Priyanka Dwivedi

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एकांत
06/03/2026

एकांत

दो नयन असित जो ख्वाबों में रहते हैं सिक्त सदा...
05/02/2026

दो नयन असित जो ख्वाबों में रहते हैं सिक्त सदा...

20/05/2025

मेरी लाइफ की मूवी का टाइटल होगा "बवंडर" 🌪️ अब आप बताओ

🌧️वर्षा जल🌧️बरसात की हर इक बूँद में कुछ अपना पन सा होता है।इसकी हर बूँद से ही सागर के शीप में मोती सोता है।इसको पाने की ...
28/03/2024

🌧️वर्षा जल🌧️

बरसात की हर इक बूँद में कुछ अपना पन सा होता है।
इसकी हर बूँद से ही सागर के शीप में मोती सोता है।
इसको पाने की खातिर, रेतों का हर कण रोता है।
पर यही कीमती जल धरती पर आ अस्तित्व को खोता है।

हमको मालूम जरूरत है, पर कीमत है मालूम नहीं।
इस कारण ही तो वर्षा जल, बहता रहता है कहीं-कहीं।
पर क्या हमने यह सोचा है, की इसका भी इस सोंता है।
जो चला गया फिर न आना, तो यह बर्बाद क्यों होता है?
जल है तो मानव जीवन है, जल से ही मानव का तन है।
गर जल ही गया जीवन ही गया
धनवान ही क्या फिर निर्धन है।

जब यह माया है इस जल की एहसास क्यों नहीं होता है?
ईश्वर प्रसन्न जब होता है, तब अपने हाँथ खोलता है।
यह जल आशीष है ईश्वर का, यह उसका नाती-पोता है।
पर देख दुर्दशा जल कण की, वह ईश्वर भी खुब रोता है।

बस इसीलिए सूखा पड़ता और बाढ़ है आती नदियों में।
क्योंकि हमने जल की कीमत है न जानी इन सदियों में।
फिर पूजा, यज्ञ, भजन करके जैसे भी जल को बुलाएगा।
ईश्वर न देगा एक बूँद, वह रोया है तो रुलाएगा।

इस कारण समझो वर्षा के जल की क्या कीमत होती है।
यह जीवन देने वाला है, यह बिना शीप का मोती है।
वर्षा का जल एकत्र करो फिर देखो क्या-क्या होता है।
-प्रियंका द्विवेदी

Priyanka Dwivedi
Mission Green Mumbai



हम नाव ले चले सागर में, मेरे नाथ खेवैया बन जाना जब तक अनुकूल परिस्थिति है, होती धारा प्रतिकूल नहींहिम्मत बांधे रखूंगा मै...
12/03/2024

हम नाव ले चले सागर में, मेरे नाथ खेवैया बन जाना
जब तक अनुकूल परिस्थिति है, होती धारा प्रतिकूल नहीं
हिम्मत बांधे रखूंगा मैं, होगी मुझसे कोई भूल नहीं
पर थक सकते हैं हाथ मेरे, मन भी विचलित हो सकता है
पलके लग जाए संभव है, जल अति कंपित हो सकता है
हो सकता है की दिशाभ्रमित हो, राह भटक जाऊं जल में
हे शिव शाश्वत शशि किरणों से तुम राह दिखा देना पल में
मैं नया नया मांझी मालिक, मेरे साथ बटोहिया बन जाना
हम नाव ले चले सागर में, मेरे नाथ खेवैया बन जाना
- प्रियंका द्विवेदी
🙏 🌼
#शिव
#महाकाल

पुरूष एवम महिला में उतना ही फर्क है जितना मकान और घर में।उसी घर को परिभाषित करती कुछ पंक्तियां 🙏आँख खुले उसके आँचल में, ...
08/03/2024

पुरूष एवम महिला में उतना ही फर्क है जितना मकान और घर में।

उसी घर को परिभाषित करती कुछ पंक्तियां 🙏

आँख खुले उसके आँचल में, दुग्ध पिला जीवन देती है।
दिन भर उसकी गोद में सोते, किसे पता वह कब सोती है।
नव शिशु की आँखों के आँसू, चीखों में भी वह होती है।
उसके बिन घर खँडहर तो फिर बोलो क्या माँ घर होती है

बच्ची बनकर बात-बात पर, रूठ मनाकर वो सोती है।
हाथ बटाकर घर में, अपनी चाची से बातें करती है।
वर ढूढंन को निकले बाबा, जान गई छुप-छुप रोती है।
विदा हुई सूनापन डसता, तो क्या बेटी घर होती है।

पिया देख मन में इठलाती, उसको तन-मन सब देती है।
देश पराया, लोग पराए सबको वह अपना लेती है।
सुख भी पाया, दुःख भी झेला, पन्नों में धरती रहती है।
बिना वधू परिवार अधूरा, तो क्या वधू ही घर होती है।

दम्पति का आधा हक़ उसका, पति की अर्द्धांगिनी होती है।
सजनी बन अपने सजना की बाँह सदा थामे रहती है।
हर रिश्ते को निभा रही वह, पति की मनभावन होती है।
उसे छोड़ पति जी न पाए, तो क्या पत्नी घर होती है?

