Dr Mukesh Aseemit'

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एक शौकिया फोटोग्राफर और पार्ट-टाइम लेखक हूँ।आप मेरे लेख "बात अपने देश की" वेबसाइट पर पढ़ सकते हैं, जहाँ मैंने अपने विचारों और अनुभवों को शब्दों में पिरोया है। मेरी तस्वीरें और लेखन दोनों ही मेरे जीवन की यात्रा और देखे गए दृश्यों का संग्रह हैं!

मेडिकल कॉन्फ़्रेंस में अकादमिक सेशन आख़िरी पन्ने पर और फूड कोर्ट मुख्य आकर्षण पर होता है। डॉक्टर ज्ञान लेने जाते हैं, ले...
18/05/2026

मेडिकल कॉन्फ़्रेंस में अकादमिक सेशन आख़िरी पन्ने पर और फूड कोर्ट मुख्य आकर्षण पर होता है। डॉक्टर ज्ञान लेने जाते हैं, लेकिन लौटते हैं गिफ्ट बैग, कूपन और पारिवारिक टूर की यादों के साथ।
#मेडिकल_कॉन्फ़्रेंस #डॉक्टर_संस्मरण #हास्य_व्यंग्य

मेडिकल कॉन्फ़्रेंस ज्ञान-वृद्धि के लिए होती हैं, ऐसा ब्रोशर कहता है। लेकिन डॉक्टरों, फार्मा स्टॉलों, गिफ्ट बैगों, .....

https://www.baatapnedeshki.in/shok-sabha-mein-jaane-ki.../शोक सभा में जाने की कला पर बाब्बन चाचा की फील्ड ट्रेनिंग पढ़िए...
08/05/2026

https://www.baatapnedeshki.in/shok-sabha-mein-jaane-ki.../
शोक सभा में जाने की कला पर बाब्बन चाचा की फील्ड ट्रेनिंग पढ़िए—जहाँ संवेदना, चाय, जायदाद, रिश्ता और पुट्टी वाला—all inclusive पैकेज में उपलब्ध हैं।
#हास्यव्यंग्य #बाब्बनचाचा #हिंदीव्यंग्य #सामाजिकव्यंग्य #व्यंग्यलेख #डॉमुकेशअसीमित

शोक सभा में जाना भी एक सामाजिक परीक्षा है। बाब्बन चाचा इस परीक्षा में इतने अनुभवी हैं कि संवेदना व्यक्त करते-करते .....

https://www.baatapnedeshki.in/raghu-rai-tribute-indian.../Raghu Rai सिर्फ तस्वीरें नहीं लेते थे, वे समय को फ्रेम करते थे...
27/04/2026

https://www.baatapnedeshki.in/raghu-rai-tribute-indian.../
Raghu Rai सिर्फ तस्वीरें नहीं लेते थे, वे समय को फ्रेम करते थे।
उनका जाना एक युग का अंत नहीं, एक दृष्टि की शुरुआत है।
📸 विनम्र श्रद्धांजलि

भारतीय समय, सत्ता और संवेदनाओं को अपने कैमरे में कैद करने वाले Raghu Rai अब हमारे बीच नहीं रहे। उनकी तस्वीरें सिर्फ दृश्.....

https://www.baatapnedeshki.in/deshbhakti-work-from-home-vyangya-digital-krantikari/📱 देशभक्ति अब वर्क फ्रॉम होम हो गई है...
25/04/2026

https://www.baatapnedeshki.in/deshbhakti-work-from-home-vyangya-digital-krantikari/
📱 देशभक्ति अब वर्क फ्रॉम होम हो गई है!
अब न खेत में पसीना बहाना है, न सीमा पर डटे रहना—बस वाई-फाई ऑन करो और राष्ट्रप्रेम शुरू!
यह व्यंग्य उन डिजिटल योद्धाओं पर है, जिनकी तलवार कमेंट बॉक्स में चलती है और जिनकी क्रांति डेटा पैक खत्म होते ही ‘फ्लाइट मोड’ में चली जाती है।
👉 पढ़िए और मुस्कराइए…
#देशभक्ति #व्यंग्य

देशभक्ति वर्क फ्रॉम होम अब देखिए, देश बदला है तो जाहिर है देशभक्ति भी बदली है। अब आप भी कहाँ पुराने देशभक्ति का राग .....

