28/11/2021
अक़्सर सोचता हूँ कि अगर वो होते तो
शायद ज़िन्दगी कुछ और होती
वो होते तो उन्हें बताता, उनसे सबकी शिकायत लगाता
जिस जिस ने मुझे रुलाया है, उन सबको सबक सिखाता
वो होते तो घर में मातम के बजाय ख़ुशियां होती
और जहन्नुम की जगह जन्नत जैसी ये दुनिया होती
वो होते तो मुझे कभी झुकने ना देते
कामयाबी से पहले मुझे रुकने ना देते
वो होते तो रास्ता दिखता भले ही अंधेर होता
और वो होते तो मैं भी आज खुद में शेर होता
वो होते तो कभी टूटे ना मेरे सपने होते
और पापा होते तो बाजार के सारे खिलौने अपने होते...
पर वो नहीं हैं, वो नहीं हैं कि मेरा हाथ थाम कर उठा ले
अगर वो नहीं आ सकते तो मुझे ही अपने पास बुला ले
वो मुझसे नाराज़ नहीं पर फिर भी मुझे नहीं बुलाएंगे
और एक मसला ये भी है कि वो इतने दूर हैं मुझसे
कि मैं कितना भी रो लूं, मैं कितना भी चीख़ लूं
पर वो सुन नहीं पाएंगे, वो सुन नहीं पाएंगे.....