Poddar & Poddar

Poddar & Poddar Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from Poddar & Poddar, Art, Dhanbad.

फिर एक बार मोदी सरकार
25/05/2024

फिर एक बार मोदी सरकार

13/11/2021
05/11/2021

*चुभन*

पुरानी साड़ियों के बदले बर्तनों के लिए मोल भाव करती एक सम्पन्न घर की महिला ने अंततः दो साड़ियों के बदले एक टब पसंद किया . "नहीं दीदी ! बदले में तीन साड़ियों से कम तो नही लूँगा ." बर्तन वाले ने टब को वापस अपने हाथ में लेते हुए कहा .

अरे भैया ! एक एक बार की पहनी हुई तो हैं.. ! बिल्कुल नये जैसी . एक टब के बदले में तो ये दो भी ज्यादा हैं , मैं तो फिर भी दे रही हूँ . नहीं नहीं , तीन से कम में तो नहीं हो पायेगा ." वह फिर बोला .

एक दूसरे को अपनी पसंद के सौदे पर मनाने की इस प्रक्रिया के दौरान गृह स्वामिनी को घर के खुले दरवाजे पर देखकर सहसा गली से गुजरती अर्द्ध विक्षिप्त महिला ने वहाँ आकर खाना माँगा...

आदतन हिकारत से उठी महिला की नजरें उस महिला के कपडों पर गयी.... अलग अलग कतरनों को गाँठ बाँध कर बनायी गयी उसकी साड़ी उसके युवा शरीर को ढँकने का असफल प्रयास कर रही थी....

एकबारगी उस महिला ने मुँह बिचकाया . पर सुबह सुबह का याचक है सोचकर अंदर से रात की बची रोटियाँ मँगवायी . उसे रोटी देकर पलटते हुए उसने बर्तन वाले से कहा -

तो भैय्या ! क्या सोचा ? दो साड़ियों में दे रहे हो या मैं वापस रख लूँ ! "बर्तन वाले ने उसे इस बार चुपचाप टब पकड़ाया और दोनों पुरानी साड़ियाँ अपने गठ्ठर में बाँध कर बाहर निकला...

अपनी जीत पर मुस्कुराती हुई महिला दरवाजा बंद करने को उठी तो सामने नजर गयी... गली के मुहाने पर बर्तन वाला अपना गठ्ठर खोलकर उसकी दी हुई दोनों साड़ियों में से एक साड़ी उस अर्ध विक्षिप्त महिला को तन ढँकने के लिए दे रहा था ! !!

हाथ में पकड़ा हुआ टब अब उसे चुभता हुआ सा महसूस हो रहा था....! बर्तन वाले के आगे अब वो खुद को हीन महसूस कर रही थी . कुछ हैसियत न होने के बावजूद बर्तन वाले ने उसे परास्त कर दिया था ! !! वह अब अच्छी तरह समझ चुकी थी कि बिना झिकझिक किये उसने मात्र दो ही साड़ियों में टब क्यों दे दिया था .

कुछ देने के लिए आदमी की हैसियत नहीं , दिल बड़ा होना चाहिए....!! आपके पास क्या है ? और कितना है ? यह कोई मायने नहीं रखता ! आपकी सोच व नियत सर्वोपरि होना आवश्यक है .

और ये वही समझता है जो इन परिस्थितियों से गुजरा हो.....! !!

*उम्मीदें तैरती रहती है,*
*कस्तियाँ डुब जाती है,*
*कुछ घर सलामत रहते है*
*आँधिया जब भी आती है।।*

*बचा ले जो हर तूफान से,*
*उसे आस कहते है,*
*बड़ा मजबूत है ये धागा,*
*जिसे विस्वास कहते है।*

05/11/2021

आने वाले 10/15 साल में एक पीढी,संसार छोड़ कर जाने वाली है,
कड़वा है,लेकिन सत्य है।

इस पीढ़ी के लोग बिलकुल अलग ही हैं...
रात को जल्दी सोने वाले, सुबह जल्दी जागने वाले,भोर में घूमने निकलने वाले।

आंगन और पौधों को पानी देने वाले, देवपूजा के लिए फूल तोड़ने वाले, पूजा अर्चना करने वाले, प्रतिदिन मंदिर जाने वाले।

रास्ते में मिलने वालों से बात करने वाले, उनका सुख दु:ख पूछने वाले, दोनो हाथ जोड कर प्रणाम करने वाले, पूजा होये बगैर अन्नग्रहण न करने वाले।

