Dilip kumar giri

Dilip kumar giri Love is life

निशांत: पापा मुझे बचा लो...!नीतीश कुमार: क्या हुआ बेटा?निशांत : NEET छात्रा हत्याकांड में मेरा भी नाम आ रहा है...नीतीश क...
06/03/2026

निशांत: पापा मुझे बचा लो...!

नीतीश कुमार: क्या हुआ बेटा?

निशांत : NEET छात्रा हत्याकांड में मेरा भी नाम आ रहा है...

नीतीश कुमार : पहले बताना था न बेटा यह केस तो अब CBI देख रही है...

निशांत: कुछ तो करो पापा...

नीतीश कुमार : ठीक है बेटे निशांत, तुम्हारे Amit Shah अंकल से बात करते हैं!!

निशांत : लव यू पापा
नीतीश: मोटा भाई ये जो CBI वाला ,NEET छात्रा हत्याकांड वाला मामला देख रहा है न उसमें अपना निशांत भी है..उसका इससे नाम हटवा दो...

अमित शाह: देखिए नीतीश भाई ये इतना आसान नहीं है...

नीतीश कुमार: मेरे बेटा का जिंदगी दांव पर लगी है,आप जो कहोगे वो मैं करूंगा..बोलिए क्या चाहिए?

अमित शाह: मुख्यमंत्री का कुर्सी दे दो!

नीतीश कुमार: नहीं ये नहीं हो सकता है...
अमित शाह: फिर तुम्हारे बेटा को फांसी के फंदे से कोई नहीं बचा सकता है...

नीतिश कुमार: माई बाप,ये मुख्यमंत्री का कुर्सी और बिहार भी तुम्हारा ..

अमित शाह: निशांत अब सुरक्षित है,तुम राज्यसभा चले जाओ वहां से कुछ मामला सेट कर दूंगा !!

नीतीश कुमार: बहुत बहुत आभार मोटा भाई ,आपने मेरे बेटा को बचा लिया 🙏🙏🙏🙏

अब इस मामले और विचार पर आप सभी लोगों का क्या कहना चाहते हैं बताइए कि क्या यही वजह तो नीतीश कुमार कि नहीं है

जेहाद अचानक नही होता ये बहुत धीरे धीरे होने वाली प्रक्रिया है जिसमे पहले काफिरो(हिन्दुओ)की ताकत को परखा जाता है और उनकी ...
20/02/2026

जेहाद अचानक नही होता ये बहुत धीरे धीरे होने वाली प्रक्रिया है जिसमे पहले काफिरो(हिन्दुओ)की ताकत को परखा जाता है और उनकी ताकत के हिसाब से तैयारी की जाती है, जेहाद के पहले हर स्तर पर हिन्दुओ को मानसिक रूप से तोड़ा जाता है।

जेहाद चरण दर चरण चलने वाली प्रक्रिया है

चरण 1 - आपके क्षेत्र में कबाड़ी फेरीवाले आने शुरू होंगे जो, आपकी आर्थिक स्तिथि परखेंगे आपके घरों की महिलाओं की क्षमता परखेंगे।

चरण 2 - आपके क्षेत्र में चादर फैला कर मांगने वाले लोभान छोड़ने वाले या सूफी गीत गा कर मांगने वाले, आने लगेंगे ये दुआएं दे कर भीख मांगेंगे और तलाशेंगे कि, कितने हैरान परेशान हिन्दू उनके जाल में फंस सकते है।

चरण 3- वो आपके क्षेत्र में लेडीज टेलर की दुकान खोलेंगे या चूड़ी बेचेंगे ऐसे काम करेंगे जिससे महिलाओं से उनका संपर्क बढ़ सके और लव जेहाद को बढ़ाया जा सके।

चरण 4- आपके क्षेत्र में मुसलमान रोड पर कब्जा कर के, छोटी छोटी दुकान ख़ौलने लगेंगे, कम कीमत में काम करेंगे जिससे, हिन्दुओ को छोड़ कर आप उनके पास काम करवाने जाने लगें, उनकी दुकानों पर आवारा मुसलमान लड़को का जमावड़ा खड़ा होने लगेगा।

चरण 5 - वो हिन्दुओ की दुकानों व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर कम वेतन में नौकरी करना शुरू करेंगे।

