Desh Mera Rangeela Hai

Desh Mera Rangeela Hai इस देश की खातिर दम निकले बस इतना अरमान ?

“अपनों का मुखौटा”गांव के अपने पुश्तैनी मकान में रमेश का परिवार सुखी था। दो बेटे, एक बहू, और बूढ़ी मां—सादगी और प्रेम से ...
08/10/2025

“अपनों का मुखौटा”गांव के अपने पुश्तैनी मकान में रमेश का परिवार सुखी था। दो बेटे, एक बहू, और बूढ़ी मां—सादगी और प्रेम से भरा घर। पर कुछ ही महीनों में सब कुछ बदल गया जब रमेश का चचेरा भाई सुरेश शहर से लौटा। वह बहुत मीठा बोलता था, हाथ जोड़कर सबका आशीर्वाद लेता, और हर किसी की मदद करने की बात करता।शुरू में तो सबको लगा कि यह सच्चा परिवर्तन है। रमेश ने अपने घरेलू कारोबार के हिसाब-किताब में भी सुरेश को साझेदार बना लिया। धीरे-धीरे सुरेश ने घर के कागज़ात देखना शुरू किया—“भाई, मैं तो बस मदद करना चाहता हूं”—कहकर वह सबका विश्वास जीत लेता।एक दिन रमेश की मां बीमार पड़ीं, और परिवार कुछ दिनों के लिए अस्पताल में रहा। लौटने पर जब उन्होंने तिजोरी खोली, तो देखा कि घर की जमीन के सारे दस्तावेज और सोने के गहने गायब थे। सुरेश भी घर छोड़कर कहीं जा चुका था। तब सबको समझ में आया कि उसका स्नेह केवल धन की खातिर था।बाद में पता चला कि उसने फर्जी दस्तावेज बनाकर जमीन अपने नाम पर करा ली थी। रमेश ने बहुत संघर्ष के बाद कुछ जमीन वापस पाई, लेकिन जो विश्वास टूटा, वह कभी नहीं जुड़ा।रमेश की मां अक्सर कहा करती थीं –
“बेटा, लालच इंसान को अंधा बना देता है, और धोखा वही देता है जो अपनेपन का मुखौटा पहनता है।”

भारत की न्याय व्यवस्था की विडंबना को समझाने के लिए दो उदाहरण काफी हैं। पहला मामला न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा से जुड़ा है। म...
25/09/2025

भारत की न्याय व्यवस्था की विडंबना को समझाने के लिए दो उदाहरण काफी हैं। पहला मामला न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा से जुड़ा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उनके आवास से नोटों का जला हुआ ढेर बरामद हुआ, लेकिन इसके बावजूद उनके विरुद्ध कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई और वे फिलहाल हाई कोर्ट में न्यायाधीश पद पर आसीन हैं।

न्यायपालिका के सर्वोच्च पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ जब ऐसे गंभीर आरोप लगते हैं और फिर भी व्यवस्था मौन रहती है, तो यह आम आदमी के मन में न्याय प्रणाली के प्रति अविश्वास पैदा करता है। न्यायपालिका लोकतंत्र का स्तंभ मानी जाती है, लेकिन जब उसके भीतर ही पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठते हैं तो पूरा तंत्र कमजोर होता है।

दूसरी ओर, एक साधारण नागरिक जगेश्वर प्रसाद अवस्थी की कहानी है। उन पर केवल सौ रुपये की रिश्वत लेने का झूठा आरोप लगाया गया था। इस मामूली आरोप में उन्हें न्याय पाने के लिए पूरे 39 साल तक इंतजार करना पड़ा। तीन दशक से अधिक का यह इंतजार किसी भी व्यक्ति के जीवन के सबसे कीमती समय को छीन लेने जैसा है। जब अदालत ने अंततः उन्हें बरी किया, तब तक उनकी जवानी बीत चुकी थी और जीवन का एक बड़ा हिस्सा निरर्थक प्रतीक्षा में बीत गया।

सोचिए, मात्र सौ रुपये की रिश्वत का आरोप साबित करने या न करने में भारतीय न्याय व्यवस्था को चार दशक लग गए। यह केवल एक व्यक्ति की त्रासदी नहीं है, बल्कि पूरे तंत्र का आइना है।

इन दोनों उदाहरणों को एक साथ देखने पर साफ होता है कि जहां बड़े और प्रभावशाली पद पर बैठे लोगों के मामले को दबा दिया जाता है, वहीं आम नागरिक को मामूली आरोप में जिंदगी बर्बाद कर दी जाती है। यह तुलना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या न्याय सबके लिए समान है या फिर ताकत और पद ही इसका निर्धारण करते हैं।

