Sandeep Sharma

Sandeep Sharma Official Page of Hasya Kavi Sandeep Sharma
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“हम ऐसे लोकतंत्र में जी रहे हैं,जहाँ घोड़े और घास — दोनों को समान स्वतंत्रता है।”हिंदी व्यंग्य को नई धार, नई भाषा और नई ...
21/05/2026

“हम ऐसे लोकतंत्र में जी रहे हैं,
जहाँ घोड़े और घास — दोनों को समान स्वतंत्रता है।”

हिंदी व्यंग्य को नई धार, नई भाषा और नई दृष्टि देने वाले शिखर व्यंग्यकार शरद जोशी जी को जन्मतिथि पर विनम्र प्रणाम।

व्यंग्य की ऐसी ही धार से जुड़ने के लिए मेरा पेज लाइक एवं फॉलो अवश्य करें।


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" जब श्रीलंका की लय मिली धार की मिट्टी से : संस्कृति, संवेदना और साधना का अविस्मरणीय संगम हुआ ” ( समीक्षा - डॉ. संदीप शर...
21/05/2026

" जब श्रीलंका की लय मिली धार की मिट्टी से : संस्कृति, संवेदना और साधना का अविस्मरणीय संगम हुआ ” ( समीक्षा - डॉ. संदीप शर्मा )
धार की सांस्कृतिक चेतना ने फड़के संगीत समारोह के दूसरे दिन मानो नृत्य के माध्यम से अपनी बहुभाषी आत्मा को स्वर दे दिया। 11वें पद्मश्री फड़के संगीत समारोह का यह दिवस केवल प्रस्तुतियों का क्रम नहीं था, बल्कि भारतीयता और वैश्विक लोक-संवेदनाओं के सौंदर्यपूर्ण संगम का साक्षी बना। श्रीलंका से आए युवा कलाकारों ने अपने पारंपरिक परिधानों, मुखाभिनय, नेत्र संचालन और देह-लय की अद्भुत साधना से यह सिद्ध किया कि कला भाषा की मोहताज नहीं होती। विशेषतः “गजराज वर्णम” और “गगरी नृत्य” में प्रकृति, जल और जीव चेतना के प्रतीकों को जिस सौंदर्यबोध के साथ मंच पर उतारा गया, वह दर्शकों के लिए एक दुर्लभ सांस्कृतिक अनुभव था।

किन्तु इस अंतरराष्ट्रीय आभा के बीच स्थानीय प्रतिभाओं ने भी समान ऊँचाई के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। नूपुर कला केंद्र की लगभग 40 बालिकाओं ने जिस अनुशासन, भावाभिव्यक्ति और सांस्कृतिक संस्कार के साथ प्रस्तुतियाँ दीं, उसने यह स्पष्ट किया कि धार की धरती केवल इतिहास की नहीं, भविष्य की कलाधर्मिता की भी भूमि है। “तू प्यार का सागर है”, “जय जय अम्बे माँ” और तांडव जैसी प्रस्तुतियों में भाव, भक्ति और ऊर्जा का त्रिवेणी संगम दिखाई दिया। वहीं “ऑपरेशन सिंदूर”, उरी और पुलवामा जैसे प्रसंगों का मंचीय रूपांतरण केवल प्रस्तुति नहीं, राष्ट्र चेतना का कलात्मक उद्घोष बन गया।
इन समस्त प्रस्तुतियों के पीछे नृत्यांगना एवं प्रशिक्षिका वैषाली देशमुख की साधना विशेष उल्लेखनीय रही। उन्होंने बाल कलाकारों में केवल नृत्य कौशल ही नहीं, बल्कि मंच अनुशासन, भाव संवेदना और सांस्कृतिक आत्मविश्वास का भी सुंदर विकास किया है। उनकी प्रस्तुतियों में तकनीकी संतुलन के साथ भारतीय भावभूमि की गहराई स्पष्ट दिखाई देती है। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि वैषाली देशमुख जैसी साधनारत कला-शिक्षिकाएँ ही छोटे शहरों की सांस्कृतिक परंपरा को राष्ट्रीय पहचान तक पहुँचाने का कार्य कर रही हैं।

समारोह के दूसरे दिन ने यह सिद्ध किया कि जब अंतरराष्ट्रीय लोकधारा और स्थानीय कला-संस्कार एक मंच पर मिलते हैं, तब संस्कृति केवल मनोरंजन नहीं रहती, बल्कि सभ्यता के संवाद का माध्यम बन जाती है।

