20/01/2023
किसी तिनके सा तिर रहा हूँ
एक खाली सी जगह है....
मेरा वह , जो देख पाता है यह तिरना
सिमट नहीं पाता
और वह जो सिमट जाता है
दिशाहीन (अंधेपन में) भटकता है...
आलोक है
यह जानने वाले को उसकी उष्णता का आभास
क्यों नहीं होता ?
जिसे होता है
वह क्यों किसी तमस में जीता है ?
# उल्लास