Desi Freaks

Desi Freaks This Page Purpose is just to entertain the young Generation By blog video and story writer
so Plz Do

RIP......................
14/06/2020

RIP......................

बचपन, जवानी और लाउक डाउन......................(हर्ट टचिंग स्टोरी)ना चाहते हुए भी आज घर लौट आया । गांव अपने ऐसा  नहीं हैं...
09/06/2020

बचपन, जवानी और लाउक डाउन......................
(हर्ट टचिंग स्टोरी)
ना चाहते हुए भी आज घर लौट आया । गांव अपने ऐसा नहीं हैं की गाव आने का मन नहीं करता। ये ओही गांव हैं जो अभाव से भरा बचपन गुजरा था । अभाव इतना था कि साइकिल के टायर के लिए मार हो जाता था। कहा गया वह गांव? वह रविवार को 12:30 बजे शक्तिमान देखना , सुबह-शाम कबड्डी खेलना , लड्डू नचाना कहा गया वह गांव? फिर एक दिन काम की तलाश ने शहर (परदेश) दिखा दी। मुंबई से लौटने के बाद मेरा गांव , गांव नहीं रहा गया अब मोहल्ला बन गया था रिश्ते भले ही कच्चे रह गए थे ही लेकिन गांव की सड़क और घर पक्के हो गए थे । हर घर में बिजली , पानी और गैस सारी सुविधाएं उपलब्ध हो गई थी।
एक मेरा जमाना था जब रामायण आता था तो टीवी का एंटिना ही ठीक करने में बीतता । दीवारें भी जालिम लोशन की तरफ हो गई थी हर तरफ इंजीनियरिंग कालेज के एड लगे थे । वह दिन कब के बीत चुके थे जब दीवारों पर लोग गोबर की कंडी बनाया करते थे । पहले १४ दिन उसी स्कूल में रखा गया जहा से मैं कभी पढ़ा करता था आज फिर उसी क्लास को काफी देर से देख रहा था क्लास वहीं था लेकिन लाइटें और कलर थोड़ी अलग सी हो गई थी १४ दिन आइसोलेशन के बाद घर वाले ने ७ दिन अपने घर पर रहने की हिदायत दिए लेकिन बचपन के दोस्त ने अगवा कर के गांव का भ्रमण कराने लगे थे हमरा एक जमाना था टीवी ब्लैक एंड व्हाइट थी आज के घरों में कलर टीवी सेटअप बॉक्स के साथ हाथो में स्मार्ट फोन गांव और शहर का भेद मिटाने में लगे पड़े थे । गलियों में साइकिल कम मोटरसाइकिल ज्यादा दिखाई दे रहे थे। हरियाली का घुंघट हुआ करता था आज हरियाली बाहर निकल कर आ गई थी मास्क पहनकर ।
पता नहीं गांव के मोह ने घेर लिया या किसी गांव वाली ने अब मै शहर नहीं जाना चाहता।

(Jp kashyap)

रेडियो वाले चाचा ............. ( हर्ट टचिंग स्टोरी)कुछ ही दिन बीते हुए थे हमें अपना शहर छोड़ें । हम ने अपना रहने का ठिका...
06/06/2020

रेडियो वाले चाचा ............. ( हर्ट टचिंग स्टोरी)

