06/11/2025
याद नहीं कब खुद को हंसते देखा था
याद नहीं कब खुद को जीते देखा था
पहले सी वो बात नहीं
मुझमें मेरा भी अब साथ नहीं
क्योंकि मैं अब मैं ही नहीं
कब खुद के लिए किया श्रृंगार
कब खुद ही खुद से किया प्यार
अब पहले से वो दिन रात नहीं
मुझमें मेरा भी अब साथ नहीं
क्योंकि मैं अब मैं भी नहीं
दोस्त नाते सब छूट गए
वो बचपन के धागे टूट गए
अब सुलझने की कोई राह नहीं
मुझमें मेरा भी अब साथ नहीं
क्योंकि मैं अब मैं सी नहीं
आईना भी रूठ गया
ख्वाबों का मंजर फुट गया
कोई फिर से संवारे ऐसा कोई हाथ नहीं
मुझमें मेरा भी अब साथ नहीं
क्योंकि मैं अब मैं ही नहीं!