चरण 6- ये आपके क्षेत्र में हलाल के मांस की दुकान खोलेंगे।

चरण 7- वो हिन्दू बहुल क्षेत्र में मकान खरीदेंगे या किराया पर लेंगे।

चरण 8- वो हिन्दू लड़को से दोस्ती करेंगे जिससे वो हिन्दू लड़कियों से परिचय कर सकें और किसी न किसी बहाने आपके घर आ जा सकें।

चरण 9- वो आपके क्षेत्र में मज़ार बनाएंगे और उसके चमत्कारों का प्रचार करेंगे जिससे मूर्ख हिन्दू वहां जाना शुरू करे।

चरण 10- वो अब जिहाद का असर दिखने के लिए तैयार है अब वो इस्लामिक धार्मिक आयोजन करेंगे और इस तरह से करेंगे कि हिन्दुओ को उससे समस्या हो।

चरण 11- वो आपके धर्मीक आयोजनों का विरोध करने लगेंगे।

चरण 12- वो हर तरह से अपना अधिकार जताएंगे मौके तलाशेंगे की कब और
कैसे हिन्दुओ को अपमानित किया जा सके या उन पर हमला किया जा सके।

अब आप स्वयं इन लक्षणों को पहचाने और ये तय करें कि आप जिहाद के किस चरण में है?

और यदि ये सब होता देख कर भी, आपकी आंखें बंद है और आपको कोई फर्क नही पड़ता तो विश्वास रखिये आपकी आने वाली पीढ़ी, #मोमिन ही होगी।

हम बस दम्भ भरते हैं कि देश ने विकास कर लिया,सड़कें सुधर गई हैं, राहगीरों के लिए विश्राम गृह बनगए, बस स्टॉप और सड़क किनारे ...
19/02/2026

हम बस दम्भ भरते हैं कि देश ने विकास कर लिया,
सड़कें सुधर गई हैं, राहगीरों के लिए विश्राम गृह बन
गए, बस स्टॉप और सड़क किनारे बेठने की सुविधाएं हैं,
प्रति हजार मीटर पर बायो टॉयलेट्स और सुलभ शोचालय हैं। पर हकीकत इसके बिल्कुल उलट है।

कैसे ये लड़कियां रात के अंधेरे में सड़क किनारे फुटपाथ
पर बैठकर सिटी बस का इंतज़ार करने को मजबूर हैं,
न इनके लिए लोहे की बेंच लगी न ही सीमेंटेड कुर्सियां।

क्या सिटी बसों की संख्या नही बड़नी चाहिए, और इंतजार करने वाले राहगीरों के लिए बैठक व्यवस्था सुधारना स्थानीय जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी नहीं है। ऐसे उकड़ू बैठे बैठे तो इनके टोंगले दर्द करने लगे होंगे।🥺😏😑

स्थानीय जनप्रतिनिधि संज्ञान लें...!!☝️

बंदे में है दम 💪     की   मामले पर सुनवाई के दौरान पूरी टिप्पणी पढ़िए / जिसे पढ़कर कंचना, निर्देश,  प्रियंका, राजकुमार भाट...
30/01/2026

बंदे में है दम 💪 की मामले पर सुनवाई के दौरान पूरी टिप्पणी पढ़िए / जिसे पढ़कर कंचना, निर्देश, प्रियंका, राजकुमार भाटी, नीले टाटी इत्यादि की आँखे फट के बाहर आ गईं :-

CGI की टिप्पणी - हम जातिविहीन समाज चाहते हैँ, आप क्या देश को भूतकाल में ले जाना चाहते हैँ ? गाइडलाइन्स एक ही पक्ष को ध्यान में रखकर बनाई गई हैँ #सूर्यकान्त जी

वकील के जिरह पर :- जाति की पूरी व्यवस्था आपने ब्राह्मणों पर मढ़ कर समाज में नफरत घोल दी है, क्या मुस्लिमों की जातियां भी ब्राह्मणों ने बनाई है ?
ईसाई में जातियां भी ब्राह्मणों की दें है ?
बौद्ध, सिख, जैन क्या सभी की जातियां ब्राह्मणों ने बनाई है ?
अगर ब्राह्मणों की जातियों से इतनी दिक्कत है तो आज ही अपने नाम से जाती हटा लीजिये ( ) कौन आपको रोकेगा ?
कौन आपको अपने नाम के आगे जाति लगाने के लिए विवश कर रहा है?