विश्व पृथ्वी दिवस : चेतना का अंतिम निमंत्रणधरती अपनी मूक भाषा में संकेत दे रही है, बस उन्हें समझने की आवश्यकता है। इधर म...
22/04/2026

विश्व पृथ्वी दिवस : चेतना का अंतिम निमंत्रण

धरती अपनी मूक भाषा में संकेत दे रही है, बस उन्हें समझने की आवश्यकता है। इधर मनुष्य, जो स्वयं को सृष्टि का सबसे बुद्धिमान प्राणी घोषित कर चुका है, उन संकेतों को अनसुना करने की अद्भुत प्रतिभा भी रखता है। हम ऐसे तुच्छ अस्तित्व वाले प्राणी होकर भी स्वयं को सुरक्षित नहीं रख पा रहे, फिर भी “सेव द प्लेनेट” का दावा करते हैं। हम विश्व पृथ्वी दिवस मना रहे हैं, पर क्या यह मात्र एक उत्सव भर नहीं रह गया है। क्या यह वास्तव में आत्मपरीक्षण का दिन बन पाया है।

प्रकृति ने अपने राग बदल दिए हैं। जहाँ कभी राग भैरव की शांति थी, वहाँ अब एक अनसुनी बेचैनी गूँज रही है। हवा, जो जीवनदायिनी थी, अब धीरे-धीरे विषाक्त स्मृतियों का वाहक बनती जा रही है। यह वही हवा है जिसे हमने उद्योगों की चिमनियों, वाहनों के धुएँ और अपने अति-उपभोग से संक्रमित कर दिया। हम साँस तो ले रहे हैं, पर हर साँस के साथ एक अदृश्य पृथ्वी-ऋण अपने ऊपर चढ़ा रहे हैं, जिसका भार हमारी आने वाली पीढ़ियों को उठाना होगा। क्या वे इसे चुका पाएँगी।

सूर्य की किरणें, जो कभी उष्मा और ऊर्जा का प्रतीक थीं, अब प्रखरता की सीमा लाँघकर दंड जैसी प्रतीत होने लगी हैं। यह तापमान का बढ़ना मात्र एक भौतिक घटना नहीं, बल्कि हमारी असंतुलित जीवनशैली का प्रतिबिंब है। हमने धरती के हृदय को खोद-खोदकर उसके संसाधनों का दोहन किया, और अब वही धरती भूकंपों और अतिवृष्टि के रूप में अपनी पीड़ा प्रकट कर रही है।

नदियाँ, जिन्हें हमने प्राणदायिनी कहा, आज या तो सिकुड़ रही हैं या अपने ही तटों को तोड़ती हुई उफान पर हैं। हिमनद, जो सदियों से स्थिर थे, पिघलकर समय की धारा में विलीन हो रहे हैं। मौसम की चरम स्थितियाँ, अनियमित वर्षा, असंतुलित जलवायु—ये सब महज घटनाएँ नहीं, स्पष्ट चेतावनियाँ हैं।

विडंबना यह है कि प्रकृति के ये संकेत भी हमें समझ नहीं आते। हम समाधान की जगह उत्सव खोजने लगते हैं और संकट को भी एक दिवस में बदलकर संतोष कर लेते हैं। यदि पृथ्वी दिवस केवल भाषणों, पोस्टरों और औपचारिक वृक्षारोपण तक सीमित रह गया, तो यह भी एक सांस्कृतिक कर्मकांड बनकर रह जाएगा।

आवश्यकता इस बात की है कि हम संरक्षण को नारा नहीं, जीवनशैली बनाएँ। उपभोग की अंधी दौड़ से थोड़ा विराम लें, संसाधनों के प्रति संवेदनशील बनें और प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व का भाव विकसित करें। यही छोटे कदम बड़े परिवर्तन की दिशा तय करेंगे।