विशेष सम्मान के अंतर्गत इतिहासकार, मुद्रा विशेषज्ञ तथा इंटेक नईदिल्ली के चेयरमैन अशोक सिंह ठाकुर को “सेनापति उपाधि सम्मान” से अलंकृत किया गया। धार की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत संरक्षण में उनके दीर्घकालीन योगदान, प्राचीन मुद्राओं के विश्वस्तरीय संग्रह तथा जन-जागरण के प्रयासों को इस सम्मान का आधार बनाया गया। सम्मान पत्र का वाचन डॉ. दीपेंद्र शर्मा ने किया। सम्मान करणसिंह पंवार, डॉ. संदीप शर्मा, डॉ. राघवेन्द्र तिवारी तथा नारायण जोशी द्वारा बड़ी संख्या में उपस्थित सुधीजनों के मध्य भेंट किया गया।








With Deependra Sharma – I just got recognised as one of their top fans! 🎉
20/05/2026

With Deependra Sharma – I just got recognised as one of their top fans! 🎉

फड़के संगीत समारोह प्रथम दिवस- ( समीक्षा -डॉ. संदीप शर्मा ) फड़के संगीत समारोह के प्रथम दिवसने धार की सांस्कृतिक चेतना क...
20/05/2026

फड़के संगीत समारोह प्रथम दिवस- ( समीक्षा -डॉ. संदीप शर्मा )
फड़के संगीत समारोह के प्रथम दिवसने धार की सांस्कृतिक चेतना को सुरों की ऐसी दिव्य अनुभूति से भर दिया, जिसे लंबे समय तक स्मरण किया जाएगा।

कार्यक्रम का आरंभ स्थानीय युवा कलाकार मयूर गोयल के प्रभावशाली एकल तबला वादन से हुआ। उनकी ऊर्जावान प्रस्तुति ने न केवल श्रोताओं को शास्त्रीय लय की गंभीरता से जोड़ा, बल्कि यह भी सिद्ध किया कि धार की युवा प्रतिभाएँ राष्ट्रीय स्तर की प्रस्तुतियों के साथ आत्मविश्वास से खड़ी हो सकती हैं।

इसके पश्चात विश्वविख्यात शहनाई वादक डॉ. पं. प्रमोद गायकवाड को “भोज कला सम्मान पुरस्कार 2026” से सम्मानित किया गया। पिता-पुत्री की अद्भुत युगल प्रस्तुति ने मानो पूरे सभागृह को सुरों की साधना में डुबो दिया। राग कलावती में प्रस्तुत बंदिश “तन-मन-धन तोपे वारूँ” से प्रारंभ हुई यह संगीत यात्रा मध्य एवं अतिद्रुत तीनताल की स्वरचित गतों से होती हुई भक्ति और श्रृंगार रस के सुंदर आयामों तक पहुँची।

“माझे माहेर पंढरी” की भक्तिमय प्रस्तुति ने वातावरण को भक्ति रस से सराबोर कर दिया, वहीं बनारसी दादरा “डगर बीच कैसे चलूँ, मगर रोके कन्हैया” ने श्रोताओं को लोक और शास्त्रीय संगीत के अद्भुत संगम का आनंद कराया। समापन राग भैरवी पर आधारित “जो भजे हरि को सदा” से हुआ, जिसने पूरे परिसर को आध्यात्मिक अनुभूति से भर दिया।

तबले पर शिवम मालवीय जिनका लोकप्रिय नाम गप्पा है की संवेदनशील संगति और शहनाई में मींड, गमक, आलाप एवं तानों का प्रभावपूर्ण प्रयोग सुनना संगीत प्रेमियों के लिए अविस्मरणीय अनुभव रहा। विशेष आकर्षण यह भी रहा कि मंच पर एक महिला कलाकार द्वारा इतने दमदार और प्रभावशाली शहनाई वादन ने सभी रसिकों को आश्चर्यचकित और मंत्रमुग्ध कर दिया।

धार में इस स्तर के शास्त्रीय आयोजन यह प्रमाणित करते हैं कि यह नगर केवल इतिहास की भूमि नहीं, बल्कि जीवंत कला-साधना की भी पवित्र धरती है।
judiye -










शब्द केवल भाषा नहीं बनाते, वे युगों की चेतना भी निर्मित करते हैं।आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी ऐसे ही  मनीषी थे, जिन्होंन...
19/05/2026

शब्द केवल भाषा नहीं बनाते, वे युगों की चेतना भी निर्मित करते हैं।
आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी ऐसे ही मनीषी थे, जिन्होंने हिंदी गद्य को केवल साहित्यिक ऊँचाई ही नहीं दी, बल्कि भारतीय संस्कृति, दर्शन, इतिहास और मानवीय संवेदनाओं का अद्भुत विस्तार भी प्रदान किया।
आचार्य परंपरा के इस महान हिंदी महर्षि की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि और कोटिशः नमन।

— डॉ. संदीप शर्मा
Sandeep Sharma #आचार्य_हजारी_प्रसाद_द्विवेदी
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11वाँ पद्मश्री फड़के संगीत समारोह सम्पन्न .तीन दिनों तक धार नगरी संगीत, साधना, संस्कृति और सुरों की दिव्य सरिता में अवगा...
19/05/2026

11वाँ पद्मश्री फड़के संगीत समारोह सम्पन्न .

