30/12/2025
लौट आया जो फिर दिसंबर
गुजरते साल की चादर ओढ़े
तुमने कितना बदला कितना सीखा
कितने ख़्वाब बुने और तोड़े
कुछ बदल गया गर जीवन में
तो तुमको जाता साल मुबारक
वर्ना तो बस मौसम बदले दिन कुछ बदले
अंदर सब कफ वैसा ही है..
तो तुम्हे तुम्हारा हाल मुबारक