09/05/2025
क्या होता अगर सीता सोचती
खामखा होगा युद्ध और नरसंहार और मान लेती रावण की बात?
या फिर अर्जुन छोड़ देता शस्त्र, लेता विदा युद्ध भूमि से चुप चाप।
क्या होता अगर भीम भूल जाता द्रौपदी का अपमान और माफ़ कर देता दुर्योधन सहित दुःशासन का अपराध ?
या भगवान कृष्ण न निकालते सुदर्शन चक्र कैसे होता उस पापी शिशुपाल का वध ?
माना जब युद्ध होता है तो असंख्य सैनिक मरते हैं, पर मत भूलो कितने पापियों के अभिमान भी साथ में टूटते हैं।
समाज को सबक मिलता है और फिर वह दोबारा वही भूल करने से डरता है।
WAR is not always a solution but if needed and if required, if no option is left - WAR becomes the only way, PEACE can be restored.
जय हिन्द की सेना
🇮🇳