02/02/2025
अब न वो दर्द न वो दिल न वो दीवाने रहे।
अब न वो साज, न वो सोज न वो गाने रहे।
साकी तू किसके लिए अब तक यहां बैठा है।
अब न वो जाम, न वो मन न वो पैमाने रहे।।
( कवि गोपाल दास "नीरज" )✍️
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