28/03/2020
World theatre day अंतरराष्ट्रीय रंग मंच दिवस, को एक दिन हो गुज़र चुका हे , और मैं इं तास्वीरो के पिछे छूपे हुए पगलो के बारे मैं सोच रहा हूँ पेहली तस्वीर उनकी है ज़िनहे आप टोम अल्टर और मैं सर के नाम से जनता हूँ, ये तो मेरी खुश किस्मत है के आपने मुझे अपने हज़ूर होने का मोका दिया, वागारना मैं तो उन्मे से हूँ जिनको आपके पेरो की धूल नसीब होती और सरे जहाँ को ख़ुशी से खबर देता. .
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आगे जा कर piyush सर नज़र आयेंगे, आपकी शागीर्दी अगर हासिल होती मुझे... मगर फिर सब कुछ अगर यूही मिल जाता तो बेटा ज़िन्दगी का नाम ज़िन्दगी ना होता, मैं रंगमंच सफर मैं हूँ, तकरीबन 10 सालो से, आज तक ज़रा बहत किया है तो आप दोनो को देख कर किया है, काश के अपना भी कुछ कर सकू... *-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-**-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*- इस सफर मैं जिन लोगो का सबसे बेहतरींन साथ रहा है वो मेरे दिल्लो के रंगमंच के साथी हैँ, थियेटर दिल्ली से मुंबई बिहार राजिस्थांन और नाजाने हे कितने शिहरो मैं ले गया, मगर दिल्ली और मुंबई दिल के करीब हैँ और श्यद हमेशा रहेंगे , दिल्ली मैं sayeed alam यर से सीखा उनही की वजहा से श्यद आज ज़रा बहत कुछ कर प रहा हूँ, *-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-**-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*- फिर हुआ यूँ की ज़िदो की का शजर खड़ा होने लगा कुछ सरफिरे एकसाथ बेठ चाये और सिगरट पिने लगे, खुद को थियेटर artist कहते थे, इसी भीड़ मैं से जब कुछ से बार्दाश ना हुआ तो चीख पड़ा, नाटक करना है, फिर बाकी सब भी बोल उठे और थियेटर आवाज़ की एक धुन्दली तस्वीर एक शक्ल लेने लगी, अभी भी ये तस्वीर की पेहचांन करना बड़ा मुशकिल है, मगर फिर भी तुम सभी ने पुरज़ोर कोशिश की है
ऐ मेरे शब-बेदारी के साथियो तुम सभी का शुक्रिया
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