20/06/2026
सुन नीली कबूतरी
EWS तो समझ आता है कि आर्थिक आधार पर है, लेकिन आरक्षणधारियों का क्या जिनके माता-पिता IAS, IPS हैं, बड़े प्राइवेट स्कूल, कोचिंग और करोड़ों के बिज़नेस हैं?
गज़ब की विडंबना है! जो आर्थिक रूप से पूरी तरह सक्षम हैं, उनके बच्चे भी सिर्फ रोज़गार में ही नहीं, बल्कि पूरी शिक्षा व्यवस्था में जातिगत आरक्षण का मज़ा ले रहे हैं।
क्या आरक्षण का मकसद वाकई कमज़ोरों को उठाना था, या मलाईदार तबके (Creamy Layer) की पीढ़ियों को और अमीर बनाना? हक़ पर डाका डालना बंद होना चाहिए!