स्टे देते समय :- अगर एक समाज खुद को IAS, IPS, CJI, President, PM बनकर भी खुद को शोषित ही रखना चाहता है तो इसमें गलती ब्राह्मणों की नहीं बल्कि उसकी अपनी मानसिकता की है ।

अद्भुत दृश्य था कोर्ट में , दलील और समर्थन पक्ष के लोगो के चेहरे से हवाईया उड़ी थी

इतिहास गवाह है कि जब भी किसी समाज या शक्ति को कमज़ोर करना होता है, तो एक झटके में नहीं, बल्कि धीरे-धीरे कानूनों के ज़रिय...
29/01/2026

इतिहास गवाह है कि जब भी किसी समाज या शक्ति को कमज़ोर करना होता है, तो एक झटके में नहीं, बल्कि धीरे-धीरे कानूनों के ज़रिये उसे घेरा जाता है।
ब्रिटिश सरकार ने भी भारत पर सीधा कब्ज़ा एक दिन में नहीं किया था। पहले ईस्ट इंडिया कंपनी को ताक़त दी, फिर उसी कंपनी को कानूनों से जकड़ते हुए पूरी व्यवस्था अपने हाथ में ले ली। देखिए, अंग्रेज़ों ने कैसे एक-एक कर कानून लाकर नियंत्रण स्थापित किया
• रेगुलेटिंग एक्ट 1773
• पिट्स इंडिया एक्ट 1784
• चार्टर एक्ट 1813
• चार्टर एक्ट 1833
• गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट 1858
ये सभी कानून एक ही दिन में नहीं आए। हर कानून पिछले कानून से ज़्यादा सख़्त था, और अंततः भारत पूरी तरह गुलामी की ज़ंजीरों में जकड़ गया।आज वही इतिहास एक बार फिर नए रूप में दोहराया जा रहा है।
जिस तरह उस समय कंपनी को कमजोर किया गया था, उसी तरह आज सवर्ण समाज को निशाना बनाकर चरणबद्ध तरीके से कानून लाए जा रहे हैं।
नाम बदले हुए हैं, भाषा बदली हुई है, लेकिन मंशा वही है धीरे-धीरे अधिकार छीनना।पिछले कुछ वर्षों में जो हुआ, उस पर अगर ईमानदारी से नज़र डालें तो तस्वीर साफ़ दिखाई देती है
• SC/ST संशोधन कानून 2018
• 104वां संविधान संशोधन
• 106वां संविधान संशोधन
• जाति जनगणना की तैयारी
हर कदम एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा लगता है।और अब UGC के ज़रिये शिक्षा प्रणाली पर ऐसा कानून थोपा जा रहा है, जिससे सीधे-सीधे सामान्य और सवर्ण छात्रों के भविष्य पर असर पड़ेगा।यह सिर्फ़ एक बिल या नियम नहीं है।यह पीढ़ियों को कमज़ोर करने की प्रक्रिया है।सबसे बड़ा सवाल यह है क्या सवर्ण समाज को बोलने का हक़ नहीं?क्या हमारे लिए कोई नीति, कोई सुरक्षा, कोई प्रतिनिधित्व ज़रूरी नहीं? क्या हर बार चुप रहना ही हमारी नियति है?जो लोग कहते हैं कि सब बराबर हैं, उनसे पूछिए बराबरी तब होती है जब सभी वर्गों की आवाज़ सुनी जाए,बराबरी तब होती है जब किसी एक वर्ग को ही बार-बार कटघरे में न खड़ा किया जाए।आज जरूरत है भावनाओं में बहने की नहीं,
बल्कि इतिहास से सीख लेने की।अगर आज भी हम चुप रहे,तो कल हमारे पास बोलने का अधिकार भी नहीं बचेगा।यह लड़ाई किसी जाति के खिलाफ नहीं,
यह लड़ाई न्याय, संतुलन और भविष्य की सुरक्षा की है।
अब भी समय है सोचिए, समझिए और सवाल उठाइए।क्योंकि इतिहास वही दोहराता है,जिसे समाज भूल जाता है।और सबसे ज़्यादा पीड़ा इस बात की है कि
हमारे ही समाज से चुनकर गए नेता कई सवर्ण प्रतिनिधि आज पूरी तरह मौन हैं। जिस बिल से सामान्य और सवर्ण छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है,उस पर इन नेताओं की तरफ़ से एक भी ठोस बयान, एक भी सवाल, एक भी विरोध क्यों नहीं?क्या सत्ता की कुर्सी इतनी कीमती हो गई है कि उन लोगों की आवाज़ ही बेमानी हो गई जिन्होंने आपको वोट देकर संसद तक पहुँचाया?
चुनाव के समय समाज याद आता है, लेकिन समाज के अधिकारों पर संकट आए तो सबकी ज़ुबान पर ताला क्यों लग जाता है?आज अगर आप चुप हैं,
तो कल इतिहास आपसे सवाल करेगा जब आपके समाज के बच्चों का भविष्य छीना जा रहा था,
तब आप किसके साथ खड़े थे?साफ़ शब्दों में कहें तो
नेतृत्व सिर्फ़ पद का नाम नहीं, जिम्मेदारी का नाम होता है।और जो नेता अपने समाज के लिए बोलने का साहस नहीं रखते,उन पर भरोसा करना भी एक भूल है।
अब समाज देख रहा है, समझ रहा है और वक्त आने पर हिसाब भी करेगा।क्योंकि वोट सिर्फ़ जीताने के लिए नहीं,
हक़ और सम्मान की रक्षा के लिए दिया जाता है।

