17/06/2026
गिरफ़्तारी के दौरान, नाज़िम हिक़मत का मनोबल तोड़ने और उन्हें ज़लील करने के लिए जो यातनाऍं दी गयीं उसके बारे में नाज़िम हिक़मत -
स्पानी भाषा के महान क्रान्तिकारी कवि पाब्लो नेरूदा को, रिहाई के बाद, नाज़िम ने बताया कि जब हर तरह से परेशान करके वे मुझे तोड़ नहीं पायें, तो उन्होंने मुझे एक ऐसी तंग जगह बन्द कर दिया, जहाँ घुटनों-घुटनों पाखाना उफन रहा था। बदबू और गन्दगी से मेरा सर चकराने लगा और लगा कि मैं बेहोश होकर गिर जाऊँगा। तभी यक्-ब-यकू मुझे ख़्याल आया कि दुश्मन मुझ पर नज़र रख रहा है। वह तो चाहता ही है कि मैं इस सबसे घबरा कर टूट जाऊँ और कीड़ों की तरह बजबजाऊँ! और बस, यह सोचते ही मेरी झुकी हुई गर्दन तन गयी, सीना फूल गया और गले की पूरी आवाज़ में मैंने गाना शुरू कर दिया। तरह-तरह के, इश्क़ और मोहब्बत के नग़मे, मेरी अपनी नज़्में, जहाज़ियों और किसानों के लोकगीत, मार्चिंग साँगः ग़र्ज़ यह कि जितना जो कुछ मुझे याद था, जो कुछ मैं याद कर पाया, वो सब भरपूर उठान के साथ गाया।.... और, बिरादर, उन्हीं गीतों ने, मेरे गले की उसी आवाज़ ने दुश्मन के मंसूबों को पस्त करने की मुझे ताक़त दी।...