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प्रणतः क्लेश नासायः गोविंदाय् नमो नमः 🙏🙏

दिल्ली-पटना रूट की एक आम ट्रेन… भीड़ कम थी, लेकिन बोगी में बैठे एक लड़के के चेहरे पर गहरी उदासी साफ दिखाई दे रही थी। उम्...
12/01/2026

दिल्ली-पटना रूट की एक आम ट्रेन… भीड़ कम थी, लेकिन बोगी में बैठे एक लड़के के चेहरे पर गहरी उदासी साफ दिखाई दे रही थी। उम्र लगभग 18–19 साल। सिर झुका हुआ और आंखें सूजी हुई।
इसी दौरान एक किन्नर करीब आई। आमतौर पर लोग किन्नरों को पैसे देकर आगे बढ़ जाते हैं, लेकिन यहां मामला अलग था।
किन्नर: “बेटा, कुछ थोड़ा दे दे”
लड़का धीरे से बोला—
लड़का: “मेरे पास पैसे नहीं हैं… और दो दिन से मैंने कुछ खाया भी नहीं…”
इतना बोलते ही उसकी आवाज भर्रा गई और आंखों से आंसू टपकने लगे। किन्नर चौंक गई, रुकी, और बैठ गई।
किन्नर: “रो क्यों रहा है? क्या हुआ?”
लड़का बोला—
“घर की हालत खराब है… परिवार को छोड़े दो महीने हो गए… काम नहीं मिल रहा… और आज जेब में एक रुपया भी नहीं…”
किन्नर ने बिना एक पल सोचे अपनी कमर के पोटली से पैसे निकालकर लड़के के हाथ में रख दिए—100 नहीं, 200 नहीं… जितना उसके पास था सब दे दिया।
किन्नर: “बेटा, पेट पहले संभलता है, जिंदगी बाद में… जा कुछ खा ले।”
लड़का बार-बार मना करता रहा, लेकिन किन्नर ने कहा—
“आज मैं तेरी मां बनी, कल किसी और की भी बन सकती हूँ… जरूरत में इंसान को इंसान की जरूरत होती है।”
लड़का फूट-फूटकर रो पड़ा। आसपास के यात्री भी चुप हो गए। कोई हंसा नहीं, कोई मजाक नहीं—उस डिब्बे में पहली बार किन्नर की पहचान ‘इंसान’ के तौर पर हुई।
ये सिर्फ कहानी नहीं—समाज की एक सच्चाई है
हम अक्सर किन्नरों को देखकर नजरें फेर लेते हैं। उनका मजाक बनाते हैं, उनके काम को नीचा समझते हैं। लेकिन उस ट्रेन में रोल उलट गया—आज मदद देने वाला वही था जिसे समाज सबसे आखिरी पायदान पर रखता है।
इंसानियत का असली चेहरा
इंसानियत जाति, धर्म, जेंडर या पेशे से नहीं बंधी होती। कभी-कभी सबसे मदद वही करता है जिससे उम्मीद सबसे कम होती है।
आज की दुनिया में जहां लोग खुद के लिए जिंदा हैं, वहीं ऐसे पल याद दिलाते हैं कि—
“इंसान अच्छा हो, यही काफी है। बाकी पहचानें बाद में भी बताई जा सकती हैं।”

12/01/2026

जय श्री राम

12/01/2026

जय श्री कृष्ण

03/01/2026

जनता जब एक नाकाबिल और नालायक व्यक्ति को सत्ता सौंप देती है तो ऐसे ही सिसकियों वाली तस्वीर देखने को मिलती है..

रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान एक पिता अपने बेटे और पत्नी को विदा कर रहा है।

क्योंकि वह लड़ने के लिए वहीं रुक रहा है, जबकि वे ट्रेन से निकल रहे हैं।

वह बर्फ में दौड़ता है, लड़के को हंसाने की कोशिश करता है, लेकिन बच्चा अपनी माँ की आँखों में उदासी महसूस कर लेता है और मां के साथ रोने लगता है।

यह आर्मी मैन शरीर के साथ युद्ध में होगा और इसकी पत्नी और बच्चे दिल और दिमाग के साथ युद्ध में होंगे।

अगर आपकी नज़र तेज है तो इसमे चार गलती ढुंढ कर बताओ 🙂💥💢
25/12/2025

अगर आपकी नज़र तेज है तो इसमे चार गलती ढुंढ कर बताओ 🙂💥💢





अगर आपकी नज़र तेज है तो इसमे चार गलती ढुंढ कर बताओ         Just funda
24/12/2025

अगर आपकी नज़र तेज है तो इसमे चार गलती ढुंढ कर बताओ





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अगर आपकी नज़र तेज है तो इसमे कोई एक गलती बताओ         Just funda
24/12/2025

अगर आपकी नज़र तेज है तो इसमे कोई एक गलती बताओ





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14/11/2025

गिरगिट जिताना भी रंग बदल ले रहेगा वही

13/11/2025

देश मे ना जाने कितने और ऐसे जेहादी मानसिकता वाले डॉक्टर हमारे अस्पतालों मे होंगे ?
जो काफ़िर (हिंदू) मरीजो के साथ क्या करते होंगे।


13/11/2025

यही किसान केजरीवाल के समर्थन से दिल्ली बॉर्डर पर धरना दिए बैठे थे आज उन्ही किसानों पर केजरी की पंजाब सरकार लाठीयां बरसा रही है

13/11/2025

ब्लास्ट करने वाले पाकिस्तान से नही आए थे
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