04/06/2026
Indresh Upadhyay
हमारे पूज्य जय-जय की वाणी से जो अनुराग अंकुरित हुआ,
वह आपके दर्शन पाकर साकार हुआ।
अपरिचय की ग्लानि भी करुणा में विलीन हुई,
और गुरुसान्निध्य की अभिलाषा पूर्ण हुई।
कृतज्ञ हूँ उस वाणी की, जिसने पथ दिखाया,
कृतज्ञ हूँ उस कृपा की, जिसने चरणों तक पहुँचाया। 🙏🌼
चरणों में यही प्रार्थना है कि आपका स्मरण, आपका सान्निध्य और आपकी कृपा सदा बनी रहे। 🙏✨
और नतमस्तक हूँ आपकी अपार करुणा के द्वार।Shri Rajendra das ji Maharaj Malook Peeth Vrindavanavandavan