06/03/2015
•ılღlı• राधे राधे श्याम मिलादे •ılღlı•
"जय श्री कृष्णा"
कहा जाता है निधिवन के सारी लताये गोपियाँ है जो एक दूसरे कि बाहों में बाहें डाले खड़ी है जब रात में निधिवन में राधा रानी जी, बिहारी जी के साथ रास लीला करती है तो वहाँ की लताये गोपियाँ बन जाती है।
और फिर रास लीला आरंभ होती है, इस रास लीला को कोई नहीं देख सकता, दिन भर में हजारों बंदर, पक्षी, जीव जंतु निधिवन में रहते है पर जैसे ही शाम होती है, सब जीव-जंतु, बंदर अपने आप निधिवन से चले जाते है एक परिंदा भी फिर वहाँ पर नहीं रुकता यहाँ तक कि जमीन के अंदर के जीव चीटी आदि भी जमीन के अंदर चले जाते है।
रास लीला को कोई नहीं देख सकता क्योकि रास लीला इस लौकिक जगत की लीला नहीं है रास तो अलौकिक जगत की "परम दिव्यातिदिव्य लीला" है।
कोई साधारण व्यक्ति या जीव अपनी आँखों से देख ही नहीं सकता।
जो बड़े बड़े संत है उन्हें निधिवन से राधारानी जी और गोपियों के नुपुर की ध्वनि सुनी है.
जब रास करते करते राधा रानी जी थक जाती है तो बिहारी जी उनके चरण दबाते है, और रात्रि में शयन करते है।
आज भी निधिवन में शयन कक्ष है जहाँ पुजारी जी जल का पात्र, पान, फुल और प्रसाद रखते है, और जब सुबह पट खोलते है तो जल पीला मिलता है पान चबाया हुआ मिलता है और फूल बिखरे हुए मिलते है।
वृन्दावन धाम या बरसाना कोई घूमने फिरने या पिकनिक मनाने की जगह नहीं है ये आपके इष्ट की जन्मभूमि लीलाभूमि व् तपोभूमि है।
सबसे ख़ास बात ये प्रेमभूमि है जब भी आओ इसको तपोभूमि समझ कर मानसिक व् शारीरिक तप किया करो शरीर से सेवा व् वाणी से राधा नाम गाया जाए तब ही धाम मे आना सार्थक है।
वृन्दावन धाम या बरसाना जब भी आओ अपने साथ एक अद्भुत मस्ती ताकत व् आनंद ले कर वापिस जाया करो।
बोलिये श्री वृंदावन बिहारी लाल की जय...
आप की धाम निष्ठां मे वृद्धि हो इसी कामना से
~~~जय जय श्री राधे~~~