25/09/2026
📢 राजस्थान का धर्मांतरण कानून: ईसाई समुदाय के लिए क्या समझना जरूरी है?
राजस्थान में विधिविरुद्ध धर्म-संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2025 लागू किया गया है। कानून का उद्देश्य बताए गए प्रतिबंधित तरीकों से होने वाले धर्म परिवर्तन को रोकना है।
⚠️ ईसाई पादरियों और विश्वासियों के लिए महत्वपूर्ण बात:
कानून में केवल धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति की ही नहीं, बल्कि ऐसे धर्म परिवर्तन के लिए उकसाने, सहायता करने, सहयोग करने या षड्यंत्र करने वाले व्यक्ति को भी आरोपी बनाए जाने का प्रावधान है।
📱 कानून में ऑनलाइन माध्यम और सोशल मीडिया से किसी व्यक्ति को धर्म परिवर्तन के लिए मनाने से संबंधित प्रावधान भी शामिल हैं। इसलिए धार्मिक प्रचार और व्यक्तिगत रूप से धर्म परिवर्तन कराने के आरोप के बीच अंतर को समझना जरूरी है।
⚖️ सजा के प्रावधान भी काफी कठोर हैं:
• सामान्य उल्लंघन — 7 से 14 वर्ष तक कारावास और कम से कम ₹5 लाख जुर्माना
• नाबालिग, महिला, दिव्यांग या SC/ST व्यक्ति से संबंधित मामले — 10 से 20 वर्ष तक और कम से कम ₹10 लाख जुर्माना
• सामूहिक धर्म परिवर्तन — 20 वर्ष से आजीवन कारावास और कम से कम ₹25 लाख जुर्माना
• कुछ अन्य गंभीर परिस्थितियों में — 20 वर्ष से आजीवन कारावास और कम से कम ₹30 लाख जुर्माना
• पहले दोषसिद्ध व्यक्ति की पुनः दोषसिद्धि पर — आजीवन कारावास तक और कम से कम ₹50 लाख जुर्माना।
📌 एक महत्वपूर्ण तथ्य: कानून में यह नहीं कहा गया है कि केवल ईसाई होना या ईसाई धर्म का पालन करना अपराध है। कार्रवाई उन परिस्थितियों में है जिन्हें कानून “विधिविरुद्ध धर्म-संपरिवर्तन” के रूप में परिभाषित करता है।
🙏 इसलिए राजस्थान के सभी विश्वासियों और चर्च के सेवकों को कानून के प्रावधानों को समझकर, कानूनी सीमाओं का पालन करते हुए अपनी धार्मिक गतिविधियां करनी चाहिए।
आप इस कानून के बारे में क्या सोचते हैं? अपनी बात शांतिपूर्ण और सम्मानजनक तरीके से कमेंट में लिखें।
#धर्मांतरणकानून