यशवंत वर्मा और जगेश्वर प्रसाद अवस्थी के ये दो मामले हमारी न्याय व्यवस्था की जटिलता, असमानता और धीमी गति के सबसे स्पष्ट उदाहरण हैं। यह हमें मजबूर करता है कि हम इस व्यवस्था में सुधार की मांग करें ताकि भविष्य में किसी निर्दोष को इतना लंबा इंतजार न करना पड़े और किसी प्रभावशाली को कानून से ऊपर न माना जाए ।

19/08/2024

एक गिरोह है जो प्रत्येक हिन्दूपर्व पर #भद्रा लेकर आ जाता है। कोई कह रहा था इस बार भद्रा लिंक पर बैठा दी गई है।
सारे, त्यौहार आया ही नहीं और भद्रा आकर बैठ जाती है।
इनके कहने में आओगे तो कोई पर्व ही नहीं मना पाओगे।
प्रत्येक हिन्दू पर्व स्वयं में सम्पूर्ण मुहूर्त होता है इसलिए जी भरकर मनाइए।
रक्षा बंधन केवल राखी बांधने तक ही सीमित नहीं है, सबके लिए इसके कई आयाम और कर्म है।
भद्रावाले और #चर्बीगोलाचार्य तब भी थे जब देश आतताइयों से लुट रहा था। कोई मुहूर्त या कोई भद्रा नहीं बचा सकी।
बचे वही जिन्होंने पुरुषार्थ किया।
इसलिए स्वयं के चैतन्य मस्तिष्क से विचार कर जो मन में आये कीजिये।
ॐ शिवमस्तु।
#कुमारsचरित

कानपुर में दो दिन पहले एक 7 साल की मासूम को अपनी हवस का शिकार बनाने वाला 70 साल का आरोपी मौलाना मुख्तार को गिरफ्तार कर ल...
14/08/2024

कानपुर में दो दिन पहले एक 7 साल की मासूम को अपनी हवस का शिकार बनाने वाला 70 साल का आरोपी मौलाना मुख्तार को गिरफ्तार कर लिया गया है. मासूम को चॉकलेट का लालच देकर अपने घर ले जाकर हैवानियत की सभी हदें पार करने वाले इस मौलाना ने बच्ची से रेप करने की कोशिश की थी, जिसका वीडियो पड़ोसियों ने बनाकर इस करतूत का भंडाफोड़ दिया था, लेकिन पब्लिक और पुलिस को चकमा देकर भाग निकले मौलाना को पुलिस ने धरदबोचा है.

जरूरत की खबर-पड़ोसी डीजे बजा रहा तो क्या करें:हार्ट अटैक का खतरा, डीएम और सुप्रीम कोर्ट से मिलेगी मदद       लेखक: गौरव त...
20/04/2024

जरूरत की खबर-
पड़ोसी डीजे बजा रहा तो क्या करें:

हार्ट अटैक का खतरा,

डीएम और सुप्रीम कोर्ट से मिलेगी मदद
लेखक: गौरव तिवारी

फर्ज करिए आप सारा दिन ऑफिस से काम करके घर लौटते हैं। शरीर और दिमाग इतने थक गए हैं कि आपको डिनर के बाद अच्छी नींद की सख्त जरूरत है। तभी आपका पड़ोसी तेज आवाज में डीजे बजा देता है। शोर इतनी तेज की घर की खिड़कियां तक कांप रही हैं।

सिचुएशन इससे अलग भी हो सकती है। आपके बच्चे की परीक्षाएं चल रही हैं या घर में कोई सदस्य बीमार है। दोनों को शांति और सुकून चाहिए। ऐसी किसी भी सिचुएशन में लाउड स्पीकर या डीजे आफत से कम नहीं हैं। इससे नींद खराब होने के अलावा मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है।

ऐसे में सवाल उठता है कि इसके लिए शिकायत कहां दर्ज करवा सकते हैं?

इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में जानेंगे कि ऐसे मामलों में हमारे क्या अधिकार हैं?

-क्या लाउड स्पीकर से मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा?

-क्या डीजे बजा रहे शख्स को हो सकती है जेल?

-इससे सेहत पर क्या असर पड़ता है?

-क्या सलाह देते हैं विशेषज्ञ?

