05/04/2016
सात शुद्ध स्वर (Seven Notes)
संगीत की वर्णामाला में मात्र सात ही अक्षर हैं और इन अक्षरों को अक्षर (Letters) नहीं, बल्कि स्वर (Notes) कहा जाता है। यहां विशेष ध्यान रखने की बात यह है कि हमारी हिन्दी भाषा की लिपि देवनागरी है और इसमें उन्चास अक्षर हैं। अंग्रेजी भाषा की लिपि रोमन है और इसमें कुल छब्बीस अक्षर हैं। परन्तु संगीत की भाषा तो पूरे विश्व में एक ही है और इसमें मात्र सात अक्षर ही हैं। सबसे बड़ी बात तो यह है कि हिन्दी और रोमन लिपि के अक्षर स्वर और व्यंजन दो भागों में विभाजित होते हैं, परन्तु संगीत के इन सातों अक्षरों को स्वर ही कहा जाता है। इनके लिए शब्द अक्षर नहीं, बल्कि स्वर का ही प्रयोग होता है, परन्तु अंग्रेजी में इन्हें वॉवल्स (Vowels) नहीं, बल्कि नोट्स कहा जाता है। हिन्दी और अंग्रेजी दोनों ही भाषाओं में इन सात स्वरों के पूरे शास्त्रीय नाम, सामान्य प्रचलित छोटे नाम और इनके चिह्न इस प्रकार है—
स्वर का नाम छोटा नाम चिह्न अंग्रेजी नाम अंग्रेजी चिह्न
1. षड्ज सा स do c
2 ऋषभ रे र re d
3. गांधार गा ग me E
4. मध्यम म म Fa F
5. पंचम पा प Sol G
6. धैवत ध ध le A
7. निषाध नि न Si B
इन सात स्वरों (Notes) पर ही संगीत के संसार का सम्पूर्ण साम्राज्य खड़ा है, अतः आप इस अध्याय का आगे भी बारम्बार अध्ययन करते रहें और सभी सूचनाओं, चार्टों, नामों और चिह्नों को अपने मन और मस्तिष्क में अच्छी प्रकार बसा लें। जैसा कि आप ऊपर देख रहे हैं, हिन्दी में तो स्वरों के पूरे नाम, छोटे नाम और चिह्न परस्पर मिलते-जुलते हैं। प्रथम स्वर का पूरा षड्ज, छोटा नाम सा और चिह्न स है, और यही स्थिति सभी नामों की है। परन्तु अंग्रेजी में इनके पूरे नाम ही हैं, नामों में छोटे-बड़े का भेद नहीं और इनके नाम व चिह्न भी परस्पर मिलते-जुलते रूप में नहीं हैं। अंग्रेजी में षड्ज को डू (Do) कहा जाता है, तो इसका चिह्न C है। इसी प्रकार निषाध को सी (Si) कहा जाता है और इसका चिह्न B है। वैसे आपका काम तो स्वरों के हिन्दी नामों और चिह्नों को समझने से ही चल जायेगा; क्योंकि आगे इस पुस्तक में अंग्रेजी नामों और निशानों का प्रयोग नहीं किया गया है। यह जानकारी तो मात्र इसलिए दी गयी है कि संगीत सभाओं और ऑरकेस्ट्रा में विभिन्न वाद्ययन्त्रों को बजाने वाले अधिकांश वादक दूसरों को प्रभावित करने के लिए अंग्रेजी के इन नामों का प्रयोग करते हैं। वैसे आपके समान ही वे भी हिन्दी की स्वरलिपियों के अनुसार ही धुनें बजाते हैं और हिन्दी में प्रकाशित पुस्तकों का अध्ययन करते हैं।
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