ब्याह दिया बेटा, दुल्हिन को लाकर घर में खुश होती है।
उठा के अपने जेवर, अपनी गृहलक्षमी को दे देती है।
अगर गिरी दीवार तो छत का टिक पाना नामुमकिन है।
ऐसे ही घर छोड़ चली, तो क्या सासू ही घर होती है?

हर रिश्ते की नींव में बेटी, कंगूरा बेटी होती है।
दुर्गा, काली, लक्ष्मी, वैष्णों, सरस्वती बेटी होती है।
जो हर क्षण शाश्वत, उसको ही पाकर घाटा कहाँ भला।
तो फिर बोलो बेटी के होने पर, दुनियाँ क्यों रोती है?

#महिलादिवस

राम काज कीन्हे बिना मोहि कहां विश्राम 🚩इन्हीं भावों से सराबोर व्यक्तित्व श्री भगवती प्रसाद उत्तम (15/07/1966 - 01/10/199...
23/01/2024

राम काज कीन्हे बिना मोहि कहां विश्राम 🚩

इन्हीं भावों से सराबोर व्यक्तित्व श्री भगवती प्रसाद उत्तम (15/07/1966 - 01/10/1998) की पुत्र वधू होना मेरे लिए सौभाग्य की बात है, वे आरएसएस में शामिल हुए 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद का ढांचा गिराया और वहां जो मंदिर का ढांचा पहले से उपस्थित था उसकी कुछ ईंटे जो कि साबुत नहीं थीं लेकर आए, राम की कुछ ऐसी अनुकंपा रही की छिपते छिपाते सकुशल घर (कानपुर) पहुंच गए।

1992 में फतेहपुर में पांच दिवसीय सत्र में परमपूज्य गुरुदेव पंडित श्री राम शर्मा जी की सूक्ष्म उपस्थिति में गायत्री मंत्र की दीक्षा ले रामराज की वापसी को संकल्पित गायत्री परिवार के माध्यम से जीवन पर्यंत राम काज में लगे रहने का प्रण लिया। 1994 में चित्रकूट अश्वमेध यज्ञ की टोली में भी गए तत्पश्चात सपरिवार शान्तिकुंज हरिद्वार में जीवनदानी हो गए। आश्रम में कई प्रकार की सेवाएं देना जैसे गायत्री विद्यापीठ में शिक्षण का कार्य, उस समय गायत्री शक्तिपीठ में सुरक्षाकर्मी बाहर के नहीं होते थे, आश्रम के अंदर ही टोलियां बनती थी जो इस कार्य को सुचारू रूप से करती थी उसमें भी वे सहर्ष संलग्न रहे, कुछ ऑडियो बुक्स (सुनसान के सहचर 1,2,3 ) भी रिकॉर्ड की, प्रज्ञा गीतों के वीडियो में भी देखा है उन्हें मैंने।

गायत्री परिवार का विस्तार पूरे विश्व में है, गायत्री परिवार की टोलियां जन जागरण हेतु हर क्षेत्र में जाती रहती हैं, 1998 में वह एक टोली नायक के रूप में एक गाड़ी में चार अन्य मित्रों संग राम काज हेतु शांतिकुंज हरिद्वार से निकले, सुल्तानपुर उत्तरप्रदेश में कार्यक्रम संपन्न होने के बाद आगे जाना था, दिन बड़ा पावन था "विजयदशमी" तो रामलीला देखने हेतु अयोध्या धाम की ओर प्रस्थान किया और रास्ते में ही एक दुर्घटना में 32 वर्ष की आयु में शहीद हो गए।

मैंने उन्हें नहीं देखा पर जितना जाना है उससे तो यही लगता है कि वे प्रतिभा, साहस और अनुभवों के धनी थे, वे आज अगर हमारे साथ होते तो हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता और आज अपने प्रयासों को सफल होते देखते तो कितना प्रसन्न होते। मुझे गर्व है कि मैं ऐसे व्यक्ति की पुत्र वधू हूं।

राम राम तो सब करै दशरथ करै न कोय।
जो दशरथ न होय तो राम कहा से होय।।

धनवाद! पापा मुझे मेरे राम देने के लिए🙏

ऐसे कितने ही वीर हैं जिन्होंने राम काज में आगे बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया, कितनों ने मां सरयू की गोद मे दम तोड़ दिया, उन सभी पुण्यात्माओं को नमन जिनके अथक प्रयासों और प्राणों की आहुतियों के परिणाम स्वरूप इस भव्य दिन के हम साक्षी बने
कोटि- कोटि नमन 🙏
#राममंदिर #रामआयेंगे #राम #आरएसएस #बजरंगदल #शिवसेना #सनातनी #सनातन #शांतिकुंज #गायत्रीपरिवार

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