13/08/2024
बाँट लूट
बड़ी मज़ेदार बात मज़े ले ले कर देखी ।
परदादा ने बड़ी ज़मींदारी ख़रीदी थी । देखा नहीं बस सुना है । देखा तो तब जब दादा जी एक तिहाई पा कर ख़ुशी से झूम रहे थे । बिलकुल लग रहा था दादा ने ख़ुद कोई करिश्मा किया और पा गए धड़ाम से एक ज़मींदारी । खेती करनी तो आती नहीं थी । बस ज़मीन जोतने वाले से जो मिल जाए । लेकिन उसकी बदौलत बिरयानी और हुक्का तो गुड़गुड़ा ही रहे थे । और गाँव में मूँछ पर ताओ दे कर बोलते थे कि बहुत दिनों से घर के ड्योढ़ी पर दिखे नहीं । घर में प्रवेश तो कोई कर ही नहीं सकता था । दादा देखते ही देखते साठ के हो लिए ।
अब्बा और चारो चाचा ने कहा कि अब्बा अब बस बैठो आराम करो ।
सोमवार का खाना मेरे घर से और मंगल का गफ़ूर के घर से और बुध जुमेरात दोनों बड़े चाचा और छोटे चाचा पर ज़िम्मेदारी कम है तो सनीचर और इतवार वो देख लेंगे । और दादा ? दादा तो जैसे सब बंट गया और दादा लुट गए ।
दादा ने तो सही से मूँछ पर ताओ भी नहीं फेर पाए की अब्बा और चाचा ने दादा का काम लगा दिया । और तो और दादा का हुक्का भी बंद और मिलने लगा दाल भात । खाओ और जियो । और हाँ ज़्यादा जीने की भी ज़रूरत नहीं । दो चार साल में टिकट कटा लो वरना बाद में दवाई कौन कराएगा । दादा सब के बच्चों के बर्थ डे का केक कटते देखते तो हसरत होती की थोड़ा मुझे भी मिले ।
लेकिन दादा की डायबिटीज़ बढ़ेगी तो बे वजह दवाई । दादा का केक गोल ।
देखते देखते बड़े हुए और अब अब्बा और चाचा की हालत वैसी ही दादा जैसी है । दादा तो बिना दवाई खाए निकल लिये ।
बाँट का सिलसिला तो बंद नहीं हुआ और लुट गए हर बार बँटवारे में ।
1857 में मुग़ल बादशाह बहादुर शाह ज़फ़र को अंग्रेजों ने बाँट भी दिया और जो मिला वो लूट भी लिया और लूट बाँट कर ही रहे थे तब तक ईस्ट इंडिया कंपनी भी लुट गई और क्राउन राज्य क़ायम हो गया भारत में । देश को अंग्रेज मुक्त करने में कितने ही लोग शहीद हो गए और आज हमारी नज़र में अनाम शहीद या गुमनाम शहीद हो गए ।
1911 तक वीर सावरकर ने बहादुर शाह ज़फ़र को रानी झाँसी , तत्या टोपे व नाना साहब के साथ अपनी फोटो रखी और अंग्रेजों के आँख में आँख मिला कर बोले
ग़दर नहीं ये भारत का प्रथम स्वाधीनता संग्राम ।
फिर अंग्रेज़ी ने कहा चलो काला पानी और चलाओ कोल्हू ।फिर क्या था । बहुत बड़े बड़े नेता देश में आ गए । एक से बढ़ कर एक । मिस्टर जिन्ना ( गांधी जी बिना मिस्टर जोड़े जिन्ना का नाम नहीं लेते थे ) ने सोचा नेताजी की भीड़ है । एक से एक तो मैं क़तार में पीछे ना हो जाऊँ । तो आगे आने के लिए बोले मैं मुसलमान हूँ और मुसलमानों का सब से बड़ा नेता । रोज़ा नमाज़ सब बुढ़ापे में कर लूँगा । ये लो अभी अभी तो विचार आया था तब तक अंग्रेजों ने सावरकर जी को बोला यहाँ क्या कर रहे हो । उधर हिंदू संकट में है । और हिन्दुवादी राजनीति के एकल नेता बन गए । 1925 आते आते तो आर एस एस जैसी संथा ने सामाजिक अलख जगा दी ।
जागृति आ गई हिंदू और मुसलमान में ।
बाक़ी सिख , ईसाई , जैन सब को दोनों ने बोला की परेशान मत हो । हम तुम्हारा ख़याल रखेंगे ।
तो बस दे दनादन । करोड़ों लोग पीछे पीछे ।
भगत सिंह तो शहीद हो गए और उनके साथी सब शहीद हो गए ।
पता ही नहीं चला किसके लिये शहीद हुए । देश के लिए या देशवासियों के लिए ।
क्योंकि बड़े बड़े देशवासी तो देश के बँटवारे की सोच बना बैठे थे । और जिस देश के लिए वो शहीद हुए वो कौन था ? पश्चिम वाला या पूरब वाला या बीच वाला ।
1946 में तो एलान हो गया । निबट लेते हैं डायरेक्ट वन टु वन । और लूट गए कितने ही लोग ।
और अंततः आ ही गया अगस्त । दो तरफ़ से आवाज़ आई हैप्पी बर्थ डे तो मी । चलो केक काटो ।
और भारत विभाजन पर तीन तरफ़ जश्न और मनाने वाले दो ।
खूब जश्न खूब जश्न और जश्न मनाते मनाते दूसरे में में दो ने कहा तू ज़्यादा केक खा गया । नहीं नहीं केक तो मुझ को ही खाना था और तू भी कह रहा है मैं भी केक खाऊँगा । हूँ ये मुँह और मसूर की दाल ।
ये भी केक खाएँगे ।
हाँ हाँ अमी खाबू आमि खाबू और खूब खाबू ।
ये लो । ठीक से खाया भी नहीं और केक ही बंट गया ।
केक ख़त्म हो गया । दाल ख़त्म । आट्टा ख़त्म , चावल ख़त्म । यहाँ तक कि लाले पड़ गए सब चीज़ के ।
फिर भी हिंदुस्तान को बोले देखा
कैसे हिंदुस्तान में से हिन्दूस निकाल दिया । बहादुर लोग ऐसे ही होते हैं ।
और भारत सब को बाँट कर जश्न मनाता है ।
14अगस्त में उनका जश्न मनवा कर अपना जश्न ।
उनका बाँटने और लूट जाने का जश्न और यहाँ बाँट के जो बचा उसका जश्न ।
लेकिन दादा के बाद अब्बा और अब्बा के बाद आगे बाँट
और जो बाँट के मिला वो बहुत सुंदर है और बहुत है । इसे और बाँट से बचाना होगा ।
देश समाज से बनता है और समाज बँटा तो देश बँटा ही समझो । जागो और समाज को बंटने ना दो । समाज बँटा तो देश ना भी बंटे तो लुट तो जाएगा ही ।
देख तो रहे ही हो पश्चिम वाला और पूरब वाला कैसे कैसे बंट भी रहा है और लुट भी रहा है ।
आज़ादी का जश्न के साथ सब देख कर भाई ।
ए भाई ज़रा देख के चलो