25/04/2026
ॐ अपवित्र: पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोपि वा।
य: स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स: बाह्याभ्यन्तर: शुचि:।।
जल देह पर छिड़क लीजिए जजमान...
फिर एक एक कर वासिंग मसिनिया मा डुबकी लगाई
कल्याण होई 😀😀 बाबू तबे उद्धार होई जाके 😀😀