07/06/2026
छुट्टियाँ बिताने के पश्चात गोरखपुर से बैंकॉक लौटने से पूर्व हमारे आत्मीय मित्र एवं मित्रमंडली के महत्वपूर्ण स्तंभ श्री कीर्तन त्रिपाठी आज मेरे निज आवास पर स्नेहिल भेंट हेतु पधारे। यह आत्मीय मुलाक़ात अत्यंत सुखद, भावपूर्ण और यादगार रही। वर्षों से बने पारिवारिक एवं सांस्कृतिक संबंधों की ऊष्मा इस संवाद में सहज रूप से अनुभव हुई।
ईश्वर से प्रार्थना है कि उनका स्नेह, सहयोग और मित्रता का यह अमूल्य संबंध सदैव बना रहे तथा वे अपने कार्यक्षेत्र में निरंतर सफलता और यश प्राप्त करें।
डॉ. राकेश श्रीवास्तव
अंतर्राष्ट्रीय लोक कला साधक