तीन दिनों तक धार नगरी संगीत, साधना, संस्कृति और सुरों की दिव्य सरिता में अवगाहित रही।
हमारी संस्था भोज शोध संस्थान एवं INTACH के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 11वें पद्मश्री फड़के संगीत समारोह का गरिमामय एवं सुरमयी समापन हुआ।

इस त्रिदिवसीय आयोजन में देश–विदेश से आए प्रतिष्ठित कलाकारों ने गायन, वादन एवं नृत्य की अनुपम प्रस्तुतियों से धार की सांस्कृतिक धरा को अलंकृत किया।
शहनाई की मंगलध्वनि से लेकर ख्याल गायन की आध्यात्मिक ऊँचाइयों तक, श्रीलंकाई लोकनृत्य से लेकर स्थानीय बाल प्रतिभाओं की ऊर्जा तक — हर प्रस्तुति दर्शकों के हृदय में अमिट छाप छोड़ गई।

इस संपूर्ण आयोजन के पीछे डॉ. दीपेंद्र शर्मा की दूरदर्शी परिकल्पना, संगठन निर्माण की अद्भुत क्षमता तथा संस्कृति और धार नगर के प्रति उनका गहरा समर्पण प्रेरणास्रोत रहा।
सीमित संसाधनों में भी इतने व्यापक सांस्कृतिक आयोजन को गरिमा और गुणवत्ता के साथ सम्पन्न करना उनके निरंतर प्रयास, सांस्कृतिक प्रतिबद्धता और टीम भावना का सुंदर उदाहरण है।
उनकी सक्रियता और सांस्कृतिक दृष्टि ने इस समारोह को केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि धार की सांस्कृतिक चेतना का उत्सव बना दिया।

विशेष आनंद इस बात का रहा कि हर वर्ष की तरह इस बार भी स्थानीय प्रतिभाओं को मंच प्रदान किया गया, जिन्होंने अपनी कला से सभी का मन मोह लिया।

इस आयोजन को सफल बनाने वाले सभी कलाकारों, अतिथियों, सहयोगियों, कार्यकर्ताओं, सुधी श्रोताओं, मीडिया बंधुओं एवं संस्कृति प्रेमियों के प्रति हम हृदय से आभार व्यक्त करते हैं।

आगामी दिनों में समारोह के प्रत्येक दिवस की विस्तृत झलकियाँ एवं विशेष प्रस्तुतियाँ अलग-अलग पोस्ट के माध्यम से साझा की जाएँगी। जुड़िये -

संस्कृति तभी जीवित रहती है जब समाज उसके साथ खड़ा रहता है।
आप सभी का स्नेह और सहभाग ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है।
-डॉ. संदीप शर्मा

#पद्मश्री_फड़के_संगीत_समारोह






#धार
#संस्कृति
#कला_और_संगीत

17/05/2026

भोजशाला —
वर्षों तक देशभर के मंचों से भोजशाला की वेदना, उसका इतिहास, हमारी सांस्कृतिक अस्मिता और माँ वाग्देवी के सम्मान की आवाज़ कविता के माध्यम से उठाता रहा।
आज जब निर्णय आया, तो लगा मानो उन शब्दों, उन भावों और उस विश्वास पर भी सत्य की मुहर लग गई।

“वर्षों गाया… फैसला आया…”

— डॉ. संदीप शर्मा


यदि आपको भी लगता है कि संस्कृति, आस्था और सत्य की यह यात्रा आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचना चाहिए, तो इस कविता को अधिक से अधिक साझा करें और इस सांस्कृतिक अभियान से जुड़ें। 🙏
YouTube, Instagram, Facebook और X पर से जुड़ें और कविता, संस्कृति एवं राष्ट्रभाव की इस यात्रा का हिस्सा बनें। 🙏


#कविसंदीपशर्मा


#भोजशाला

#माँ_वाग्देवी


#कवि_सम्मेलन
#सनातन_स्वाभिमान

15/05/2026

भोजशाला-
वर्षों तक देशभर के मंचों से भोजशाला की वेदना, इतिहास, सांस्कृतिक अस्मिता और माँ वाग्देवी के सम्मान की बात कविता के माध्यम से कहता रहा।
आज आए निर्णय ने उन भावों और शब्दों पर भी मानो सत्य की मुहर लगा दी।
- डॉ. संदीप शर्मा

“वर्षों गाया, फैसला आया…”


यदि आपको भी लगता है कि संस्कृति और सत्य की यह विजय आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचना चाहिए, तो इस कविता को अधिक से अधिक साझा करें और इस सांस्कृतिक यात्रा से जुड़ें।
#कविसंदीपशर्मा


