Kavi Ashwani Mishra

Kavi Ashwani Mishra (कवि व लेखक)
हिंदी , हिंदू , हिंदुस्तान
इनमें बसती मेरी जान

ॐ अपवित्र: पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोपि वा।य: स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स: बाह्याभ्यन्तर: शुचि:।। जल देह पर छिड़क लीजिए जजमा...
25/04/2026

ॐ अपवित्र: पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोपि वा।
य: स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स: बाह्याभ्यन्तर: शुचि:।।

जल देह पर छिड़क लीजिए जजमान...
फिर एक एक कर वासिंग मसिनिया मा डुबकी लगाई
कल्याण होई 😀😀 बाबू तबे उद्धार होई जाके 😀😀

यह डपोरो की दुनिया तुमको पोर पोर कर देगी यह बिना मतलब की डिग्रियां हरामखोर कर देगी आने वाली नस्लों को इंसानियत सिखाओ पहल...
21/04/2026

यह डपोरो की दुनिया तुमको पोर पोर कर देगी
यह बिना मतलब की डिग्रियां हरामखोर कर देगी
आने वाली नस्लों को इंसानियत सिखाओ पहले
वर्ना ये चकाचौंध की आंधी उसे आदमखोर कर देगी
पं.अश्वनी मिश्रा


Amulya Mishra

जय श्री राम 🚩 एक मुक्तक....इस चकाचौंध से अंधी दुनिया को बतलाया जा सकता है क्या संस्कार की नींव बिना ही धर्म सिखाया जा सक...
24/02/2026

जय श्री राम 🚩
एक मुक्तक....
इस चकाचौंध से अंधी दुनिया को बतलाया जा सकता है
क्या संस्कार की नींव बिना ही धर्म सिखाया जा सकता है
यदि राजा सभी बनेंगे कैसे क्या यह भी संभव है बोलो
खुद के सैनिक मार मार कर क्या राज्य चलाया जा सकता है
पं.अश्वनी मिश्रा

( लखनऊ की घटना तो झांकी है अभी पूरी दुनिया बांकी है )

19/01/2026
23/11/2025


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