#सवाल_नेतृत्व_से #सामान्य_वर्ग #सवर्ण_समाज #छात्रों_का_भविष्य
#सामान्य_वर्ग #सवर्ण_समा #शिक्षा_बचाओ
#संविधान #इतिहास_से_सबक

जनशक्ति जनता दल के अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने कहा कि, कितनी शर्म की बात है। जिस ओबीसी समाज पर पूरे देश में लगने वाले SC/...
28/01/2026

जनशक्ति जनता दल के अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने कहा कि,
कितनी शर्म की बात है। जिस ओबीसी समाज पर पूरे देश
में लगने वाले SC/ST मामलों में 86% केस हैं। उस ओबीसी
समाज के कुछ लोग UGC का समर्थन कर रहे हैं। अरे.. तुम्हें
राजनीति के कारण तुम्हारी संख्या की बजह से UGC में
शामिल किया गया है। लेकिन जिस दिन UBC एक्ट भी आ
जायेगा उस दिन किसका समर्थन करोगे, बंटोगे या कटोगे
बताओ OBC समाज के मेरे प्यारे भाईयों ये UGC जैसा काला
कानून सिर्फ और सिर्फ भाजपा के वोट बैंक का हथियार है जो

OBC के कंधे पर रखकर चलाया जा रहा है। मैं और मेरी पार्टी
JJD इस काले कानून का पुरे तन मन धन से विरोध करते हैं।
ये कानून नही बहन बेटियों की इज्जत के साथ खेलने का
हथियार है। जिस यदुवंशी भगवान श्री कृष्ण ने भरी सभा में एक
बेबस नारी की इज्जत बचाई थी क्या आज हम पुरे OBC
मिलकर देश की बहन बेटी की इज्जत नही बचा सकते। बचा
सकते है इस काले कानून को वापिस करवा कर। जय श्री कृष्णा
🙏 अगर आप JJD अध्यक्ष तेज प्रताप यादव जी की बात से
सहमत हैं, तो विडियो को ज्यादा से ज्यादा लाईक व शेयर करें..
जय हिन्द..जय भारत.

Kumar giri

जातिगत भेदभाव को एकजुटता से रोका जाना चाहिए। ये काम साफ नियत से करना चाहिए, सियासी उल्लू सीधा करने के लिए नहीं। और नियम ...
25/01/2026

जातिगत भेदभाव को एकजुटता से रोका जाना चाहिए। ये काम साफ नियत से करना चाहिए, सियासी उल्लू सीधा करने के लिए नहीं। और नियम जाति के महीन पिरामिड को समझते हुए बनाए जाने चाहिए।

1. सवर्ण छात्र अगर जातिगत भेदभाव करते हैं तो उनपर कार्रवाई हो,मगर उन्हें आपसी रंजिश में फँसाया जाए तो फँसाने वाले पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। क़ानून का दुरूपयोग नहीं होना चाहिए।

2. अगर कोई OBC वर्ग का छात्र SC/ST वर्ग से भेदभाव करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान क्यों नहीं है? भेदभाव के मामले तो यहां भी होते हैं
3. नए नियमों में OBC वर्ग को भी पीड़ित पक्ष में रखा गया है, तो क्या Gen वर्ग को पहले से ही दोषी मान लिया गया है?