उनका अजीब सा संसार......
तीज त्यौहार, मेहमान शिष्टाचार, अन्न, धान्य, सब्जी, भाजी की चिंता तीर्थयात्रा, रीति रिवाज, सनातन धर्म के इर्द गिर्द घूमने वाले।*

पुराने फोन पे ही मोहित, फोन नंबर की डायरियां मेंटेन करने वाले, रॉन्ग नम्बर से भी बात कर लेने वाले, समाचार पत्र को दिन भर में दो-तीन बार पढ़ने वाले।

हमेशा एकादशी याद रखने वाले, अमावस्या और पुरमासी याद रखने वाले लोग, भगवान पर प्रचंड विश्वास रखनेवाले, समाज का डर पालने वाले, पुरानी चप्पल, बनियान, चश्मे वाले।

गर्मियों में अचार पापड़ बनाने वाले, घर का कुटा हुआ मसाला इस्तेमाल करने वाले और हमेशा देशी टमाटर, बैंगन, मेथी, साग भाजी ढूंढने वाले।

नज़र उतारने वाले, सब्जी वाले से 1-2 रूपये के लिए, झिक झिक करने वाले लोग।*

क्या आप जानते हैं.....

ये सभी लोग धीरे धीरे, हमारा साथ छोड़ के जा रहे हैं।

क्या आपके घर में भी ऐसा कोई है? यदि हाँ, तो उनका बेहद ख्याल रखें।*

अन्यथा एक महत्वपूर्ण सीख, उनके साथ ही चली जायेगी.....वो है, *संतोषी जीवन, सादगीपूर्ण जीवन, प्रेरणा देने वाला जीवन, मिलावट और बनावट रहित जीवन, धर्म सम्मत मार्ग पर चलने वाला जीवन और सबकी फिक्र करने वाला आत्मीय जीवन।

आपके परिवार में जो भी बड़े हों उनको मान सम्मान और अपनापन समय तथा प्यार दीजिये ।।

*संस्कार* ही
*अपराध* रोक सकते हैं
*सरकार* नहीं !!

जल, जंगल, ज़मीन पर ब्रिटिश सम्राज्य के आधिपत्य के विरुद्ध एवं आदिवासियों के अस्मिता, स्वायतत्ता और संस्कृति को बचाने महाव...
09/06/2018

जल, जंगल, ज़मीन पर ब्रिटिश सम्राज्य के आधिपत्य के विरुद्ध एवं आदिवासियों के अस्मिता, स्वायतत्ता और संस्कृति को बचाने महाविद्रोह ‘ऊलगुलान’ चलाने वाले जननायक, स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा को उनकी पुण्यतिथि पर शत्-शत् नमन।
जय झारखण्ड जौहार झारखण्ड

09/12/2017

बिरसा मुंडा भारत के एक आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी और लोक नायक थे जिनकी ख्याति अंग्रेजो के खिलाफ स्वतंत्रता संग्राम में काफी हुयी थी | उनके द्वारा चलाया जाने वाला सहस्राब्दवादी आंदोलन ने बिहार और झारखंड में खूब प्रभाव डाला था | केवल 25 वर्ष के जीवन में उन्होंने इतने मुकाम हासिल कर लिए थे कि आज भी भारत की जनता उन्हें याद करती है और भारतीय संसद में एकमात्र आदिवासी नेता बिरसा मुंडा का चित्र टंगा हुआ है ||

02/11/2017

तुम क्या हो तुम क्या हो तुम क्या जानो की क्या हो उड़ती हुई तितली उड़ती हुई मोरनी हो एक आज़ाद परिंदा हो ना रहना कभी किसी के क़ैद में क्यों कि तुम बनने जा रही दुनियाभर के लिये एक मिसाल हो दुनिया हमेशा उसके ही पीछे ही चलती हैं जो बनती दूसरे के लिये मिसाल है ना जाने कब से बेडियों से जकड़ी हुई हैं दुनिया आगे बढ़ने पर भी रोकते हैं उसे अपने चार दिन भी ज़िंदगी नहीं देती ओर कहती हैं हमारा देश भारत माता हैं और माता बहन और बेटी को ही रोकती हैं अपनी पैरों की जूती समझती हैं और लोग घर से बाहर आने के उस महिला को क्या समझते ये मैं आप लोगों पे छोड़ता हु
निवेदन हैं कि महिलाओं की सम्मान करें
जय हिंद

Address

Dhanbad
826001

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Poddar & Poddar posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share

Category