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02/01/2022

ये नव वर्ष हमें स्वीकार नहीं

रामधारी सिंह दिनकर द्वारा रचित यह कविता वह सब कहती है जो मैं अनुभव करता हूँ| तो चलो पढ़ते हैं, सुनाते हैं:

ये नव वर्ष हमें स्वीकार नहीं
है अपना ये त्यौहार नहीं
है अपनी ये तो रीत नहीं
है अपना ये व्यवहार नहीं
धरा ठिठुरती है सर्दी से
आकाश में कोहरा गहरा है
बाग़ बाज़ारों की सरहद पर
सर्द हवा का पहरा है
सूना है प्रकृति का आँगन
कुछ रंग नहीं , उमंग नहीं
हर कोई है घर में दुबका हुआ
नव वर्ष का ये कोई ढंग नहीं
चंद मास अभी इंतज़ार करो
निज मन में तनिक विचार करो
नये साल नया कुछ हो तो सही
क्यों नक़ल में सारी अक्ल बही
उल्लास मंद है जन -मन का
आयी है अभी बहार नहीं
ये नव वर्ष हमे स्वीकार नहीं
है अपना ये त्यौहार नहीं
ये धुंध कुहासा छंटने दो
रातों का राज्य सिमटने दो
प्रकृति का रूप निखरने दो
फागुन का रंग बिखरने दो
प्रकृति दुल्हन का रूप धार
जब स्नेह – सुधा बरसायेगी
शस्य – श्यामला धरती माता
घर -घर खुशहाली लायेगी
तब चैत्र शुक्ल की प्रथम तिथि
नव वर्ष मनाया जायेगा
आर्यावर्त की पुण्य भूमि पर
जय गान सुनाया जायेगा
युक्ति – प्रमाण से स्वयंसिद्ध
नव वर्ष हमारा हो प्रसिद्ध
आर्यों की कीर्ति सदा -सदा
नव वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा
अनमोल विरासत के धनिकों को
चाहिये कोई उधार नहीं
ये नव वर्ष हमे स्वीकार नहीं
है अपना ये त्यौहार नहीं
है अपनी ये तो रीत नहीं
है अपना ये त्यौहार नहीं

Are you a poet or a storyteller and interested in live performance, here is your chance... send your enteries to 'shandm...
11/12/2021

Are you a poet or a storyteller and interested in live performance, here is your chance... send your enteries to '[email protected]' or WA on 9811480656... All ages above 16 are welcome

किसी सनद की ज़रूरत नहीं पड़ी है 'ज़फ़र'हमारा ऐब ही आख़िर हुनर हमारा हुआ- ज़फ़र इक़बालPoets and Storytellers...intersted in ...
07/12/2021

किसी सनद की ज़रूरत नहीं पड़ी है 'ज़फ़र'
हमारा ऐब ही आख़िर हुनर हमारा हुआ
- ज़फ़र इक़बाल

Poets and Storytellers...intersted in performing live, then write to us and leave your entries at

'[email protected]' or 'WA at 9811480656'

Venue: Gurgaon, Dates Jan 15th '22

11/11/2021

Lyrics: Yasra Rizvi
Voice: Ash

21/10/2021

Khwab itne to dagabaz na thay mere kabhi... Unknown

Voice: Ash

21/10/2021

सुन ली जो ख़ुदा ने वो दुआ तुम तो नहीं हो
दरवाज़े पे दस्तक की सदा तुम तो नहीं हो

सिमटी हुई शर्माई हुई रात की रानी
सोई हुई कलियों की हया तुम तो नहीं हो

महसूस किया तुम को तो गीली हुई पलकें
भीगे हुये मौसम की अदा तुम तो नहीं हो

इन अजनबी राहों में नहीं कोई भी मेरा
किस ने मुझे यूँ अपना कहा तुम तो नहीं हो

08/10/2021

Lyrics - Dr. Manu C.
Voice Ash

03/09/2021

अक्स कितने उतर गए मुझ में
फिर न जाने किधर गए मुझ में

मैं ने चाहा था ज़ख़्म भर जाएँ
ज़ख़्म ही ज़ख़्म भर गए मुझ में

मैं वो पल था जो खा गया सदियाँ
सब ज़माने गुज़र गए मुझ में

ये जो मैं हूँ ज़रा सा बाक़ी हूँ
वो जो तुम थे वो मर गए मुझ में

मेरे अंदर थी ऐसी तारीकी
आ के आसेब डर गए मुझ में

पहले उतरा मैं दिल के दरिया में
फिर समुंदर उतर गए मुझ में

कैसा मुझ को बना दिया 'अम्मार'
कौन सा रंग भर गए मुझ में

29/08/2021

अब मजीद उससे यह रिश्ता नहीं रखा जाता
की जिस्से एक शक्स का पर्दा नहीं रखा जाता
एक तो बस में नहीं तुझे से मुहोबत ना करूँ
और फिर हाथ भी ह्ल्का नहीं रखा जाता

28/08/2021

मुझ से मत पूछो के उस शक्स में क्या अच्छा है
अच्छे अच्छओं से मेरा बुरा अच्छा है
किस तरह मुहोबत में वो मुझ से जीत गया
अब यह ना कहना की बिस्तार में बड़ा अच्छा है

07/08/2021

कह भी दे अब वो सब बातें

जो दिल में पोशीदा हैं

सारे रूप दिखा दे मुझ को

जो अब तक नादीदा हैं

एक ही रात के तारे हैं

हम दोनों उस को जानते हैं

दूरी और मजबूरी क्या है

उस को भी पहचानते हैं

क्यूँ फिर दोनों मिल नहीं सकते

क्यूँ ये बंधन टूटा है

या कोई खोट है तेरे दिल में

या मेरा ग़म झूटा है

26/07/2021

कुछ यादें है उन लम्हों की
जिन लम्हों में हम साथ रहे
खुशियों भरे जज़्बात रहे
एक उम्र गुज़ारी है हमने यहाँ
जहां रोते रोते हस्ते थे
हम रोज़ यहाँ जब मिलते थे
तो सब के चेहरे खिलते थे
और क्या वह मंज़र होता था
जब सब मिलकार बाते करते थे
हम सोचो कितना हस्ते थे
जो गुंज हमारी हसीं की
बस एक पुरानी याद बनी
यह बाते उन लम्हों की है
जिन लम्हों में हम साथ रहे

Ash...April 2021

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