17/08/2025
यह एक दिन पहले ही तो हमने हमारी आजादी के दिन का उत्सव मनाया?
लेकिन आज इस देश और समाज का अनर्थ इतनी आजादी की सालगिरह मनाने के बाद भी सिर्फ इसलिए हो रहा है क्योंकि वास्तव में हर शब्द का अर्थ, अनर्थ हो चुका है!
और लोग हर चीज को उसी अनर्थ अर्थ के नजरिए से देखते और समझते हैं।
यह सच है कि अगर आपमें से कोई भी आजादी दिवस का उत्सव मनाता है, तो इसका अर्थ है कि वह जाने-अनजाने में इस देश की गरीब आम जनता, मजदूरों और किसानों के साथ वर्षों से हो रहे अत्याचार और धोखे का उत्सव मना रहा है।
सभी समुदाय के लोग, जिन्होंने इस धरती को प्राण से भी अधिक प्रेम किया और खुद की मर्जी से इस मिट्टी का हिस्सा बन गए, उन लोगों का धर्म के नाम पर हर रोज हो रहे कत्लेआम का उत्सव मन रहा है!
जिस धर्मनिरपेक्षता की बुनियाद पर इस देश का संविधान बना, आज खुले-आम अल्पसंख्यकों के धर्मस्थलों को तबाह किया जा रहा है, आदिवासियों को बेघर किया जा रहा है, जल, जंगल और जमीन का कब्जा कर उनका शोषण किया जा रहा है!
टैक्स के नाम पर आम गरीब जनता को नंगा किया जा रहा है!
करोड़ों युवाओं को रोजगार न देकर उनके और देश के भविष्य को अंधकार में धकेला जा रहा है!
ऐसे ही भ्रष्टाचार, महंगाई, अशिक्षा, बीमारी, बेरोजगारी, टूटी सड़कें, बाढ़ और भूस्खलन के शिकार होने के कारण करोड़ों लोग, कुपोषण, बलात्कार, हत्या और आत्महत्या करते जा रहे है!
और अंततः अगर आप या हम में से कोई इस देश के पतन से बचाने के लिए कुछ बोलता है या करना चाहता है, तो एक ऐसे भयानक तंत्र का शिकार हो जाता है जो सिर्फ और सिर्फ जनता की सही आवाज को दबाने के लिए है।
और क्योंकि यह कानूनी ढांचा केवल और केवल जनता के भरोसे के सहारे टिका हुआ है, हजारों में से एक इंसाफ का फैसला सुनाकर यहां जनता को चुप रखने का सुंदर खेल भी खेला जाता है।
हमें उम्मीद है कि इस साल से आप सब आजादी का असली मतलब और मकसद खोजेंगे ताकि सब साथ मिलकर सचमुच इस नर्क से उठकर एक आजाद भारत का सफल निर्माण कर सकें।
यह 2nd innings podcast द्वारा बनाई गयी डॉक्यूमेंट्री का पहला एक अंश है जो आप तक जाना बहुत जरूरी है कि क्यों हमें शुक्रवासा जाकर काम करना शुरू करना पड़ा!
हमारे शहर के इतने पास ऐसी कितनी जगहें हैं जहां हम युवाओं का काम करना जरूरी है।