22/07/2026
देश में आज जो कुछ भी घटित हो रहा है,किसी की तो नाकामी है यह, जिसका जिम्मा लेकर सुधार करना आवश्यक है। मात्र चुप्पी और बहसें किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकतीं... अराजक तत्वों को छोड़ यदि केवल निर्दोष छात्रों के साथ हुए दुर्व्यवहार की बात करें तो,जो भी हुआ बिल्कुल गलत हुआ, अत्यंत निंदनीय है और शासन प्रशासन को सदा यह याद रखना चाहिए कि...
संसद के गलियारों ने जब जब हथियार उठाए हैं।
सिंहासन के सिर पर काले, घने मेघ मंडराए हैं।।
कभी उचित मांगों को जब दरबारों ने ठुकराया है
कठपुतली की भांति इशारों पर सबको नचवाया है
संविधान की गरिमा रक्खी गई न सत्ता के मद में
और घोषणा करी गई, रहना होगा सबको हद में
तब गलियों से उठते स्वर ने लोहे भी मनवाए हैं
संसद के गलियारों ने जब जब हथियार उठाए हैं।।
मत समझो जनता की खामोशी उसकी दुर्बलता है
धैर्य धरा का टूटा यदि फिर बचती बस विह्वलता है।
कितने दंभ मिले माटी में, कितने ध्वज झुक चुके यहां,
आहों की ज्वाला में कितने झूठे वैभव फुंके यहां
कितने ही साम्राज्य इन्हीं हुंकारों ने दफनाए हैं
संसद के गलियारों ने जब जब हथियार उठाए हैं।।
राजनीति ने राष्ट्रधर्म से जब जब निज नाता तोड़ा,
न्यायालय ने भय,लालच में साथ सत्य का जब छोड़ा
सत्ता वैभव तब क्षणभंगुर, जनता शाश्वत शक्ति हुई,
गिरे शीघ्र औंधे मुंह जिनको कुर्सी संग आसक्ति हुई
कालचक्र की ठोकर ने तब शीश कई झुकवाए हैं
संसद के गलियारों ने जब जब हथियार उठाए हैं।।
किन्तु इस पक्ष को भी नहीं नकारा जा सकता कि समय की मांग यह भी है कि ऐसे दुष्कर समय में सभी देशवासियों को बहुत ही सजग रहकर सतर्कता एवं विवेक के साथ कार्य करने की, सामंजस्य बिठाने की आवश्यकता है खासकर ऐसी परिस्थितियों में जब.....
देश तोड़ने वाले तत्वों ने जब पैठ जमाया है
निर्दोषों ने षड्यंत्रों से घिरा स्वयं को पाया है
निर्दोषों को आवश्यकता है बुरी शक्ति से बचे रहें
राजनीति के छलछंदों, जयचंदों से भी बचे रहें।
याद रखें ये राष्ट्र खण्ड करने की ताक लगाए हैं,
आड़ आपकी ले केवल कुछ स्वहित साधने आए हैं।।
युवा एवं विद्यार्थी ध्यान दें कि -
ओट में छुप आपकी ही खेल खेले जा रहे हैं
आप,जब लाठी चली,आगे धकेले जा रहे हैं
निष्कर्ष -
माँग समय की सदा रही है, सिंहासन सम्मान बने
शासन का हर निर्णय केवल भारत का अभिमान बने
जनसेवा इकमात्र धर्म हो, सत्ता केवल साधन हो
शासक जनता के मध्य मात्र,पिता पुत्र सा बन्धन हो
जिनके कारण बगिया के हर एक पुष्प मुस्काए हैं
युग युग से ऐसे ही शासक सबके मन को भाए हैं।।
~अंत्रिका सिंह ✍️✍️