जातिगत भेदभाव देश के लिए नासूर है। ऐसे मामलों में दोषी के खिलाफ सख़्त सजा का प्रावधान होना चाहिए,मगर निर्दोष को बचने का अवसर भी मिलना चाहिए। 2012 में बने नियम में था कि अगर आरोप ग़लत निकले या फँसाने की मंशा निकली तो जुर्माना लगता था। नए नियम में क्यों नहीं है?

बाक़ी जाति का पिरामिड समझना है तो नियम बनाने वालों को गाँव में घूमकर समझना चाहिए। एसी कमरों में सिर्फ़ हवा ठंडी लगती है,जातिगत गर्माहट नहीं पता लगती।

अंत में- परसाई जी,सच लिख गए हैं। इस देश में हर जाति ने अपने से छोटी जाति खोज रखी है।

भीम राव अम्बेडकर ने अपनी किसी किताब में ब्राह्मण समाज द्वारा गलत व्यवहार करें जाने की एक बात नहीं लिखी। बाकि ब्राह्मण श्...
24/01/2026

भीम राव अम्बेडकर ने अपनी किसी किताब में ब्राह्मण समाज द्वारा गलत व्यवहार करें जाने की एक बात नहीं लिखी। बाकि ब्राह्मण श्रीधर स्वामी जी के यहां भी भीम राव अम्बेडकर अक्सर उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए जाया करते थे।

इसका तात्पर्य यही बनता है कि सभी राजनैतिक पार्टियां मिलकर हिंदुओं को विघटित करने के उद्देश्य से भीम राव अम्बेडकर के नाम पर फर्जी शोषण की कहानियों को माध्यम बनाकर हिंदुओं के सभी वर्गों में द्वेषपूर्ण भावना पेंदा कर रहे। ताकि ये सभी राजनैतिक पार्टियां मिलकर हिंदुओं के मतभेदों का फायदा उठाकर मौज मारती रहे।

आज एक कड़वा लेकिन ज़रूरी सवाल पूरे स्वर्ण समाज के मन में गूंज रहा है—जब UGC/UGCSA जैसे काले नियमों से हमारे बच्चों का भव...
24/01/2026

आज एक कड़वा लेकिन ज़रूरी सवाल पूरे स्वर्ण समाज के मन में गूंज रहा है—
जब UGC/UGCSA जैसे काले नियमों से हमारे बच्चों का भविष्य अंधकार की ओर धकेला जा रहा है,
तो ब्राह्मण, ठाकुर, भूमिहार, कायस्थ, बनिया समाज के तथाकथित बड़े नेता आज खामोश क्यों हैं?
केंद्रीय मंत्री हों या सत्ता के ऊँचे पदों पर बैठे चेहरे—
ललन सिंह, नितिन गडकरी, गिरिराज सिंह, राजनाथ सिंह, राजीव प्रताप रूडी—
आज समाज के इस ज्वलंत प्रश्न पर सबकी जुबान पर ताले क्यों लगे हैं?
क्या पार्टी की निष्ठा,
समाज, बच्चों और आने वाली पीढ़ी से बड़ी हो गई है?
सच्चाई यह है कि
आम स्वर्ण समाज का बच्चा आज सड़क पर संघर्ष कर रहा है,
जबकि नेताओं के बच्चे विदेशों में सुरक्षित भविष्य गढ़ रहे हैं।
यह सिर्फ व्यवस्था की विफलता नहीं,
बल्कि नेतृत्व की नैतिक असफलता का प्रमाण है।
हम किसी राजनीतिक दल के विरोधी नहीं हैं,
लेकिन जब तक UGC/SC-ST कानूनों में न्यायपूर्ण संशोधन नहीं होता,
तब तक ऐसे अवसरवादी नेतृत्व और ऐसी राजनीति का बहिष्कार आवश्यक है।
मैं स्पष्ट कहना चाहता हूँ—
मेरा संघर्ष किसी दल के लिए नहीं,
अपने समाज, अपने बच्चों और अपने स्वाभिमान के लिए है।
मैं समाज की सेवा करता रहूँगा—
बिना डर, बिना दलाली, बिना समझौते।
संघर्ष जारी रहेगा,
क्योंकि यह लड़ाई
अधिकार की है,
भविष्य की है,
और आत्मसम्मान की है।
✍️ Dilip kumar giri
#शिक्षा_बचाओ #भविष्य_बचाओ #समान_न्याय #स्वर्ण_समाज #स्वर्ण_एकता #छात्र_हित #शिक्षा_न्याय #संविधान #आत्मसम्मान #युवा_भविष्य #न्यायपूर्ण_संशोधन