कुछ ही दिन बीते हुए थे हमें अपना शहर छोड़ें । हम ने अपना रहने का ठिकाना एक सुन्दर से अपार्टमेंट में २ बीएचके का फ्लैट ले लिया मेरे फ्लैट से मेरे साइट की दूरी मजह १ किलोमीटर होगा। दूरी कम होने के कारण मै अपने से साइट दिन २ से ३ बार तो आ ही जाता। हमारे फ्लैट के बालकनी से एक घर दिखता था जब मैं अपना काम ख़तम कर लेता तो एक हल्की मीठी वाली चाय का कप लेकर बालकनी में बैठता ये मेरा आदत सा हो गया था । मेरे सामने वाले घर में एक चाचा जी रहते थे उनका घर बड़ा सा है ऐसा लगता था कि इस घर पूरा परिवार रहता है लेकिन ऐसा नहीं था । चाचा जी कभी अपने अपने दाढ़ी बनते तो कभी अपने बाइक को कपड़े पोचा करते ऐसा मैं ने कई दफा देखा। शायद मेरे ख्याल से जो चाचा जी है उनके बेटे हो और बेटी भी है हो सकता हो की चाचा जी के बेटी की शादी हो गई हो और बेटे की भी , बेटी की शादी के बाद और अपने सुसराल रह रही हो गई और हो सकता हो बेटा अपने नोकरी के चक्कर में किसी और शहर रह रहा होगा । लेकिन ऐसा कौन छोड़ता हो सकता बेटे की कोई मजबूरी रही हो या फिर हो सकता हो की बेटा अपने पिता जी को अपने पास रखने में बोझ समझता हो। चाचा जी के पास एक बड़ी वाली रेडियो थी देखने में बहुत पुरानी थी ये बड़ी वाली रेडियो में ढेर सारे चैनल आते हैं लेकिन चाचा जी एक ही चैनल हर बार सुनते थे चाचा जी काम सुनते थे इसी लिए आवाज थोड़ी तेज रखते थे जो कि कभी - कभी में भी सुन लिया करता । ये जो रेडियो के बिबिध भारतीय का आवाज है ना बहुत मीठा और प्यारा हैं शायद इसी लिए चाचा जी एक है चैनल सुना करते थे ऑफिस के काम के चलते मै कुछ दिन लिए बाहर गया था जब में आया तो कई दिन चाचा जी दिखे नहीं।
ये कहानी लिखते हुए मेरे आखे नम सी हो गई और मैं अपने घर बारे में सोचने लगा । किसी को अकेला ना छोड़ो कहीं ना कहीं हो अपनी जिंदगी में अकेला हो जाता है।

मै मुस्कुराया ही क्योंबात करीब एक महीना पहले की हैं रोज की तरह मै अपने साइट पर पहुंचा। सुबह - सुबह का टाइम था और मैं अपन...
03/06/2020

मै मुस्कुराया ही क्यों

बात करीब एक महीना पहले की हैं रोज की तरह मै अपने साइट पर पहुंचा। सुबह - सुबह का टाइम था और मैं अपना डायरी निकाला और ड्राइंग मै लेआउट करने लगा, तभी मेरा नजर एक खूबसूरत मोहतरमा पर पड़ा उनके हाथ में बड़ी सी फाइल, सर टोपी और उनकी शर्ट कंधे पर डबल स्टार मुझे एक समय ऐसा लगा कि मैंने कोई गलती तो नहीं कर दिया क्यों की जो मेरा साइट था वह पुलिस डिपार्टमेंट का था जमाना फेसबुक इंस्टा व्हाट्सएप और ट्विटर का था फिर भी हमारी बात उनकी निगाहों से होती गई समय बीतता गया और हमारी बात मुस्कान में बदल गई । एक दिन ऐसा आया जिस हाथ बडा फाइल था आज उसी हाथ में बड़ा सा ट्रॉली थी और एक हाथ में पेपर जो की उनके ट्रांसफर के पेपर रहे होंगे । दिल थम सा गया और मै भीगी निगाहों से उनको देखता रह गया । वह पास आकर बोली अब मुस्कुरा कर बाय बाय नहीं बोलोगे फिर मिलेंगे कभी ना कभी किसी ना किसी मोड़ पर।


नहीं भूल पाओगेकहते हैं ना जिस शहर मै आप की जवानी बीती हैं उस शहर को आप कभी नहीं भूल सकते हैं ऐसा ही कुछ मेरा भी कहानी है...
01/06/2020

नहीं भूल पाओगे

कहते हैं ना जिस शहर मै आप की जवानी बीती हैं उस शहर को आप कभी नहीं भूल सकते हैं ऐसा ही कुछ मेरा भी कहानी है मै अपना पढ़ाई पूरा कर के कई दफा इस शहर को छोड़ने की कोशिश किया लेकिन हर बार असफल रहा ये शहर हर बार बुला लेता है कुछ बीते चंद लम्हों और कुछ चंद यादों के लिए ।
आज एक बार फिर कोशिश इस शहर को छोड़ने के लिए , ऐसा नहीं है कि इस शहर रहने का मन नहीं है अब बहुत कुछ लोगों में बदल गया हैं।

't_forget

20/05/2020
20/05/2020

Video Out now go to link and watch full video on Youtube pls subscribe and press the bell icon never miss any update.

https://youtu.be/HK5TiB7VarM

Stay at home right now..
03/05/2020

Stay at home right now..

लम्बे अर्सो क बाद एक मुलाकात अपने आप से......
22/11/2019

लम्बे अर्सो क बाद एक मुलाकात अपने आप से......

Address

Gorakhpur
Gorakhpur
273012

Telephone

+918115676629

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Desi Freaks posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Establishment

Send a message to Desi Freaks:

Share