19/02/2021
वो पुराना सा स्कूटर
सर्द दोपहर की,
कच्ची धूप और आधी छाँव में
अमर कॉलोनी की एक तंग सी गली में
वो पुराना सा स्कूटर !
छोटे शरारती बच्चे,
आते - जाते छेड़ते हैं।
पुराने टायरों को और भी पंचर करते हैं,
टूटे हैंडलों को भी मरोड़ते हैं!
और कभी- कभी
पुराने लैदर सीट की गोद में बैठने को,
एक-दूसरे से खूब लड़ते है।
पड़ौसी आते-जाते,
सलाम-दुआ तो करते है।
मगर मन ही मन घरवालों को
बहोत judge करते है।
" अरे ये पुराना सा स्कूटर,
यूँ ही गली में पड़ा रहता है।
maintain नहीं कर सकते,
तो कबाड़ीवाला भी तो ले जा सकता है। "
मगर इन पड़ोसियों ने,
स्कूटर का रौब नहीं देखा।
नए साल और दिवाली में,
घरवालों का शौक नहीं देखा।
घर के बागीचों और दीवारों के साथ-साथ,
स्कूटर की भी सफाई पुताई होती है।
टिम-टिमाते लाइटों के साथ साथ,
स्कूटर की भी सजावट होती है।
चमकता हुआ,
नया-नवेला सा स्कूटर अब खूब जंचता है।
दूर देस से लोग
छुट्टी लेकर आते है
स्कूटर के आस पास बैठकर,
जाने कितनी सारी
नयी - पुरानी
भूली - बिसरी
किस्से - कहानियां बतलाते है।
फिर महफ़िल बर्खास्त होती है,
और दिन ढलते हैं ,
धीमी आवाज़ और फ़ीकी मुस्कान के साथ,
बैग बस्ते बंधते है।
फिर शांत वीराने में,
दूर कहीं मोहल्ले में;
शरारती आवाज़ें गूंजती है।
एक आधी सी मुस्कराहट
आधी सी उम्मीद के साथ
उन बच्चों का फिर इंतज़ार करता है।
किसी बूढ़े रिटायर्ड बाबा जैसा
सर्द दोपहर की,
कच्ची धूप और आधी छाँव में
अमर कॉलोनी की एक तंग सी गली में
वो पुराना सा स्कूटर !
-विनायकी
(तृप्ति खड्गी वर्मा /फरवरी 2021)
-----------
I have spent good four years in Amarcolony. Quite an important phase of my life; new to adulthood and right before getting married. In the narrow lanes amongst the hustle-bustle of the colony ; lies a thousand stories!
This poem is not a sympathetic approach nor any sort of attempt to highlight any issue. This is just an observation presented in a metaphorical way!
---------
Dear folks, If you like my efforts in art & literature please follow my page vinayaaki on fb & Instagram!
Thank you! 🙏