिसे कोई नहीं भर सकता। शायद शमी भी नहीं...


01/06/2023

अर्ज़ है-: मुंतज़िर मेरे ज़वाल के हैं..
मेरे अपने भी कमाल के हैं..
(ज़वाल=बुरा वक्त)
(मुंतज़िर=इंतेज़ार करने वाले)

16/12/2022

अर्ज़ है-: बातों में तेरा जिक्र नही..ज़ुबाँ पे तेरा नाम नहीं...
इससे बढ़कर ऐ-हामिद..
दुनिया में इन्तेक़ाम नही..

अर्ज़ है-: अब तो खुश हो जा बेरहम...तू तो तू...हमने तेरा शहर भी छोड़ दिया..👍
16/12/2022

अर्ज़ है-: अब तो खुश हो जा बेरहम...
तू तो तू...हमने तेरा शहर भी छोड़ दिया..👍

12/12/2022

बड़ा वो नही है जिसके पास रुपिया पैसा,महंगे बड़े घर व गाड़ियां हैं..नबी की सीरत है कि
बड़ा वो है जिसके पास बैठने वाले को छोटा न महसूस हो...और आजकल तो लोग हैसियत देखकर कुर्सी व इज़्ज़त देते हैं..

10/12/2022

अर्ज़ है-: दोष कांटों को क्या दे हामिद..
वो तो अपनी जगह सही थे..हमने ही कांटों पे पैर रखे..

10/12/2022

अर्ज़ है-: अब तो खुश हो जा मेरे महबूब..
तू तो तू....तेरा शहर भी हमने छोड़ दिया..

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