Kavi Devendra Pratap Singh

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14/09/2025
ध्यानियों के ध्यान में बसी है़ मुरली की तानआरती के अथ, इति, ओम में हैं राधिकाइस धरती के धोरे-धोरे में बसे हैं श्यामप्राण...
31/08/2025

ध्यानियों के ध्यान में बसी है़ मुरली की तान
आरती के अथ, इति, ओम में हैं राधिका

इस धरती के धोरे-धोरे में बसे हैं श्याम
प्राणवायु जैसी इस व्योम में हैं राधिका

मंत्र-मंत्र में बसी महक मनमोहन की
यज्ञ-वेदियों के हर होम में हैं राधिका

राधिका के मन में बसे हैं मनमोहन तो
मनमोहना के रोम-रोम में हैं राधिका

🙏🏻🙏🏻🔥🔥

सर सर सर चलते समर बीच शर फर फर फर फरसे सी तलवार थी हर एक दिशा में दिखाई देते बाजीराव भँवर बना दिया था ऐसी यलगार थी तिलक ...
18/08/2025

सर सर सर चलते समर बीच शर
फर फर फर फरसे सी तलवार थी

हर एक दिशा में दिखाई देते बाजीराव
भँवर बना दिया था ऐसी यलगार थी

तिलक गये तो चीर दिए बीच से ही सर
चोटियाँ गयीं तो बोटियों की भरमार थी

जो भी डालता कुदृष्टि पावन जनेऊ पर
उसकी ही आँत बाघनख की शिकार थी

🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥

जन्म जयंती पर कोटि कोटि नमन 🚩🙏

#बाजीराव_बल्लाळ

#जो_जीता_वो_बाजीराव 🚩

सोचते  हैं  समर्पण  करेंगे  नहीं मौत  आसान  इतनी  मरेंगे  नहीं दिलके जख्मोंको मरहम तो मिल जाएगी पीठ  के  जख्म  लेकिन  भर...
23/07/2025

सोचते हैं समर्पण करेंगे नहीं
मौत आसान इतनी मरेंगे नहीं
दिलके जख्मोंको मरहम तो मिल जाएगी
पीठ के जख्म लेकिन भरेंगे नहीं

सागर मंथन से प्रखर ज्वार उठता है प्रलय मचाने को बादल घनघोर गर्जना कर आतुर होते फट जाने को आकाश उगलता अंगारे भूखंड दरकने ...
07/05/2025

सागर मंथन से प्रखर ज्वार उठता है प्रलय मचाने को
बादल घनघोर गर्जना कर आतुर होते फट जाने को

आकाश उगलता अंगारे भूखंड दरकने लगते हैं
श्वसना संहारक बन जाती हिमशैल चटकने लगते हैं

इस परमधैर्यशाली वसुधा की भी परतें हट जातीं हैं
जीवनदायक जलमुखियों से ज्वालामुखियां फट जातीं हैं
🔥🔥🔥🔥

वन जाने हेतु जाह्नवी तरंगिणी के तीर केवट की नाव का सहारा लिया राम ने मथुरा निवासियों को द्वारिका बसाने हेतु विश्वकर्मा स...
26/04/2025

वन जाने हेतु जाह्नवी तरंगिणी के तीर
केवट की नाव का सहारा लिया राम ने

मथुरा निवासियों को द्वारिका बसाने हेतु
विश्वकर्मा से ली सहायता श्री श्याम ने

एक विप्र ने शिखाए खोल दीं तो पा लिया था
वैभव पुराना चन्द्रगुप्त बलधाम ने

यूँ ही नहीं वसुधा का भोग किया क्षत्रियों ने
छातियाँ अड़ा दीं आततायियों के सामने

देवेन्द्र प्रताप सिंह "आग"

धर्म का विनाश हो तो लेते अवतार कृष्ण बाल्यकाल से ही अरिहन्त बन जाते हैं रेणुका के पुत्र क्रोध करते हैं धारण तो विश्व के ...
05/04/2025

धर्म का विनाश हो तो लेते अवतार कृष्ण
बाल्यकाल से ही अरिहन्त बन जाते हैं

रेणुका के पुत्र क्रोध करते हैं धारण तो
विश्व के अधर्मियों का अंत बन जाते हैं

दीनों की दशा को देख दयावान दयानंद
विश्वम आर्यम कृणवन्त बन जाते हैं

करुणा में डूबकर विश्वविजयी अशोक
शस्त्र त्यागकर यहाँ संत बन जाते हैं

देवेन्द्र प्रताप सिंह "आग

"पहले कलिंग तो होने दो"खंडित भारत माता रोती फ़िर भी जवान धड़कन सोती वीरों के कुल में जन्मी जो वो बेल आज खुद विष बोती भू पर...
05/04/2025

"पहले कलिंग तो होने दो"

खंडित भारत माता रोती
फ़िर भी जवान धड़कन सोती
वीरों के कुल में जन्मी जो
वो बेल आज खुद विष बोती
भू पर वर्चस्व हमारा था
चहुंओर खुशी उजियारा था
दुनियां ने अपनी आँखों से
स्वर्णिम इतिहास निहारा था
पर आज उसी भारत की क्या
हालात बनाई दुष्टों ने
खुद ही कर डाला खंड खंड
माता को हृष्टों पुष्टों ने
इस दयावान अवनी पर अब
दुश्मन की बुरी हिमाकत है
इसलिए ओज की सुलग रही
स्याही की बस यह चाहत है
मेरी शमशीर शत्रुओं के शीशों का कर डाले कर्तन
यदि सिंधु नदी में फ़िर से शोणित बहता है तो बहने दो
मैं हूँ अशोक पथ अनुगामी हिंसक भी बहुत अहिंसक भी
सर्वस्व लुटा भी सकता हूँ लेकिन कलिंग तो होने दो

दाहिर का सिंध सुलगता है
मलमल ढाका वाला मैला
पूरब पश्चिम उत्तर दक्षिण
सम्राज्य राक्षसों का फैला
वह तक्षशिला का ज्ञान पुंज
डूबा तम की गहराई में
वह कुश पर्वत का शीर्ष बिंदु
है असंतोष की खाई में
कितनी सदियों से सहा यहाँ
उत्पात दानवो के दल का
यदि आज नहीँ उठ खड़ा हुआ
तो दृश्य बुरा होगा कल का
कितना अतीव अपना अतीत
लेकिन है जबसे है रुधिर शीत
सिंहों के वंशज शस्त्रहीन
कुछ श्वानों की हो रही जीत
इसलिए मुझे स्याही से ही सोयी धमनी, सोयी रग में
कुछ स्वाभिमान के दिए जलाने वाले शोले बोने दो
मैं हूँ अशोक पथ अनुगामी हिंसक भी बहुत अहिंसक भी
सर्वस्व लुटा भी सकता हूँ लेकिन कलिंग तो होने दो

देवेन्द्र प्रताप सिंह "आग"

होरी है़ पूरे ब्रजमंडल में शोर है़ ये जोर से किआज तड़के बवाल कर गया मोहना चौकसी में ऐसी धौंक सी जमाई आंखिन से जैसे कजरा न...
13/03/2025

होरी है़

पूरे ब्रजमंडल में शोर है़ ये जोर से कि
आज तड़के बवाल कर गया मोहना

चौकसी में ऐसी धौंक सी जमाई आंखिन से
जैसे कजरा निकाल कर गया मोहना

ऐसी चली चाल लेके साथ बालग्वाल, छूके
पूरा जियरा बेहाल कर गया मोहना

सारे बृजवासी तकते ही रह गये,गोरी
गूजरी के गाल लाल कर गया मोहना

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