#भोजशाला

#माँ_वाग्देवी


#कवि_सम्मेलन
#सनातन_स्वाभिमान

15/05/2026

धर्म, इतिहास और आस्था के इस दीर्घ संघर्ष को आज न्याय का प्रकाश मिला।
माँ वाग्देवी की पावन भूमि भोजशाला धार के सम्मान की पुनर्स्थापना पर समस्त समाज को हार्दिक बधाई।
हिन्दू फ्रंट फॉर जस्टिस तथा भोज उत्सव समिति के सतत संघर्ष, समर्पण और धैर्य को नमन।यह केवल एक निर्णय नहीं, हमारी सांस्कृतिक चेतना और अस्मिता की विजय है।
सत्य, श्रद्धा और सनातन परंपरा के इस गौरवपूर्ण क्षण पर धार सहित पूरे राष्ट्र को अभिनंदन।
माँ वाग्देवी की कृपा से यह संघर्ष सफल हुआ — जय माँ सरस्वती।
- डॉ. संदीप शर्मा

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#मालवा_की_धरती
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#सांस्कृतिक_विजय



#धार_गौरव
#मालवा_गौरव

13/05/2026

जब बंगाल में “जय श्रीराम” बोलने में भी लोग डरते थे,
तब कोलकाता की अपार भीड़ के बीच
मैंने साहस के साथ प्रभु श्रीराम पर कविता सुनाई थी। 🚩

आज वही क्षण फिर याद आ रहा है।
कविता केवल मनोरंजन नहीं होती…
कभी-कभी वह अपने विश्वास के साथ खड़े रहने का साहस भी बन जाती है।

यदि आपको लगता है कि शब्दों में अभी भी आस्था की शक्ति जीवित है,
तो इस वीडियो को अवश्य साझा करें। 🙏

— डॉ. संदीप शर्मा
हास्य-व्यंग्य कवि एवं मंच संचालक
विचार और हास्य के इस सफर को ताकत दीजिये जुड़िये


साइकिल वाली पोस्ट पर कुछ बचकानी  प्रतिक्रियाएँ आईं…तो सोचा, एक बार स्पष्ट रूप से बात कर ली जाए। 🚲🇮🇳**उत्तर – 1 : “सिर्फ ...
12/05/2026

साइकिल वाली पोस्ट पर कुछ बचकानी प्रतिक्रियाएँ आईं…
तो सोचा, एक बार स्पष्ट रूप से बात कर ली जाए। 🚲🇮🇳

**उत्तर – 1 : “सिर्फ फोटो खिंचवाने के लिए…”**
जो लोग मुझे वर्षों से जानते हैं, वे जानते हैं कि मैंने बिना किसी अभियान, कैमरे या सोशल मीडिया के भी हजारों किलोमीटर साइकिल चलाई है।
उस समय न लाइक्स थे, न पोस्ट… सिर्फ जीवनशैली थी। प्रस्तुत चित्र उस समय का है जब हम धार से मांडू 33 किलोमीटर साइकिल से सहज आया जाया करते थे।
मैं जमीन से निकला आदमी हूँ…
PR Management से बनाया गया सितारा नहीं।

**उत्तर – 2 : “मोदी भक्ति…”**
अंधभक्ति का कोई उत्तर नहीं होता।
लेकिन खुली आँखों से इतना तो दिख ही रहा है कि ईंधन, आयात और अनावश्यक खर्च पर नियंत्रण हर देश की आर्थिक आवश्यकता है।
देशहित की हर बात को राजनीति के चश्मे से देखना भी उचित नहीं।

और याद रखिए —
ऐसी अपीलें केवल आज नहीं हुईं।
पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम के समय भी ईंधन बचाने और संयमित उपयोग की अपीलें की गई थीं।

**उत्तर – 3 : “तो कवि सम्मेलनों में भी साइकिल से जाइए…”**
यह थोड़ी बचकानी प्रतिक्रिया है।
पोस्ट में स्पष्ट लिखा था —
“जहाँ तक संभव हो, स्थानीय आवागमन के लिए…”

इसका अर्थ यह नहीं कि जीवन की आवश्यकताओं, लंबी यात्राओं या बड़ी गाड़ियों का उपयोग बंद कर दिया जाए।
संदेश केवल इतना है कि जहाँ छोटी दूरी हो, वहाँ थोड़ा संयम भी देशसेवा बन सकता है।

देशभक्ति का अर्थ दिखावा नहीं…
और न ही हर बात पर उपहास करना सही है। गंभीर बातों पर सार्थक संवाद करना चाइये।
कभी-कभी एक छोटा प्रयास भी सही दिशा में बड़ा संदेश दे जाता है। 🇮🇳
#डॉसंदीपशर्मा
#मंचसंचालक



#राष्ट्रहित #देशहित

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