प्रश्न यह नहीं कि धरती बचेगी या नहीं। धरती अपने संतुलन को पुनः स्थापित कर ही लेगी। प्रश्न यह है कि क्या मनुष्य उस संतुलन में अपना स्थान बचा पाएगा, या उसका अस्तित्व केवल एक अल्पकालिक प्रसंग बनकर रह जाएगा।

समय अभी भी है, पर संकेत अब चेतावनी में बदल चुके हैं।
पृथ्वी पुकार रही है, क्या हम सचमुच सुन रहे हैं।

https://www.baatapnedeshki.in/he-grishm-devi-he-prachand-tapsi-garmi-par-vyangya/हे ग्रीष्म देवी! इस बार कुछ तो दया करो।...
22/04/2026

https://www.baatapnedeshki.in/he-grishm-devi-he-prachand-tapsi-garmi-par-vyangya/
हे ग्रीष्म देवी! इस बार कुछ तो दया करो।
लू, बिजली कटौती, सूखते जलस्रोत, समर कैम्प, एसी संस्कृति और तरबूज-ककड़ी की शरण में भागते मनुष्यों के बीच यह व्यंग्य रचना गर्मी की मार को देवी-स्तुति के रूप में प्रस्तुत करती है।
पढ़िए—हास्य, तंज, सांस्कृतिक उपमाओं और भारतीय जीवन की तपती सच्चाइयों से भरा एक रोचक व्यंग्य।
#हेग्रीष्मदेवी #गर्मीपरव्यंग्य #ग्रीष्मऋतु #हास्यव्यंग्य #हिंदीव्यंग्य #भीषणगर्मी #लू #समसामयिकव्यंग्य #हिंदीसाहित्य #व्यंग्यलेखन #बिजलीकटौती #जलसंकट #गर्मीकीमार #हास्यलेख #तंज

जब ग्रीष्म ऋतु देवी का रूप धरकर पृथ्वी पर उतरती है, तो सड़कें सूनी हो जाती हैं, बिजली आंख-मिचौली खेलने लगती है, जलजीर....

📢 खाली वायदों का कार्डसरकार कहती है—इलाज मुफ्त है।अस्पताल कहते हैं—भुगतान कहाँ है?डॉक्टर कहते हैं—हम इलाज करें या फाइल भ...
20/04/2026

📢 खाली वायदों का कार्ड
सरकार कहती है—इलाज मुफ्त है।
अस्पताल कहते हैं—भुगतान कहाँ है?
डॉक्टर कहते हैं—हम इलाज करें या फाइल भरें?

👉 पढ़ें और अपनी राय दें।
https://www.baatapnedeshki.in/khali-vayadon-ka-card-health-scheme-satire/

#व्यंग्य #स्वास्थ्यव्यवस्था #मुफ्तइलाज #डॉक्टर

“कार्ड हाथ में है, भरोसा दिल में है—लेकिन इलाज फाइलों में अटका हुआ है। ‘खाली वायदों का कार्ड’ एक ऐसा व्यंग्य है जो स...

काशी सिर्फ एक शहर नहीं… एक अनुभव है।गंगा घाट, विश्वनाथ मंदिर और आध्यात्म का अनोखा संगम—👉 पढ़ें पूरा यात्रा-वृत्तांतhttps...
16/04/2026

काशी सिर्फ एक शहर नहीं… एक अनुभव है।
गंगा घाट, विश्वनाथ मंदिर और आध्यात्म का अनोखा संगम—
👉 पढ़ें पूरा यात्रा-वृत्तांत
https://www.baatapnedeshki.in/varanasi-yatra-kashi-vishwanath-ghat-ganga-aarti-guide/

वाराणसी यात्रा का विस्तृत वर्णन—गंगा घाट, काशी विश्वनाथ मंदिर, गंगा आरती, सारनाथ और बनारसी संस्कृति का अद्भुत अनु....

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