एक्सपर्ट- रुद्र विक्रम सिंह, एडवोकेट, सुप्रीम कोर्ट

सवाल: डीजे और लाउड स्पीकर को लेकर क्या कानून हैं?

जवाब: आप जब शादी पार्टी में जाते होंगे तो डांस फ्लोर पर एक नोटिस देखा होगा। उसमें लिखा रहता है कि 10 बजे के बाद डीजे बजाना अपराध है, साथ ही जुर्माने की रकम भी लिखी रहती है। दरअसल इससे संबंधित कानून है। ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) कानून-2000 के मुताबिक रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर और डीजे बजाने पर पाबंदी है।

हालांकि, इसे लेकर कोई बाध्यता नहीं है। राज्य सरकार को यह अधिकार दिया गया है कि वह कुछ शर्तों के साथ रात 12 बजे तक लाउडस्पीकर और डीजे बजाने की इजाजत दे सकती है। लेकिन रात के 12 बजे के बाद किसी को भी लाउडस्पीकर या डीजे बजाने की इजाजत नहीं है। ऐसा करना गैर कानूनी है यानी अपराध की श्रेणी में आता है। इस बारे में राष्ट्रीय हरित अधिकरण यानी NGT यह कह चुका है कि एक तय सीमा से तेज लाउडस्पीकर और डीजे बजाने की इजाजत नहीं दी जा सकती है।

सवाल: क्या शोर के लिए कोई मानक तय है?

जवाब: इसके लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने अलग-अलग इलाकों के लिए शोर के अलग-अलग लेवल तय किए हैं। नीचे दिए ग्राफिक से समझिए-

undefined - Dainik Bhaskar
सवाल: क्या लाउड स्पीकर आपके मौलिक अधिकार का हनन कर रहे हैं?

जवाब: हां, इस बारे में सुप्रीम कोर्ट कह चुका है कि संविधान के अनुच्छेद 21 में जीवन जीने के अधिकार के तहत ध्वनि प्रदूषण मुक्त वातावरण में रहने का अधिकार भी आता है। किसी को धार्मिक आयोजन या सांस्कृतिक आयोजन के नाम पर भी यह छूट नहीं मिलती है। कोई किसी को भी जबरन भजन, गाना या धार्मिक उपदेश सुनने के लिए बाध्य नहीं कर सकता है।

आपने कभी-न-कभी यह सुना या पढ़ा होगा कि आपके अधिकारों की सीमा वहीं तक है जहां से दूसरों के अधिकारों का हनन न हो। अगर देर रात तक लाउडस्पीकर या डीजे बजाने से किसी की नींद खराब होती है या मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ता है, तो यह उसके मौलिक अधिकारों का हनन है।

इसके खिलाफ पीड़ित व्यक्ति को अधिकार है कि वह-

अनुच्छेद 32 के तहत सीधे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है।
अनुच्छेद 226 के तहत सीधे हाई कोर्ट जा सकता है।
रात में लाउड स्पीकर और डीजे बजाने पर रोक लगाने की मांग भी कर सकता है।
268 IPC के तहत मुकदमा दर्ज करवाया जा सकता है

बगदुल.....!!
19/11/2022

बगदुल.....!!

एक तालाब था उसमें एक मछली रहती थी और पास में ही एक बगुला..

मछली अपने तालाब की सबसे होशियार लड़की थी.. पढ़ने में तेज घर के सभी कामो में एकदम चतुर..

बगुले की उसपर काफी समय से नजर थी.. उसने एक दिन उससे बात करने की कोशिश की.. मछली ने अपने घर वालों से बताया तो घर वालों ने समझाया बेटा बगुले से दूर रहना खा लेगा तुम्हे.. लड़की बोली ठीक है... घर वाले भी इतना समझाकर सोचे हो गया हमारा कर्तव्य..

लेकिन बगुले को पता था कैसे फांसना है मछली को... उसकी ट्रेनिंग थी उसके पास.. उसने पढा था इन सबके बारे में.. वो जानबूझकर उसके आसपास घूमता.. कभी आम खाता कभी जामुन कभी अमरूद.. मछली सोचने लगी घर वाले तो बोलते हैं ये बगुले तो मछली कीड़े सब खाते हैं.. ये तो नही खा रहा.. कुछ दिनों बाद मछली से उसने फिर बात की.. मछली धीरे धीरे उससे बात करने लगी.. उसे घरवालों की तमाम बातें झूठी लगने लगी जो उसने बगुले के बारे में सुन रखी थी..
वो प्यार से उसे बगदुल कहने लगी..