क्या सवर्ण समाज के लोगों में इतनी हिम्मत नहीं है कि वे खुलकर इन काले कानूनों का विरोध कर सकें, जैसा कि इस ओबीसी समाज के ...
23/01/2026

क्या सवर्ण समाज के लोगों में इतनी हिम्मत नहीं है कि वे खुलकर इन काले कानूनों का विरोध कर सकें, जैसा कि इस ओबीसी समाज के भाई ने किया है, जो ओबीसी वर्ग से होने के बावजूद इन कानूनों का विरोध कर रहा है?

मैं भाजपा और मोदी जी का एक शिक्षित, समर्पित और ज़मीनी कार्यकर्ता हूँ।जिसने यह सपना देखा था कि भारत 2047 तक केवल एक विकसि...
23/01/2026

मैं भाजपा और मोदी जी का एक शिक्षित, समर्पित और ज़मीनी कार्यकर्ता हूँ।
जिसने यह सपना देखा था कि भारत 2047 तक केवल एक विकसित राष्ट्र ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व को दिशा दिखाने वाला विश्वगुरु बनेगा।
मैंने जाति नहीं, विचारधारा देखी। पद नहीं, राष्ट्र देखा।
घर–परिवार, समय और ऊर्जा सब कुछ देश के भविष्य के नाम कर दिया।
लेकिन आज UGC Equity Squad जैसे नियमों को देखकर मन में गहरी पीड़ा और आक्रोश है।
यह नीति योग्यता को दंड और पहचान को पुरस्कार बना रही है।
जो युवा मेहनत, प्रतिभा और अनुशासन से आगे बढ़ना चाहता है—उसे अपराधबोध में खड़ा किया जा रहा है।
क्या राष्ट्र निर्माण का रास्ता
➡️ योग्यता को पीछे धकेल कर
➡️ शिक्षा को सामाजिक प्रयोगशाला बना कर
➡️ मेधावी छात्रों को “विशेषाधिकार का दोषी” ठहरा कर
तय किया जाएगा?
आज डर इस बात का नहीं कि मैं पीछे रह जाऊँ,
डर इस बात का है कि देश का भविष्य गर्त में न चला जाए।
अगर विश्वविद्यालयों में न्याय की जगह विभाजन होगा,
तो 2047 का सपना केवल भाषणों तक सिमट कर रह जाएगा।
यह गुस्सा सरकार से नहीं,
नीति की उस दिशा से है जो भारत को मजबूत नहीं, कमजोर कर रही है।
आज भी उम्मीद है—
क्योंकि सवाल एक कार्यकर्ता पूछ रहा है,
और जवाब देश के भविष्य को देना होगा।

18/01/2026

लखनऊ #गेस्ट_हाउस कांड में #मुलायम_यादव के गुंडे मायावती का कपड़ा फाड़ दिए थें और हत्या करने वाले थें।

तब #ब्रह्मदत्त_द्विवेदी जी मायावती की इज्जत और जान बचाए थें। मायावती गेस्ट हाउस से जब बाहर निकली थी तब उनके शरीर में उनके भाई #ब्रह्मदत्त_द्विवेदी का कपड़ा था ।

#ब्रह्मदत्त_द्विवेदी और सरकारी सुरक्षाकर्मी #अनिल_चौहान(राजपूत) अपने जान में खेलकर मायावती को बचाए थें ।

तो #चंद्रशेखर_रावण आज जो #संतोष_वर्मा का मजबूती से पक्ष ले रहे हो अगर उसी मजबूती से तुम्हारे बाप दादा मायावती जी के साथ खड़े रहते तो #मुलायम के गुंडे उनका अपहरण करके कपड़ा न फाड़ते।

गेस्ट हाउस कांड में उस समय मायावती जी के साथ बहुजन के तथाकथित झंडाबरदार न अहीर था,न कुर्मी था,न कुशवाहा था और न लोधी था,,,

था तो ब्राह्मण(ब्रह्मदत्त द्विवेदी) और राजपूत/क्षत्रिय (अनिल चौहान)

Address

Dumraon
802111

Telephone

+918406093253

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Dilip kumar giri posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Establishment

Send a message to Dilip kumar giri:

Share