कोई समझाता तो कहती मेरा वाला बगदुल वैसा नही है..

वो मछली नही खाता.. मेरे परिवार और मेरी इज्जत करता है.. स्मार्ट गोरा भी है.. मेरा बगदुल अलग है..

एक दिन वो अपने बगदुल के पास जाती है.. बगदुल उसे बिना नमक मिर्ची के खा जाता है.. समाप्त।

05/10/2022

अधर्म पर धर्म की विजय, असत्य पर सत्य की विजय,
बुराई पर अच्छाई की विजय, पाप पर पुण्य की विजय,
अत्याचार पर सदाचार की विजय क्रोध पर दया, क्षमा की विजय
और अज्ञान पर ज्ञान की विजय !!
दशमी तिथि पर भगवान राम ने रावण का वध कर किया था और माता सीता को वापस लेकर आए थे, जिसकी खुशी में हर दशहरे का त्योहार मनाया जाता है।
दशहरा की शुभकामनाएं !
जय श्री राम !

04/10/2022

मां दुर्गा की 9वीं शक्ति सिद्धिदात्री देवी है।
मां दुर्गा के सिद्ध और मोक्ष देने वाले स्वरूप को मां सिद्धिदात्री कहा जाता है, इनकी पूजा करने से सभी कार्य सिद्ध होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि नवरात्रि के आठ दिन मां दुर्गा की आराधना करने वालों को मां नौंवे दिन सभी की मनोकामना पूरी करती हैं।
मां सिद्धिदात्री मां लक्ष्मी की तरह कमल पर विराजमान रहती हैं और ये चार भुजाओं से युक्त हैं। इनकी दाहिनी तरफ के नीचे वाले हाथ में कमल पुष्प और ऊपर वाले में शंख है। वहीं बाएं तरफ के नीचे वाले हाथ में गदा और ऊपर वाले हाथ में चक्र है। मां दुर्गा इस रूप में लाल वस्त्र धारण की हैं।
धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख है कि मां सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव ने सभी प्रकार की सिद्धियों को पाने के लिए देवी सिद्धिदात्री की उपासना की थी । तब देवी ने प्रसन्न होकर शिव जी को सभी सिद्धियां दीं, तब शिव जी का आधा शरीर देवी सिद्धिदात्री का हो गया, जिसके बाद शिव जी को अर्धनारीश्वर कहा गया ।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व ये आठ सिद्धियां हैं। भक्तों को ये सभी सिद्धियां देने के कारण ही देवी दुर्गा के इस स्वरूप को सिद्धिदात्री कहा जाता है।
मां को प्रसन्न करने के लिए भोग में हलवा-पूड़ी, चने और खीर का भोग लगाएं ।
शास्त्रानुसार अष्टमी या नवमी में से किसी एक दिन कन्या पूजन अवश्य करना चाहिए ।

माता सिद्धिदात्री के मंत्र
सिद्ध गन्धर्व यक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि।
सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥

वन्दे वांछित मनोरथार्थ चन्द्रार्घकृत शेखराम्।
कमलस्थितां चतुर्भुजा सिद्धीदात्री यशस्वनीम्॥

03/10/2022

शारदीय नवरात्रि के आठवें दिन मां के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा- अर्चना की जाती है।

नवरात्रि के आठवें दिन का महत्व बहुत अधिक होता है। इस दिन कन्या पूजन भी किया जाता है। मां महागौरी का रंग अंत्यत गोरा है।
धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा भाव से जो कोई भी व्यक्ति व्रत रखता है और मां महागौरी की उपासना करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। मां महागौरी को ममता की मूरत कहा जाता है। मां महागौरी करुणामयी, स्नेहमयी, शांत और मृदुल स्वभाव वाली हैं।
यह सफेद वृषभ यानी बैल पर सवार है। माता का दाहिना हाथ अभय मुद्रा में है तो बायां हाथ में शिव का प्रतीक डमरू और नीचे वाला हाथ से मां वर दे रही हैं और एक हाथ में माता के त्रिशुल शोभा दे रहा है। डमरू होने के कारण महागौरी को शिवा भी कहा जाता है।

इनकी शक्ति अमोघ और सद्यः फलदायिनी है। महागौरी की कृपा मात्र से सभी संकट दूर हो जाते हैं और हर असंभव कार्य पूर्ण हो जाता है।

मां दुर्गा की आठवीं शक्ति मूल भाव को दर्शाती है और इनकी पूजा करने से सोम चक्र जाग्रत होता है। देवीभगवत् पुराण में के अनुसार, 9 रूप और 10 महाविघाएं सभी आदिशक्ति के अंश और स्वरूप हैं लेकिन महादेव के साथ अर्धांगिनी स्वरूप में महागौरी सदैव विराजमान रहती हैं।

श्वेते वृषे समारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेव प्रमोददा॥

02/10/2022

नवदुर्गा का सातवां स्वरूप हैं मां कालरात्रि, जो काफी भयंकर है.
मां कालरात्रि तीन नेत्रों वाली देवी हैं।. मां कालरात्रि के गले में विद्युत की अद्भुत माला है. इनके हाथों में खड्ग और कांटा है. गधा देवी का वाहन है. ये भक्तों का हमेशा कल्याण करती हैं, इसलिए इन्हें शुभंकरी भी कहते हैं.
मां कालरात्रि की पूजा करने से जीवन के सारे दुख, सारे संकट खत्म हो सकते हैं.
मां कालरात्रि का शरीर अंधकार की तरह काला है। मां के बाल लंबे और बिखरे हुए हैं।
मां कालरात्रि के चार हाथ हैं। जिनमें एक हाथ में खडग अर्थात तलवार, दूसरे में लौह अस्त्र, तीसरे हाथ अभय मुद्रा में है और चौथा वरमुद्रा में है।

कहा जाता है जो भी भक्त नवरात्रि के सांतवें दिन विधि-विधान से मां कालरात्रि की पूजा करता है, उसके सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। मां कालरात्रि की पूजा से भय और रोगों का नाश होता है। साथ ही भूत प्रेत, अकाल मृत्यु ,रोग, शोक आदि सभी प्रकार की परेशानियों से छुटकारा मिलता है। शत्रु और विरोधियों को नियंत्रित करनेके लिए इनकी उपासना अत्यंत शुभ होती है. इनकी उपासना से नकारात्मक ऊर्जा का (तंत्र-मंत्र) असर नहीं होता है. ज्योतिष में शनि नामक ग्रह को नियंत्रित करने के लिए इनकी पूजा करना अद्भुत परिणाम देता है

ध्यान मंत्र
एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता, लम्बोष्टी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी।
वामपादोल्ल सल्लोहलता कण्टक भूषणा, वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी॥

01/10/2022

कात्यायनी देवी को छठवीं दुर्गा देवी के रूप में पूजा जाता है। महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर आदिशक्ति ने, पुत्री के रूप में उनके यहां जन्म लिया. मां कात्यायनी की पूजा से धर्म, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। माँ कात्यायनी अमोघ फलदायिनी हैं,इनका स्वरुप अत्यंत ही भव्य और दिव्य है।

मां कात्यायनी के स्वरूप की बात करें तो माता रानी का स्वरूप अत्यंत भव्य व दिव्य है। मां की चार भुजाएं हैं और मां का वाहन सिंह हैं। एं ओर की ऊपर वाली भुजा अभय मुद्रा में है औप नीचे वाला हाथ वर मुद्रा में है। बाई ओर का उपर वाला हाथ तलवार लिए है और नीचे वाला हाथ कमल के फूल है।
मां दुर्गा इन्हीं के रूप में महिषासुर का वध कर उसके आतंक से देव और मनुष्यों को भय मुक्त किया था। इसलिए मां कात्यायनी को महिषासुरमर्दिनी के नाम से भी जाना जाता है। इनको ही ईश्वरी, गौरी, उमा, काली, रमा, हेमावती, कल्याणी आदि नामों से जाना जाता है।

माता कात्यायनी का स्वरूप का ध्यान कर लेने से भर से जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। मां कात्यायनी अपार आंतरिक शक्ति का प्रतिनिधित्व करने वाली मां हैं। देवी का यह छठा स्वरूप अदभुत तरंगों से सराबोर आज्ञा चक्र की ऊर्जा है। भारतीय दर्शन के अनुसार, आज्ञा चक्र शरीर में शक्ति केंद्र का छठवां मूल चक्र होता है। नवग्रहों में माता कात्यायनी शुक्र ग्रह को नियंत्रित करती हैं, जिससे वह विवाह संबंधित सभी समस्याओं और अड़चनों को दूर करती हैं।

माता का मंत्र
चंद्रहासोज्जवलकरा शार्दूलवर वाहना ।
कात्यायनी शुभंदद्या देवी दानवघातिनि ।।

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